देवघर : 1.63 करोड़ खर्च के बाद भी एग्रोटेक पार्क पड़ा बेकार, उग आयी झाड़ियां
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Apr 2018 6:52 AM
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देवघर : करोड़ों खर्च कर जनता के लिए योजनाएं तैयार होती है पर उदासीनता के कारण योजनाओं का बुरा हश्र हो रहा है. इसका एक उदाहरण शिल्पग्राम में 1.63 करोड़ की लागत से बना एग्रोटेक पार्क है. 2012 में बने इस पार्क पॉली ग्रीन हाउस में औषधीय फूलों की खेती के अलावा इसका सौंदर्यीकरण कर […]
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देवघर : करोड़ों खर्च कर जनता के लिए योजनाएं तैयार होती है पर उदासीनता के कारण योजनाओं का बुरा हश्र हो रहा है. इसका एक उदाहरण शिल्पग्राम में 1.63 करोड़ की लागत से बना एग्रोटेक पार्क है.
2012 में बने इस पार्क पॉली ग्रीन हाउस में औषधीय फूलों की खेती के अलावा इसका सौंदर्यीकरण कर पर्यटकों व बच्चों के आकर्षण का केंद्र बनाना था. लेकिन, पार्क बनाकर तो छोड़ दिया गया किंतु पार्क की देखभाल व पॉली ग्रीन हाउस चलाने के लिए स्टाफ बहाल नहीं किये गये. इसके अलावा पार्क के मेंटेनेंस के लिए भी फंड उपलब्ध नहीं कराया गया. इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजनाएं तैयार करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा दिया जा रहा है पर इसका लाभ लोगों को कैसे मिले ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अब यह जिला उद्यान विभाग को हैंड ओवर कर देने के बाद भी पूरी तरह से वीरान हो चुका है.
पर्यटकों के लिहाज से विकसित किये गये शिल्प ग्राम में एग्रोटेक पार्क निर्माण से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी थी. पौधाें व फूलों की खेती करने के लिए विभाग को आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा गया था. लेकिन, सरकारी उपेक्षा की वजह से आज करोड़ों रुपये बर्बाद हो चुके हैं.
एग्रोटेक पार्क का उद्देश्य
एग्रोटेक पार्क में औषधीय पौधा लगाना व फूलों की खेती की योजना थी. साथ ही एग्रोटेक पार्क के विकास के लिए पांच पॉली हाउस, ड्रिप सिंचाई मशीन, जमीन का समतलीकरण, बच्चों का झूला समेत पर्यटकों के बैठने के लिए चबूतरा का निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण आदि कार्यों को पूरा करने की योजना थी.
वर्तमान में स्थिति
नंदन पहाड़ स्थित शिल्पग्राम परिसर में 1.63 करोड़ की लागत से बनाया गये एग्रोटेक पार्क के पॉली ग्रीन हाउस में औषधीय पौधे व फूलों की जगह जंगल-झाड़ियां उग आयी हैं. पॉली हाउस जगह-जगह से टूट-फूट चुका है. छप्पर उजड़ चुका है. जमीन समतलीकरण की जगह बंजर हो चुका है. ड्रिप सिंचाई मशीन जंग खा रही है. बच्चों का झूला बेकार हो चुका है. चबूतरा आज भी पर्यटकों के आने का इंतजार कर रहा है. सौंदर्यीकरण की जगह तालाब सूख चुका है.
जिला उद्यान पदाधिकारी ने कहा
एग्रोटेक पार्क के मेंटनेंस के लिए 20 उद्यान सेवक सहित मेंटनेंस के लिए पांच लाख का डिमांड किया गया है. लेकिन, विभाग से कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है. पुन: मांग किया जायेेगा. मैनपावर सहित पैसा आने के बाद आगे काम किया जायेगा.
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