अबुआ दिशोम बजट के लिए यूपीएससी अभ्यर्थी की 8 मांगें मंजूर, आप भी दे सकतें है अपना सुझाव

Updated at : 01 Feb 2026 9:22 AM (IST)
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Abua Dishom Budget

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

Abua Dishom Budget: अबुआ दिशोम बजट संगोष्ठी 2026-27 में झारखंड सरकार ने यूपीएससी अभ्यर्थी सुश्रत कुमार सिंह के आठ सुझावों को मंजूरी दी. जनजातीय क्षेत्रों, स्वास्थ्य, शिक्षा, एआई और डिजिटल तकनीक पर आधारित ये सुझाव राज्य के समावेशी, संतुलित और दूरदर्शी बजट निर्माण की दिशा में आज भविष्य अहम माने जा रहे हैं.

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Abua Dishom Budget: झारखंड वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित अबुआ दिशोम बजट संगोष्ठी-2026-27 में हजारीबाग के युवा यूपीएससी अभ्यर्थी सुश्रत कुमार सिंह के आठ सुझावों को सरकार ने मंजूरी दे दी है. यह संगोष्ठी राज्य के लिए एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी बजट तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जिसमें आम नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे.

अबुआ दिशोम पोर्टल के जरिए मांगे गए सुझाव

झारखंड सरकार ने अबुआ दिशोम पोर्टल के माध्यम से झारखंडभर के नागरिकों से बजट से जुड़े सुझाव मांगे हैं. सरकार का उद्देश्य है कि बजट केवल सरकारी दृष्टिकोण तक सीमित न रहे, बल्कि जन-आकांक्षाओं को भी उसमें शामिल किया जा सके. इसी प्रक्रिया के तहत सुश्रत कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों से जुड़े व्यावहारिक और विकासोन्मुख सुझाव पेश किए थे.

जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस

सुश्रत कुमार सिंह के सुझावों की खास बात यह रही कि उन्होंने जनजातीय और दूर-दराज के इलाकों को केंद्र में रखा. उन्होंने पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवार कल्याण सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के समावेशन का प्रस्ताव रखा. उनका मानना है कि तकनीक के सही इस्तेमाल से झारखंड के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं.

स्वास्थ्य सेवाओं में एआई और डिजिटल तकनीक का सुझाव

सुश्रत ने सुझाव दिया कि एआई आधारित हेल्थ मॉनिटरिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स के जरिए ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. इससे डॉक्टरों की कमी, लंबी दूरी और संसाधनों के अभाव जैसी समस्याओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है.

28 विभागों से जुड़े विकासोन्मुख सुझाव

यूपीएससी स्टूडेंट सुश्रत कुमार सिंह ने केवल स्वास्थ्य और शिक्षा ही नहीं, बल्कि कृषि, पशुपालन, सहकारिता, ऊर्जा विभाग सहित कुल 28 विभागों से जुड़े सुझाव दिए थे. इनमें रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे शामिल थे. सरकार द्वारा आठ सुझावों को स्वीकार किया जाना युवाओं की सोच और भागीदारी को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है.

युवाओं की सोच को मिली पहचान

सरकार की ओर से सुश्रत के सुझावों को मंजूरी मिलना यह दर्शाता है कि झारखंड सरकार नीति निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्व दे रही है. इसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अन्य युवा भी नीति और विकास से जुड़े विषयों पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें.

पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है पहचान

सुश्रत कुमार सिंह ने बताया कि इससे पहले भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है. नेशनल यूनिटी डे 2025 के अवसर पर आयोजित नेशनल स्पेस डे 2025 क्विज प्रतियोगिता में उन्होंने दो बार 2000-2000 रुपये का पुरस्कार जीता था.

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और वर्तमान तैयारी

सुश्रत ने दसवीं की पढ़ाई डीएवी स्कूल से पूरी की है. इसके बाद उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से बीसीए की डिग्री हासिल की. वर्तमान में वे सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं. वे हजारीबाग के जुलू पार्क क्षेत्र के निवासी हैं और सुशील कुमार सिंह व वर्षा सिंह के पुत्र हैं.

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आप भी दे सकते हैं अपना सुझाव

राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अबुआ दिशोम पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव साझा करें. सरकार का मानना है कि जनभागीदारी से तैयार बजट ही झारखंड के समग्र विकास को नई दिशा दे सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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