सहस्त्रधारा स्नान के बाद एकांतवास पर गये भगवान जगन्नाथ

Updated at : 22 Jun 2024 11:32 PM (IST)
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सहस्त्रधारा स्नान के बाद एकांतवास पर गये भगवान जगन्नाथ

15 दिन नहीं होंगे प्रभु के दर्शन, सात जुलाई को दर्शन व निकलेगी रथयात्रा, उद्घोष के बीच जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा आयोजित, गर्भगृह से स्नान मंडप तक पहुंची भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन की प्रतिमा

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बोकारो. जय जगन्नाथ के उद्घोष के बीच श्रद्धा व विश्वास के साथ शनिवार काे सेक्टर चार स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा आयोजित की गयी. मंदिर के गर्भगृह से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन की प्रतिमा को पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ स्नान मंडप तक लाया गया. इसके बाद पहले सूर्य पूजा, फिर स्नान यात्रा की पूजा की गयी. इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

सेक्टर वन स्थित श्रीराम मंदिर मौसीबाड़ी जायेंगे भगवान

महास्नान के बाद प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा बीमार पड़ गये हैं. उन्हें अणसर गृह में रखा गया है. अब अगले 15 दिनों तक महाप्रभु के दर्शन नहीं होंगे. सात जुलाई को नेत्र उत्सव पर महाप्रभु के अलौकिक रूप के दर्शन होंगे. उसी दिन ऐतिहासिक रथयात्रा निकलेगी. भगवान जगन्नाथ सेक्टर वन स्थित श्रीराम मंदिर मौसीबाड़ी जायेंगे. मौसीबाड़ी में नौ दिनों तक विश्राम के बाद वापस घर 15 जुलाई को लौटेंगे.

108 घड़ा से प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन को स्नान

जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा व उल्लास के साथ प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा व सुदर्शन की स्नान यात्रा हुई. स्नान मंडप पर लाकर स्नान कराया गया. इस दौरान अगरू, चंदन, गाय का घी, दूध, दही, मधु, हल्दी आदि का लेप भी लगाया गया. इसके बाद भक्तों के उलूध्वनि व शंखनाद ध्वनि के बीच स्नान मंडप पर प्रभु जगन्नाथ को 35, बलभद्र को 42, सुभद्रा को 20 व सुदर्शन को 11 कलश पानी से स्नान कराया गया.

अलग-अलग जड़ी बूटियां देकर उपचार किया जायेगा

स्नान मंडप पर प्रभु जगन्नाथ के दर्शन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. स्नानमंडप से अणसर गृह लाकर भगवान जगन्नाथ सहित अन्य को रखा गया, जहां अगले 15 दिनों तक गुप्त नीति से पूजा अर्जना की जायेगी. अब 15 दिनों तक प्रभु जगन्नाथ बलभद्र व देवी सुभद्रा का अलग-अलग जड़ी बूटियां देकर उपचार किया जायेगा. प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर श्रद्धा व विश्वास के साथ देव स्नान पर्व मनाया जाता है.

सहस्त्र धारा स्नान भगवान जगन्नाथ के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक

बोकारो में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी की जा रही है. इससे पहले ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ को सहस्त्र धारा स्नान शनिवार को करवाया गया. इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व देवी सुभद्रा की पूजा की गयी. सहस्त्र धारा स्नान भगवान जगन्नाथ के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है. इस दिन को देव स्नान पूर्णिमा कहा गया है. इस दौरान कई अनुष्ठान भी आयोजित किये गये.

सहस्त्र धारा स्नान पूर्ण होने पर भगवान का ‘सादा वेश’ बनाया गया

भगवान जगन्नाथ सहित अन्य के स्नान के लिए 108 घड़ों के जल का उपयोग किया गया. जल में फूल, चंदन, केसर और कस्तूरी भी मिलाया गया. सहस्त्र धारा स्नान पूर्ण होने पर भगवान को ‘सादा वेश’ बनाया गया. दोपहर में ‘हाथी वेश’ पहनकर भगवान गणेश के रूप में तैयार किया गया. सहस्त्र धारा स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ 14 दिन तक भक्तों को दर्शन नहीं देते. तब तक मंदिर का कपाट बंद रहता है.

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