छत नहीं, सिर्फ प्लास्टिक का सहारा... 80 साल की विकलांग मां और बेटा मुश्किलों में गुजार रहे जिंदगी
विकलांग महिला का जर्जर घर
झारखंड के वासुदेवपुर गांव में एक विधवा महिला और उसका विकलांग बेटा खंडहरनुमा घर में प्लास्टिक के नीचे रहने को मजबूर हैं. प्रशासन से आवास की मांग की गई है.
प्रतिनिधि, जैंतगढ़
जगन्नाथपुर प्रखंड की मुंडुई पंचायत स्थित वासुदेवपुर गांव में एक परिवार आज भी टूटी छत और प्लास्टिक के सहारे जीवन बिताने को मजबूर है. खंडहरनुमा मकान में रहने वाली 80 वर्षीय विकलांग महिला कांपड़ो दास अपने पुत्र संजय दास उर्फ लाडो के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही हैं. मकान में छत नहीं होने के कारण बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक तान रखा है. घर का एकमात्र कमरा ही उनका शयनकक्ष और रसोई है.
राशन और पेंशन के सहारे गुजर रहा है जीवन
परिवार का गुजारा राशन और वृद्धावस्था पेंशन से होता है. संजय दास अपनी मां की पेंशन लेने के लिए कभी किसी से साइकिल मांगकर बैंक जाता है तो कभी ऑटो का सहारा लेता है. कांपड़ो दास के पति रामचंद्र दास का करीब 10 वर्ष पहले निधन हो गया था. तब से परिवार आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा है.
कई बार किया आवेदन, फिर भी नहीं मिला आवास
कांपड़ो दास ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया और मुखिया से भी गुहार लगाई, लेकिन आज तक उन्हें आवास नहीं मिल सका.
गर्मी किसी तरह कट जाती है, बरसात और ठंड में बढ़ जाती है मुश्किल
महिला ने बताया कि गर्मी के दिनों में किसी तरह पेड़ के नीचे समय बित जाता है और रात घर के बाहर ही सो जाते हैं. लेकिन जाड़ा और बरसात का मौसम सबसे ज्यादा परेशानी लेकर आता है. बारिश होने पर पूरी रात जागकर बितानी पड़ती है. कई बार आंगनबाड़ी केंद्र या किसी दूसरी जगह की छत के नीचे रात गुजारनी पड़ती है.
समाजसेवियों ने की मदद
परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने पर जैंतगढ़ के समाजसेवी रवि पोद्दार, सीपू जीत और शरद पवार उनके घर पहुंचे और अपने स्तर से सहायता की. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए.
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