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प्लास्टिक का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं लोग, प्रशासन भी मौन

Updated at : 10 Jun 2024 11:14 PM (IST)
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प्लास्टिक का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं लोग, प्रशासन भी मौन

जिला में हर दिन 1200 से अधिक प्लास्टिक (कैरी बैग) की खपत, 31 दिसंबर 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल पर लग चुकी है रोक

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सीपी सिंह, बोकारो, भैया, एगो में जा पायेगा!… एक और दे दीजिये ना. रास्ता में फट गया, तो दिक्कत हो जायेगा. दूंदीबाद बाजार में आलू खरीदने के बाद एक शख्स ने दुकानदार ने ऐसे ही अंदाज में एक अतिरिक्त प्लास्टिक (कैरी बैग) की डिमांड की. दुकानदार ने भी बिना देरी किये हुए प्लास्टिक बैग दे दी. कुछ ऐसी ही स्थिति सब्जी बाजार, सिटी सेंटर-04 में देखने को मिली, जहां बड़ी गाड़ी से एक ग्राहक टमाटर खरीदने के लिए उतरे और प्लास्टिक कैरी बैग में ही टमाटर रखा. कहने को तो देश में 31 दिसंबर 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लग चुकी है. इस्तेमाल व बिक्री पर दंड का प्रावधान किया गया है. लेकिन, बोकारो में इसका नाम मात्र भी असर नहीं दिख रहा है. खुलेआम सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल भी हो रहा है और खुले क्षेत्र में बिक्री भी हो रही है. एक ओर आमलोग प्लास्टिक का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं, तो दूसरी ओर जिला प्रशासन भी मौन धारण किए हुए है. ये अलग बात है कि गाहे-बगाहे नगर निगम व नगर परिषद अभियान चला कर खानापूर्ति कर लेती है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक बोकारो जिला में प्रतिदिन 1200 किलो से अधिक प्लास्टिक (कैरी बैग) का इस्तेमाल किया जाता है. इसका बड़ा हिस्सा सब्जी, मांस-मछली व अन्य जरूरत के सामान की खरीदारी के लिए होता है. यह प्लास्टिक हर दिन कचरा का रूप लेती है. कारण यह कि इन प्लास्टिक कैरी बैग को रिसाइकिल करना आसान नहीं होता. इसी कारण सफाई बंधु भी प्लास्टिक कैरी बैग (120 माइक्रो से पतला) का संग्रहण नहीं करते. बोकारो जिला में चास नगर निगम व फुसरो नगर परिषद को सिंगल यूज प्लास्टिक इस्तेमाल बिक्री करने व इस्तेमाल पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है, लेकिन, दोनों कार्यालय से कुछ मीटर की दूरी पर सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल आसानी से करते हुए लोग दिख जाते हैं.

जिला में कचरा निस्तारण केंद्र नहीं

बोकारो जिला में एक भी कचरा निस्तारण केंद्र नहीं है. चास नगर निगम क्षेत्र में जमीन भरावट के हिसाब से कचरा को फेंका जाता है, तो बोकारो स्टील सिटी में सेक्टर आठ में चिन्हित स्थान पर कचरा डंप किया जाता है. वहीं फुसरो नगर परिषद में स्थिति ऐसी ही है. जबकि, शहरी क्षेत्र में ही प्लास्टिक का इस्तेमाल ज्यादा होता है. कचरा निस्तारण केंद्र निर्माण को लेकर कई बार योजना बनी. जगह चिन्हित किया. फाइल वाला घोड़ा भी दौड़ा. लेकिन, जमीन पर कुछ नहीं उतरा.

31 दिसंबर 2022 से भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी है. उस समय बताया गया था कि प्रति व्यक्ति औसतन हर साल 18 किलो ग्राम तक सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करता है. प्रकृति पर सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के कारण रोक लगायी गयी, लेकिन, बोकारो में इसका असर नहीं के बराबर है. मुख्य बाजार से लेकर सभी हटिया तक में ऐसे प्लास्टिक का इस्तेमाल खुलेआम होता है. चाहे सब्जी खरीदना हो या कुछ और खरीदना हो, लोग प्लास्टिक कैरी बैग में ही खरीदारी करना शान समझते हैं. दुकानदार भी ग्राहक के अनुसार काम करते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण प्लांट को बंद करा दिया गया है. बिक्री व इस्तेमाल पर रोक लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम व नगर परिषद की है. सभी नगर निगम क्षेत्र में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बनाने का निर्देश दिया गया है. यह प्रोसेस में भी है. सबसे बड़ी बात कि लोगों को जागरूक होना होगा. जबतक लोग जागरूक नहीं होंगे, कोई नियम या दंड का प्रावधान सुधार नहीं ला सकती. विभाग जन जागरूकता के लिए लगातार अभियान चला रहा है.

जितेंद्र कुमार सिंह, अधिकारी, झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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