Bokaro News Coal India: कोल डिस्पैच धीमा, स्टॉक बढने से गर्मी में आग लगने का खतरा बढ़ा

Bokaro News Coal India: कोल इंडिया के पास कोयले का स्टॉक बढ़ने से गरमी के दिनों में आग का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके अलावा कोयला बाजार में नहीं बिकने से केंद्र व राज्य सरकार को राजस्व का भी नुकसान होगा. सूत्रों का कहना है कि कोल इंडिया के पास फिलहाल कोल स्टॉक बढ़ने का मुख्य कारण है कोयले की डिमांड में आयी कमी.
कोल इंडिया की कई अनषांगिक कंपनियों को कोयले का बाजार पहले जैसा नही मिल रहा है. खासकर कोल इंडिया की अनुषांगिक इकाई बीसीसीएल, ईसीएल व सीसीएल इसका दंश झेल रही है. ईसीएल में तो दो माह पहले हालात यह हो गयी थी कि कोयले की बिक्री नहीं होने के कारण वहां के कोल कर्मियों को वेतन देने के लिए भी पैसे नही थे. यही स्थिति 4-5 माह पूर्व सीसीएल में भी बनी थी, इसके बाद सीसीएल ने अपने फिक्स डिपोजिट के अगेंस्ट में 600 करोड लेकर कोल कर्मियों को दो माह का वेतन दिया था. नौ मार्च 2026 को कोल इंडिया एपेक्स की बैठक में सीआइएल प्रबंधन ने कोयले के डिमांड में आयी कमी को लेकर चिंता जतायी. बैठक में प्रबंधन ने बताया कि वर्तमान में सीआइएल के पास 120 मिलियन टन कोयले का स्टॉक है. प्रबंधन ने यह भी कहा कि निजी कंपनियों के कोयले की क्वालिटी अच्छी है. इसके अलावा रेलवे रैक भी समय पर उपलब्ध नहीं होता. हमें अपने कोयले की क्वालिटी सुधारने पर विशेष ध्यान देना होगा. बैठक की अध्यक्षता कोल इंडिया चेयरमैन बी साईराम ने की. बैठक में कोल इंडिया के निदेशक कार्मिक डॉ विनय रंजन, निदेशक (बीडी), निदेशक वित्त, निदेशक मार्केटिंग, सभी अनुषांगिक कंपनियों के सीएमडी के अलावा मजदूर संगठनों की और से एटक के रमेंद्र कुमार, एचएमएस के हरभजन सिमह सिद्धु, सीटू के डीडी रामानंदन, बीएमएस के केएल रेड्डी सहित कोल मािंस ऑफिर्सस एसोसिएशन के सर्वेश सिंह उपस्थित थे.
ई-ऑक्शन में 100 से लेकर 600 रुपये तक प्रति टन डिस्काउंट का निर्णय
कोल इंडिया की अनुषांगिक इकाई बीसीसीएल ने अपना कोयला डिस्पैच बढाने के लिए ई-ऑक्शन में 100 से लेकर 600 रुपये तक प्रति टन डिस्काउंट का निर्णय लिया है. गत शनिवार को बीसीसीएल बोर्ड की बैठक में इसकी स्वीकृति दी गई थी. मालूम हो कि बीसीसीएस को कोयले का खरीददार नही मिल रहा है. फरवरी माह में बीसीसीएल का डिस्पैच मात्र 2.2 एमटी रहा था.यदि मार्च माह तक बीसीसीएल 37.5 एमटी कोयला डिस्पैच के आंकडे तक नही पहुंच पाती है तो कंपनी घाटे में चली जाएगी.इधर, पूरे कोल इंडिया की बात करें तो कोल इंडिया का चालू वित्तीय वर्ष में कोल डिस्पैच (ऑफटेक) का लक्ष्य 900.24 मिलियन टन है. जबकि एक अप्रैल 2025 से लेकर 8 मार्च 2026 तक 689.78 एमटी कोयला डिस्पैच हुआ है. यानि कोल डिस्पैच में कोल इंडिया अभी अपने लक्ष्य से करीब 211 मिलियन टन पीछे चल रहा है.
कोयले की चोरी व अवैध उत्खनन भी कोल सेक्टर के संकट का बडा कारण
हाल के कुछ वर्षों से कोल इंडिया की कई अनुषांगिक कंपनियों खासकर ईसीएल, बीसीसीएल व सीसीएल से बडे पैमाने पर रोजाना हो रही कोयले की चोरी अवैध उत्खनन भी कोल इंडिया पर आये संकट का एक बडा कारण है. कोयले की मंडियों में कोल इंडिया से कम कीमत पर कोयला बेचा जा रहा है जिसके कारण भी कोल इंडिया का कोल डिस्पैच बाधित हो रहा है तथा मार्केट नहीं मिल रहा है.
एमडीओ व रेवन्यू शेयरिंग के कारण कोल इंडिया की स्थिति खराब हो रही : एटक नेता
एटक नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो ने कहा कि कमर्शियल माइनिंग, एमडीओ व रेवन्यू शेयरिंग के कारण आज कोल इंडिया की स्थिति खराब हो रही है. निजी मालिकों को पहले कोयला उत्पादन के लिए कोल ब्लॉक दिया गया, लेकिन अब कोयला बेचने का भी अधिकार दे दिया गया. आने वाले समय में कोल सेक्टर की स्थिति और भी भयावह होगी.
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