डॉलर के आगे रुपया हुआ पस्त, रिकॉर्ड गिरावट से बढ़ेगी बाजार में टेंशन
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 14 May 2026 1:11 PM
Rupee vs Dollar (Photo: AI)
Rupee vs Dollar: रुपये में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है और यह ₹95.83 तक लुढ़क गया है. एक्सपर्ट्स से जानिए कि क्या आने वाले दिनों में रुपया ₹97 के स्तर को पार कर जाएगा.
Rupee vs Dollar: गुरुवार, 14 मई को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. बाजार खुलते ही रुपया 95.72 पर था, जो पिछले बंद भाव से कमजोर था, और कारोबार के दौरान यह और नीचे चला गया. इस गिरावट के पीछे सरकार द्वारा सोने, चांदी और प्लेटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना और वैश्विक तनाव जैसे बड़े कारण शामिल हैं.
रुपया गिरने की असली वजह क्या है?
रुपये की इस कमजोरी का कोई एक कारण नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक दिन की हलचल नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हालातों का नतीजा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और राष्ट्रपति ट्रंप व शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर अनिश्चितता ने बाजार को डरा दिया है. इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए सबसे बड़ी मुसीबत हैं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, जिसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर हो जाता है.
आम आदमी और व्यापार पर क्या असर होगा?
रुपये के कमजोर होने का मतलब है कि अब विदेश से सामान मंगाना महंगा हो जाएगा. इसका सीधा असर मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है क्योंकि इनके पार्ट्स बाहर से आते हैं. साथ ही, तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ेगा, जिससे फल-सब्जियों और अन्य जरूरी चीजों की महंगाई बढ़ सकती है. हालांकि, जो कंपनियां भारत से सामान या सेवाएं बाहर भेजती हैं, जैसे IT सेक्टर और कुछ फार्मा कंपनियां, उन्हें इस गिरावट से फायदा होगा क्योंकि उन्हें डॉलर के बदले अब ज्यादा रुपये मिलेंगे.
क्या आगे और गिरेगा रुपया?
बाजार विशेषज्ञों, जैसे INVAsset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दसानी का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो रुपया 96 से 97 के स्तर तक भी जा सकता है. विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालना और विदेशी कर्ज का भुगतान भी रुपये पर दबाव बना रहा है. राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस स्थिति पर नजर रखे हुए है. भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) और विदेशों से आने वाला पैसा (Remittances) एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जिससे रुपये को एकदम से बिखरने से बचाया जा सकेगा.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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