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रोजगार की तलाश में ऊपरघाट के युवा कर रहे हैं पलायन

Updated at : 05 Jul 2024 12:37 AM (IST)
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रोजगार की तलाश में ऊपरघाट के युवा कर रहे हैं पलायन

झारखंड राज्य बने 24 वर्ष होने के बाद भी स्थिति जस-की-तस

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प्रतिनिधि, ऊपरघाट.

गांव में रोजगार नहीं मिलने से पलायन का सिलसिला लगातार जारी है. युवा रोजी-रोटी की तलाश में अपना परिवार, गांव, घर, खेत-खलिहान छोड़कर शहरों की ओर रुख कर रहे हैं. जनप्रतिनिधि भले ही इस कड़वी सच्चाई को न स्वीकार करें, लेकिन रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर ग्रामीणों की भीड़ से देखी जा सकती है. कृषि कार्य करके अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले किसान निराश हैं. बार-बार प्राकृतिक आपदाओं में कभी सूखा, कभी अतिवृष्टि से फसलें तबाह होने का जो क्रम बना है, उससे पलायन का सिलसिला और जोरों से बढ़ गया है. बोकारो, पारसनाथ व हटिया रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन सैकड़ों परिवार काम की तलाश में मुंबई के लिए पलायन कर रहे हैं. समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महतो ने बताया कि हमारा झारखंड खनिज संपदा से भरा है. वहीं बोकारो जिला से सटे हजारीबाग, गिरिडीह क्षेत्र पूरा इंडस्ट्रियल एरिया है. फिर भी रोजगार के अभाव में यहां के युवा दूसरे जगह पलायन करने को विवश हैं. झारखंड राज्य बने 24 वर्ष होने के बावजूद भी इस राज्य की स्थिति जस-की-तस है. वहीं बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड ऊपरघाट के सैकड़ों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जा रहे हैं.

राज्य में रोजगार सृजन का अभाव :

पलायन कर रहे किशोर कुमार महतो ने कहा कि झारखंड राज्य अलग हुआ, तो हम सभी को विश्वास था कि अब हमें पलायन नहीं करना पड़ेगा, लेकिन राज्य में रोजगार सृजन का अभाव है. क्षेत्र के अधिकांश नौजवान मुंबई, गुजरात, पुणे, हैदराबाद, दिल्ली, चेन्नई सहित अन्य महानगरों की ओर पलायन कर चुके हैं.

सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का भी लगाया आरोप :

उल्लेखनीय है कि गांवों से पलायन रोकने के लिए मानव श्रम को ग्राम विकास में भागीदार बनाने के तहत लागू कई योजनाएं भी ग्रामीणों को गांव में काम नहीं दिला पायी हैं. जहां भी काम हुए, वहां मानव श्रम की बजाय मशीनों से काम कराये गये. जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई. प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य कर रहे समाजसेवी सिकंदर अली ने कहा कि चुनाव आते ही क्षेत्र में राजनीतिक दलों के नेता बड़े-बड़े वादे कर वोट मांगते हैं. जीतने के बाद कोई नहीं सोचता है. यहां युवाओं को रोजी-रोटी की जुगाड़ के लिए दूसरे प्रदेशों में पलायन करना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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