Bokaro News : महावीरी झंडों से पटा बाजार, मंदिरों की हो रही सजावट

Bokaro News : चास में रामनवमी पर्व की तैयारी जोरों पर है.
चास में रामनवमी पर्व की तैयारी में सभी अखाड़ा समितियां और श्रद्धालु जुट गये हैं. राम व हनुमान मंदिरों को सजाया गया है. चास पुराना बाजार सहित महावीर चौक, धर्मशाला मोड़, चेकपोस्ट, सदर बाजार मोड़, जोधाडीह मोड़ से आइटीआइ मोड़ तक महावीर झंडों से बाजार पट गया है. विभिन्न अखाड़ों में लाठी खेल का अभ्यास किया जा रहा है. शहर के चौक-चौराहाें व बाजारों में महावीर पताके लगाये रहे हैं. पुलिस प्रशासन भी शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए तैयारी कर रही है.
सात लाइसेंसी सहित 13 अखाड़ा निकालते हैं जुलूस
चास नगर निगम क्षेत्र में सात लाइसेंसी सहित 13 अखाड़ा द्वारा जुलूस निकाला जाता है. लाइसेंसी अखाड़ा में नवयुवक दल महावीर चौक, श्री महावीर अखाड़ा मछलीपट्टी चास, ऊपर पाड़ा बजरंग अखाड़ा मेन रोड चास, श्री महावीर अखाड़ा स्वर्णकार मोहल्ला, हनुमान मंदिर जोधाडीह मोड़ चास, महावीर अखाड़ा चेकपोस्ट चास, बसंती दुर्गा मंदिर धीवर समिति और गैर लाइसेंसी अखाड़ा में युवा क्रांति दल चेकपोस्ट, अन्नपूर्णा मंदिर मेन रोड चास, श्री राम अखाड़ा धर्मशाला मोड़, जय वीर बजरंग अखाड़ा समिति, राणा प्रताप नगर, श्याम सखी मंडली चास, श्री जय अंबे माता दी मंदिर शक्तिपीठ साहु मार्केट हैं. चेकपोस्ट, महावीर चौक, धर्मशाला मोड़ और जोधाडीह मोड़ में रामभक्तों का समागम होगा. हिंदू-मुस्लिम एकता मंच और चास थाना शांति समिति की ओर से महावीर चौक में सभी अखाड़ा समितियों को सम्मानित किया जायेगा. साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले अखाड़ा को पुरस्कृत किया जायेगा.
खैराचातर में आठ दशक से निकाला जा रहा रामनवमी जुलूस
कसमार प्रखंड के प्रमुख व्यापारिक केंद्र खैराचातर में रामनवमी जुलूस आठ दशक से निकाला जा रहा है. यह आयोजन क्षेत्र की आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है. खैराचातर का मुख्य चौक, जिसे महावीर चौक के नाम से जाना जाता है, यहां महावीर मंदिर की स्थापना लगभग सौ वर्ष पूर्व हुई थी. उमाचरण भगत व अन्य बुजुर्गों ने बताया कि गोलक भगत, बिहारी भगत, अर्जुन भगत आदि ने इस मंदिर की आधारशिला रखी थी. यहां पीपल का एक पेड़ हुआ करता था. उसी के नीचे मंदिर की बुनियाद रखी गयी थी. बाद में मंदिर का निर्माण हुआ. 1990 के दशक में एक बस की टक्कर से मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य रूप दिया गया. बनारस से संगमरमर की मूर्ति लाकर स्थापित की गयी. रामनवमी जुलूस निकालने की परंपरा 1940 के दशक में शुरू हुई. बासु भगत, ज्ञान भगत, रघु भगत, बद्री भगत आदि ने इसकी पहल की थी. 1978 में सुरेश कुमार जायसवाल के नाम पर जुलूस का लाइसेंस निर्गत किया गया और लंबे समय तक उन्होंने इसका नेतृत्व किया. वर्ष 2000 में उनके निधन के बाद यह लाइसेंस उनके पुत्र रामसेवक जायसवाल (पप्पू) के नाम से जारी हुआ, जो वर्तमान में भी प्रभावी है. खैराचातर के गांधी रोड, बनिया टोला, घासी टोला, बसरिया एवं नाई टोला में भी महावीरी झंडा स्थापित किया जाता है. इन सभी क्षेत्रों के जुलूस एक साथ मिल कर निकलते हैं, जिसके लिए एक ही लाइसेंस निर्गत होता है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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