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BOKARO NEWS : 24 वर्ष बाद भी पिंड्राजोरा को नहीं मिला प्रखंड का दर्जा

Updated at : 21 Oct 2024 11:26 PM (IST)
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BOKARO NEWS : 24 वर्ष बाद भी पिंड्राजोरा को नहीं मिला प्रखंड का दर्जा

BOKARO NEWS : विधानसभा चुनाव में फिर होगी घोषणा, कई सरकारी आयी व गयी, पर आश्वासन में ही सिमट कर रह गया पिंड्राजोरा प्रखंड का सपना

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ब्रह्मदेव दुबे, पिंड्राजोरा, झारखंड को अलग राज्य बने 24 वर्ष हो गये, बावजूद पिंड्राजोरा को प्रखंड का दर्जा अब तक नहीं मिल पाया है. विडंबना है कि इतने दिनों में कई सरकार आयी और गयी, पर कोई सरकार पिंड्राजोरा को प्रखंड का दर्जा नहीं दिला पायी. पिंड्राजोरा को प्रखंड बनने को लेकर 2013 में कैबिनेट में भी पारित किया गया. बावजूद अब तक दर्जा नहीं मिल पाया. फिर विधानसभा चुनाव है. कई पार्टियों द्वारा फिर से प्रखंड बनाने का आश्वासन दिया जायेगा और जनता फिर से पांच वर्ष तक आश्वासन की आस लगा रह जायेगी. बता दें कि पिंड्राजोरा को प्रखंड का दर्जा दिलाने के लिए क्षेत्र के कई संगठनों, जनप्रतिनिधि एवं आम नागरिक द्वारा सरकार को पत्राचार भी किया गया है. विधानसभा घेराव के साथ सड़क जाम, धरना प्रदर्शन सहित कई आंदोलन किए गए है. ग्रामीणों की और से किया गया पत्राचार रांची से लेकर बोकारो तक फाइल की शोभा बढ़ा रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार राजनीतिक इच्छा शक्तियों का अभाव में पिंड्राजोरा प्रखंड बनने से वंचित हो गया है. चुनाव के साथ यह मुद्दा अवश्य गर्म रहता है, लेकिन बाद में यह ठंडे बस्ते में चला जाता है. पिंड्राजोरा में जिला प्रशासन के आदेश अनुसार दो दिन कैंप लगाया जा रहा था. जिसमें भी ग्रामीणों को बहुत हद क्षेत्र के लोगों का काम हो जाता था. लेकिन दो-चार महीने कैंप लगने के बाद वह भी बंद हो गया. सर्वप्रथम पिंड्राजोरा को प्रखंड बनाने के मुद्दे को किसान मुक्ति मोर्चा के बैनर तले शुरू किया गया था, जो वर्तमान में पिंड्राजोरा प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले चलाया जा रहा है.

प्रखंड मुख्यालय से इस क्षेत्र की औसतन पंचायत की दूरी 25 से 30 किलोमीटर है. पूरा क्षेत्र किसान बाहुल्य क्षेत्र के रूप से जाना जाता है. क्षेत्र के लोगों का एकमात्र रोजी-रोटी का साधन कृषि ही है. इस क्षेत्र के लोगों को 30 किलोमीटर की दूरी तय कर चास प्रखंड जाना पड़ता है. गवाई नदी की गोद में यूं तो चास पुरुलिया नेशनल हाइवे में पिंड्राजोरा स्थित है. फिर भी इसकी पहचान चास प्रखंड के अति पिछड़े क्षेत्र के रूप में की जाती है. मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. पिंड्राजोरा में शुक्रवार व मंगलवार को हटिया भी लगता है.

17 पंचायतों को मिलाकर की जा रही प्रखंड बनाने की मांग

चास प्रखंड बोकारो जिले का सबसे बड़ा प्रखंड माना जाता है, जिसमें कुल 54 पंचायत शामिल है. इसमें से 17 पंचायत को मिलाकर पिंड्राजोरा प्रखंड बनाने की मांग की जा रही है. 17 पंचायतों में पिंड्राजोरा, चाकुलिया, कुर्रा, काशीझारिया, टुपरा, कोलबेदी, भंडरो, बारपोखर, बाबूडीह, तुरीडीह, पुंडरू, टुपरा, पोखन्ना, उलगोड़ा, गोपालपुर, कुमारदागा व मिर्धा शामिल है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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