सीआइडी को मिली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, पिटाई से ही हुई रूपेश की मौत
Updated at : 29 Sep 2016 1:52 AM (IST)
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रांची: बुंडू थाना क्षेत्र निवासी रूपेश स्वांसी (17) की मौत पिटाई की वजह से ही हुई थी. मौत की वजह के बारे में मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सीआइडी को सौंप दी है. रूपेश बुंडू के एक कपड़ा दुकान में काम करता था. सात जुलाई को पुलिस ने उसे दुकान से पकड़ा. आठ जुलाई को […]
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रांची: बुंडू थाना क्षेत्र निवासी रूपेश स्वांसी (17) की मौत पिटाई की वजह से ही हुई थी. मौत की वजह के बारे में मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सीआइडी को सौंप दी है. रूपेश बुंडू के एक कपड़ा दुकान में काम करता था. सात जुलाई को पुलिस ने उसे दुकान से पकड़ा. आठ जुलाई को उसे रिम्स में भरती कराया गया. रिम्स में जब उसे लाया गया था, तब उसकी मौत हो चुकी थी. इस मामले में रूपेश के परिजनों ने पुलिस हिरासत में रूपेश स्वांसी के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
पुलिस हिरासत में मारपीट की हुई पुष्टि : सरकार ने मामले की सीआइडी जांच का आदेश दिया था. जानकारी के मुताबिक, सीआइडी जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि रूपेश के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गयी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके शरीर पर मारपीट के जख्म पाये जाने की बात है. इसके बाद सीआइडी ने मेडिकल बोर्ड से पूछा था कि रूपेश की मौत की वजह क्या थी? बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मारपीट से रूपेश के शरीर पर लगी चोट की वजह से उसकी मौत हुई है. सूत्रों के मुताबिक, एसडीपीओ के कार्यालय और थाना में भी मारपीट की गयी. बार-बार की मारपीट के कारण रूपेश की तबीयत बिगड़ गयी थी. जांच के दौरान मामले से जुड़े गवाहों ने भी सीआइडी के अधिकारियों को बताया कि पुलिस पदाधिकारियों और बॉडीगार्ड द्वारा मारपीट की गयी थी.
पुलिस प्रताड़ना के हाल के मामले
08 जून : न्यू मधुकम चूना भट्ठा में हवलदार अरुण ने मकान मालिक जगदीश वर्मा को पीट कर घायल किया.
14 जून : धनबाद में पुलिस ने ट्रक चालक नाजीम को गोली मार दी. इसी घटना के बाद सीनियर अफसरों के दबाव के कारण इंस्पेक्टर उमेश कच्छप ने आत्महत्या कर ली.
14 जून : लातेहार के मनिका थाना की पुलिस ने नाबालिग लड़की को पूछताछ के लिए थाना में लाकर प्रताड़ित किया. लड़की 36 घंटे तक बेहोश रही.
18 जून : बोकारो में पुलिस ने पत्रकारों के साथ बदसलूकी की.
इन्हें बनाया गया था अभियुक्त
प्राथमिकी में बुंडू के तत्कालीन डीएसपी पवन कुमार, दशमफॉल थाना के तत्कालीन प्रभारी पंकज तिवारी, राहे थाना के तत्कालीन प्रभारी अशोक प्रसाद और डीएसपी के अंगरक्षक रहे सिपाही रितेश को अभियुक्त बनाया गया था.
डीएसपी ने कहा था कि रूपेश के पास मिले थे हथियार
सात जुलाई को पुलिस ने रूपेश को कपड़ा दुकान से पकड़ा. उसे थाना ले जाया गया. आठ जुलाई को उसकी मौत हो गयी. इसके बाद डीएसपी ने बयान दिया था कि रूपेश स्वांसी के पास से हथियार और 12 हजार रुपये बरामद किये गये थे़ दूसरे दिन डीएसपी ने कहा कि रुपेश की निशानदेही पर हथियार व नकदी बरामद की गयी. पुन: रूपेश की मौत के तीसरे दिन डीआइजी ने बयान दिया कि रूपेश के पास से कुछ भी नहीं मिला था. दूसरी ओर, घटना के बाद एसएसपी ने दोनों थाना प्रभारी और बॉडीगार्ड को निलंबित कर दिया था. डीआइजी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने बुंडू डीएसपी का तबादला कर दिया था. साथ ही पूरे मामले की सीआइडी जांच का आदेश दिया था.
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