Chaibasa News : बेड के लिए इंतजार, फर्श व स्ट्रेचर पर इलाज

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 12 Apr 2026 11:25 PM

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पश्चिमी सिंहभूम जिले की स्वास्थ्य सेवा खुद वेंटिलेटर पर, जिले में 217 की जगह मात्र 87 डॉक्टर कार्यरत

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चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले की लाइफलाइन माना जाने वाला सदर अस्पताल चाईबासा इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है. जिले की लगभग एक लाख से अधिक आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर है, पर बेड और चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड नहीं मिलने पर बरामदे की जमीन या स्ट्रेचर पर ही इलाज कराना पड़ रहा है.

बेड की संख्या मरीजों के अनुपात में नाकाफी :

सदर अस्पताल को मूल रूप से 100 बेड की क्षमता के साथ शुरू किया गया था, बाद में 300 बेड के क्षेत्रीय अस्पताल के रूप में अपग्रेड कर दिया गया. बेड की संख्या मरीजों के अनुपात में अब भी नाकाफी है. शनिवार को इलाज के लिए आयी एक बच्ची को इमरजेंसी के बरामदे में फर्श पर लिटाकर उपचार देना पड़ा. लूज मोशन की शिकायत लेकर आयी एक अन्य बच्ची को बेड खाली नहीं रहने पर घंटों स्ट्रेचर पर ही रहना पड़ा. चिकित्सकों का कहना है कि जब तक कोई पुराना मरीज डिस्चार्ज नहीं होता, नये मरीज को बेड देना संभव नहीं हो पाता.

सदर अस्पताल में चिकित्सकों के आधे पद खाली

चाईबासा सदर अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे पद खाली हैं. अस्पताल में केवल बुनियादी ढांचे ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन की भी भारी कमी है. जिले में चिकित्सकों के कुल 217 स्वीकृत पद हैं, इसमें से केवल 87 कार्यरत हैं. सदर अस्पताल में 38 स्वीकृत पदों के मुकाबले 27 चिकित्सक तैनात हैं. इसमें से 7 डॉक्टर अध्ययन अवकाश पर हैं. प्रभावी रूप से केवल 20 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं.

– सीमित संसाधनों के बावजूद व्यवस्था सुधारने के प्रयास जारी हैं. मरीजों के दबाव को देखते हुए अस्पताल में 50 बेड का विस्तार किया जा रहा है. वर्तमान में मौजूद 8 आइसीयू बेड की संख्या बढ़ाकर 30 की जायेगी. अस्पताल का दवा काउंटर अब 24 घंटे खुला रहता है और जांच सुविधाओं में भी सुधार हुआ है. –

डॉ शिवचरण हांसदा

, अस्पताल उपाधीक्षक

– शनिवार शाम को बेटी को इलाज कराने लाया गया है. इमरजेंसी के बरामदे में जमीन पर लेटा कर उसका उपचार हो रहा है.

– मरीज का अटेंडर

– रात से लूज मोशन हो रहा है. बेटी को सुबह सदर अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में लाया गया. यहां बेड नहीं मिलने पर स्ट्रेचर में इलाज चल रहा है.

– मरीज का अटेंडर

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