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बीमार पड़ने पर झोलाछाप ही एकमात्र सहारा

Updated at : 13 Sep 2025 8:11 PM (IST)
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बीमार पड़ने पर झोलाछाप ही एकमात्र सहारा

प्रखंड अंतर्गत दंतार, जोलडीहा व पैनीकला पंचायत के लोग आज भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं. तीनों पंचायतों की आबादी लगभग 30 हजार है.

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जोरी. प्रखंड अंतर्गत दंतार, जोलडीहा व पैनीकला पंचायत के लोग आज भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं. तीनों पंचायतों की आबादी लगभग 30 हजार है. इतनी बड़ी आबादी आज भी झोलाछाप पर आश्रित है. बताया जाता है कि तीनों पंचायतों में स्वास्थ्य उपकेंद्र है, लेकिन यहां चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी नहीं रहते हैं. तीनों केंद्र हमेशा बंद रहता है. ऐसी स्थिति में ग्रामीण झोलाछाप से इलाज कराने को विवश हैं. कोई मरीज यदि अधिक बीमार हो जाये, तो उन्हें हंटरगंज, गया, चतरा, हजारीबाग या रांची जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार गरीब तबके के लोग यहां आज भी भगवान के भरोसे हैं. प्रखंड मुख्यालय से दंतार की दूरी 18 किमी, जोलडीहा की दूरी 35 किमी व पैनीकला पंचायत मुख्यालय की दूरी 13 किमी है. लेकिन, यहां के स्वास्थ्य उपकेंद्रों में विभागीय तौर पर चिकित्सा की व्यवस्था नहीं की गयी है. ऐसे में ग्रामीणों को झोलाछाप से इलाज कराने के कारण जान तक गंवानी पड़ी है. ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी के साथ पंचायतों में सड़क का भी हाल बेहाल है. जर्जर व कीचड़युक्त सड़क के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है. ग्रामीणों ने कई बार सांसद, विधायक व जिला प्रशासन से स्वास्थ्य उपकेंद्रो को क्रियाशील करते हुए वहां चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी व पर्याप्त दवा उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं बरती. वर्जन::::

घर परिवार में किसी की तबीयत बिगड़ने पर झोलाछाप का ही एक मात्रा सहारा है. विवश होकर इलाज कराना पड़ता है, जिससे जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है. एंबुलेंस सुविधा भी नहीं मिल पाती है.

विलास सिंह, कुरखेता ग्राम

जिला प्रशासन पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र में सुविधा बहाल करें, इसके बाद झोलाछाप व अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई करें. हम सभी झोलाछाप पर ही आश्रित हैं. परिवार में बीमार पड़ने पर लोगों को लेकर कहां जायें.

रूपलाल भारती, जोलडीहा

अगर स्वास्थ्य उपकेंद्र में व्यवस्था होती, तो इलाज कराने में सुविधा होती. राशि की बचत के साथ-साथ जान नहीं गंवानी पड़ती. सरकारी उपेक्षा के कारण बड़ी आबादी को झोलाछाप से इलाज कराना पड़ता है.

गोविंद यादव, पैनीकला

छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज कराने के लिए लंबी दूरी तय कर हंटरगंज, गया व चतरा जाना पड़ता है. इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उपायुक्त इस मामले में गंभीरता बरते, ताकि स्वास्थ्य सुविधा मिले.

कामेश्वर साहू, पूर्व मुखिया, दंतार

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ SINGH

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