हंटरगंज में कास्ट और रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट बनवाने में छूट रहे पसीने, साल भर में भी नहीं होता काम
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 08 Jun 2026 5:58 PM
हंटरगंज का प्रखंड-सह अंचल कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर
Chatra News: चतरा के हंटरगंज प्रखंड में जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनने में भारी देरी से लोग परेशान हैं. कई आवेदनों पर सालभर बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है. इससे प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी, किसान और सरकारी योजनाओं के लाभुक प्रभावित हो रहे हैं. मंईयां सम्मान योजना का लाभ भी अटक रहा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
चतरा से दीनबंधू और अभिमन्यु सिंह की रिपोर्ट
Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड में जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाना आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. स्थिति ऐसी है कि आवेदन जमा करने के कई महीनों बाद भी लोगों को प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है. कई मामलों में एक वर्ष तक बीत जाने के बावजूद प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया है. इससे छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों, किसानों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
सालभर बाद भी नहीं मिल रहा प्रमाण पत्र
हंटरगंज प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आने वाले लोगों का आरोप है कि जाति और आवासीय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन देने के बाद उन्हें बार-बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है. बावजूद इसके उनके आवेदन लंबित पड़े हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्रमाण पत्र के अभाव में उनके कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं. कई लोगों ने बताया कि आवेदन करने के महीनों बाद भी उनके आवेदन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. इससे लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति नाराजगी बढ़ रही है.
अंचल निरीक्षक के लॉगइन में लंबित हैं आवेदन
स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदन अंचल निरीक्षक धीरज वर्मा के लॉगइन में लंबे समय से लंबित पड़े हैं. आरोप है कि इन आवेदनों को समय पर आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों तक नहीं भेजा जा रहा है. इस कारण प्रमाण पत्र निर्गत होने की प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि आवेदन समय पर अग्रसारित किए जाएं तो लोगों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों की बढ़ी मुश्किल
जाति और आवासीय प्रमाण पत्र नहीं बनने का सबसे अधिक असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ रहा है. विभिन्न सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आवेदन के दौरान इन दस्तावेजों की अनिवार्यता होती है. प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिलने के कारण कई अभ्यर्थी आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं. इससे उनके भविष्य और करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. छात्रों और युवाओं का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या का तत्काल समाधान निकालना चाहिए.
किसानों और योजनाओं के लाभुक भी परेशान
केवल छात्र ही नहीं, बल्कि किसान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुक भी इस समस्या से प्रभावित हैं. कई योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवासीय और जाति प्रमाण पत्र आवश्यक दस्तावेजों में शामिल हैं. प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण पात्र लोग योजनाओं के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. इससे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी जरूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है.
मंईयां सम्मान योजना पर भी पड़ रहा असर
हेमंत सोरेन सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना भी इस समस्या से प्रभावित हो रही है. बड़ी संख्या में महिलाओं के पास आवासीय प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण वे योजना का लाभ लेने से वंचित रह जा रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने के बावजूद केवल प्रमाण पत्र के अभाव में उनका आवेदन लंबित रह जाता है. इससे उनमें निराशा बढ़ रही है.
सांसद प्रतिनिधि ने भी उठाया मामला
हंटरगंज अंचल के सांसद प्रतिनिधि दिव्यांशु कुमार सिंह ने भी इस मुद्दे को कई बार अधिकारियों के समक्ष उठाया है. उन्होंने अंचल निरीक्षक से आग्रह किया है कि पीड़ित ग्रामीणों के लंबित प्रमाण पत्रों का जल्द निपटारा किया जाए. उन्होंने कहा कि आम जनता को बुनियादी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए महीनों और वर्षों तक इंतजार करना पड़ना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. इस दिशा में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है.
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क्या कहते हैं अंचल निरीक्षक
इस संबंध में पूछे जाने पर अंचल निरीक्षक धीरज वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहे हैं. उनके अनुसार एक दिन में लगभग 400 से 500 आवेदन जमा हो रहे हैं, जिससे कार्यभार काफी बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि अंचल के अन्य प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ प्रतिदिन प्रमाण पत्र निर्गत करने का कार्य भी किया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा कर सभी पात्र आवेदकों को प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. हालांकि, ग्रामीणों को अब भी इंतजार है कि कब उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा और उन्हें समय पर जरूरी प्रमाण पत्र मिल सकेंगे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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