झारखंड ट्रेजरी स्कैम: SIT की बड़ी सफलता, होमगार्ड जवान गिरफ्तार, खाते में मिले 1.06 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन

Published by :Sameer Oraon
Published at :27 Apr 2026 5:53 PM (IST)
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Bokaro Treasury Scam

बोकारो ट्रेजरी घोटाला मामले में 1 गिरफ्तार

Bokaro Treasury Scam: बोकारो में ट्रेजरी से अवैध राशि निकासी मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहली गिरफ्तारी की है. गठित SIT ने मुख्य आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पाण्डेय के सहयोगी सतीश कुमार को गिरफ्तार किया है, जो बोकारो SP कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में तैनात था.

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Bokaro Treasury Scam, बोकारो : झारखंड के बहुचर्चित बोकारो ट्रेजरी घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. विभाग द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी लेखापाल कौशल कुमार पाण्डेय के करीबी सहयोगी सतीश कुमार (उर्फ सतीश कुमार सिंह) को गिरफ्तार कर लिया है. वह मूल रूप से होमगार्ड जवान है और बोकारो पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त था. उसकी गिरफ्तारी को अवैध निकासी के इस खेल में अहम कड़ी माना जा रहा है, उसकी मदद से पुलिस अन्य आरोपियों तक जल्द पहुंच सकती है.

डिजिटल सिस्टम में ‘मास्टर’ खेल और गिरफ्तारी

झारखंड सरकार के आदेश पर दर्ज इस मामले (कांड संख्या 06/26) की जांच के दौरान सीआइडी ने पाया कि यह महज एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी ‘इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम’ (IFMS) की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध थी. गिरफ्तार सतीश कुमार पर आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी कौशल पाण्डेय के साथ मिलकर न केवल फर्जी बिलों के जरिये राशि निकाली, बल्कि सबूत मिटाने के लिए मास्टर डेटा के साथ भी खिलवाड़ किया. उसके बैंक खाते में लगभग 1.06 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि का लेन-देन पाया गया है, जिस पर कार्रवाई करते हुए सीआइडी ने त्वरित रूप से 43 लाख रुपये की राशि को होल्ड और फ्रीज कर दिया है.

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BNS और IT एक्ट की धाराओं में कार्रवाई

सीआइडी ने इस कांड में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और 340(2) समेत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66 और 43 के तहत मामला दर्ज किया है. जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने जाली हस्ताक्षरों और डिजिटल छेड़छाड़ के माध्यम से सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई. सतीश की गिरफ्तारी के बाद अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है, जो प्रशासनिक पदों पर रहकर इस लूट को अंजाम दे रहे थे.

आगे क्या?

सीआइडी अभी भी इस मामले में आगे की कार्रवाई पर अनुसंधान कर रही है. जांच में शामिल अधिकारी अब उन माध्यमों को खंगाल रहा है जिसके जरिये डेटाबेस में जन्मतिथि और नौकरी में ज्वॉइनिंग की तिथि में बदलाव किए गए थे, ताकि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद भी लंबे समय तक लाभ उठा सकें.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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