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किसान के बेटे ने लिखी सफलता की कहानी, नौकरी के साथ खेती कर बंजर जमीन को बनाया सोना

Updated at : 24 Jun 2025 11:31 AM (IST)
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Raju Mahto with his wife

Raju Mahto with his wife

Agricultural Development: किसान के बेटे राजू महतो को खेती के प्रति खास लगाव है. उन्होंने महुआटांड गांव में 22 एकड़ बंजर जमीन को सोने (कृषि योग्य उपजाऊ भूमि) में बदल दिया है. उनके कृषि फार्म पर कई तरह की सब्जियां उपजती हैं, जिन्हें रांची, रामगढ़, गोला, हजारीबाग आदि शहरों की मंडियों में भेजा जाता है.

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Agricultural Development| ललपनिया, नागेश्वर: बोकारो जिला के गोमिया प्रखंड अंतर्गत कडेंर में सरकारी नौकरी करने वाले राजू कुमार महतो का दिल अब भी खेती के लिए धड़कता है. खेती के प्रति इसी लगाव के कारण उन्होंने करीब 22 एकड़ बंजर जमीन को खेती के लिए उपयोगी उर्वरक बना दिया. राजू नौकरी करने के बावजूद भी अपने गांव में कृषि कार्यों में भागीदारी निभाते रहे हैं. उनके ही नक्शे कदम पर पत्नी निशा कुमारी भी चलती है. निशा एक किसान की बेटी हैं और वह भी काफी बढ़-चढ़कर खेती के कामों में हिस्सा लेती रही हैं.

माता-पिता ने बनाया आत्मनिर्भर

सूत्रों के अनुसार राजू महतो महुआटांड गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता नारायण महतो एक किसान हैं. नारायण के तीन पुत्र हैं- राजू कुमार महतो, निरंजन कुमार महतो और रणधीर कुमार महतो. नारायण ने खेती-किसानी का काम कर अपने तीन बेटों को उच्च शिक्षा दिलायी. ताकि उनके सभी बच्चे शिक्षित होकर नौकरी-पेशा से जुड़े और आत्मनिर्भर बनें. बच्चों की पढ़ाई के लिए राजू की मां ने अपने गहने भी बेच दिये थे. ताकि उनकी पढ़ाई से किसी भी तरह समझौता न करना पड़े. राजू के दोनों भाई ने स्नातक तक की पढ़ाई की है.

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नौकरी के साथ खेती करने का फैसला

बताया गया कि मां-पिता के आशीर्वाद और राजू की मेहनत से 10 साल पहले उन्हें एक नौकरी मिली. लेकिन उनका मन अब भी खेती में ही लगा हुआ था. मगर आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए राजू ने नौकरी के साथ खेती करने का फैसला किया. राजू ने कहा कि किसान के बच्चे किसानी कर बेहतर आमदनी कमा सकते हैं, जिससे आत्मनिर्भर बना जा सकता है. उन्होंने अपने दोनों भाइयों को साल 2018-19 के आसपास कृषि विकास की ओर बढ़ने के लिए हौसला दिया. इसके बाद कंडेर में लगभग 20 से 22 एकड़ में जो बंजर जमीन थी, उसे कृषि कार्य के योग्य बनाकर भाइयों को सौंप दिया.

कृषि फार्म में बिताते हैं छुट्टियां

राजू कहते हैं कि पहले उनके भाई नौकरी खोजते थे और आज उन्होंने 8 से 10 लोगों को नौकरी पर रखा है. बताया गया कि राजू का एक भाई रंजन गांव में खेती-बाड़ी सम्हालते हैं. जबकि दूसरा भाई रणधीर महतो घर सम्हालते हैं. राजू ऑफिस में मिलने वाली छुट्टियों को अन्य कामों में जाया न करते हुए कृषि फार्म में बिताते हैं. राजू और उनकी पत्नी कृषि फार्म में आकर लोगों का मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें कृषि विकास के लिए प्रेरित करते हैं. इस कृषि फार्म में 8 से 10 मजदूर हर रोज काम करते हैं.

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मंडी में भेजी जाती है सब्जियां

राजू महतो के कृषि फार्म में भिंडी,झिंगी,तोरई,करेला,बोदी,बीन,बैंगन,कद्दू,खीरा आदि कई सब्जियों की खेती होती है, जो हजारीबाग, रामगढ़ ,गोला , रांची आदि की मंडियो में भेजा जाता है. इससे उन्हें काफी अच्छी आमदनी होती है. इस संबंध में राजू महतो कहते हैं कि उनका ध्यान हमेशा इस बात पर लगा रहता है कि किसी भी कीमत पर कृषि विकास का काम कमजोर नहीं होने देंगे. इस वजह से ही उन तीनों भाइयों ने शिक्षा ग्रहण की है.

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विदेश जा चुके हैं तरबूज

राजू ने कहा कि मेरा निरंतर प्रयास जारी रहेगा कि ड्यूटी से समय बचाकर कृषि विकास में सहयोग करता रहूं. राजू अपने साथ-साथ दूसरे लोगों को भी कृषि विकास में सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं. उनका फार्म में उपजे तरबूजों को विदेश भी भेजा गया है. इस कृषि विकास को देखकर ही पूर्व विधायक लंबोदर महतो ने राजू के विद्युत ट्रांसफर लगाया था. इसके साथ ही सब्सिडी पर फार्म में ड्रीप सिस्टम के अलावा सौर सिस्टम भी लगाया गया है.

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Rupali Das

लेखक के बारे में

By Rupali Das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.

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