झारखंड के खरसावां और खूंटी में रसोई गैस की भारी किल्लत, उपभोक्ता परेशान

खरसावां में साइकिल पर सिलेंडर ले जाते उपभोक्ता (बाएं ऊपर), सिलेंडर देने के लिए गाड़ी के ड्राइवर संपर्क करते लोग (दाएं ऊपर) और खूंटी में सिलेंडर पाने के लिए लाइन में खड़े उपभोक्ता (नीचे बाएं और दाएं). फोटो: प्रभात खबर
LPG Cylinder Crisis: झारखंड के खरसावां और खूंटी में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग परेशान हैं. गैस एजेंसियों पर लंबी कतार लग रही है और कई जगह रास्ते में ही ट्रकों से सिलेंडर खरीदे जा रहे हैं. कमर्शियल गैस की कमी से होटल और छोटे फूड स्टॉल संचालकों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश और खूंटी से चंदन कुमार की रिपोर्ट
LPG Cylinder Crisis: झारखंड के कई इलाकों में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरायकेला-खरसावां और खूंटी जिले में घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के गैस सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है. स्थिति यह है कि लोगों को गैस के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है और कई बार सिलेंडर मिलने से पहले ही स्टॉक खत्म हो जा रहा है.
खरसावां में एक सप्ताह से नहीं पहुंची गैस की गाड़ी
खरसावां में रसोई गैस की स्थिति पिछले एक सप्ताह से गंभीर बनी हुई है. जानकारी के अनुसार चांदनी चौक स्थित रसोई गैस के एक गोदाम में पिछले एक सप्ताह से ताला लटका हुआ है. घरेलू उपयोग के गैस सिलेंडर की डिलीवरी करने वाली गाड़ी भी पिछले एक सप्ताह से खरसावां नहीं पहुंची है. गैस की कमी के कारण सरायकेला स्थित मुख्य गोदाम से खरसावां आने के दौरान ही सिलेंडरों की बिक्री हो जा रही है. लोग रास्ते में ही गैस से भरे ट्रकों को रोककर सिलेंडर खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. कई स्थानों पर लोग सड़क किनारे घंटों तक गैस वाहन का इंतजार करते देखे जा रहे हैं.
इंडेन गैस एजेंसी में भी उपभोक्ताओं की भीड़
खरसावां की इंडेन गैस एजेंसी में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं. यहां भी लोगों को गैस सिलेंडर के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. कई उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. इस स्थिति से आम लोगों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कमर्शियल गैस की कमी से होटल और फूड स्टॉल प्रभावित
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी ने होटल संचालकों और छोटे-छोटे फूड स्टॉल चलाने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है. कई दुकानदारों का कहना है कि घरेलू गैस तो किसी तरह मिल जा रही है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना बेहद मुश्किल हो गया है. कुछ होटल और फूड स्टॉल संचालकों ने बताया कि अगर स्थिति एक-दो दिन और इसी तरह बनी रही, तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ सकते हैं. एजेंसी संचालक भी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के फोन नहीं उठा रहे हैं, जिससे स्थिति और भी उलझन भरी हो गई है.
गैस की कमी से लकड़ी और कोयले की बढ़ी मांग
रसोई गैस की कमी का असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है. गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण लोग वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश कर रहे हैं. इसके चलते सूखी लकड़ी और कोयले की मांग अचानक बढ़ गई है. कई परिवार बाजार से सूखी लकड़ियां खरीदकर घरों में स्टॉक कर रहे हैं, ताकि गैस नहीं मिलने की स्थिति में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जा सके. कुछ होटल संचालकों ने भी गैस की कमी के कारण अभी से ही लकड़ी का उपयोग शुरू कर दिया है.
खूंटी में भी सिलेंडर के लिए भटक रहे उपभोक्ता
इसी तरह खूंटी जिले में भी घरेलू गैस की किल्लत से उपभोक्ता परेशान हैं. गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. शुक्रवार को बिरसा इंडेन गैस एजेंसी में गैस सिलेंडर से भरा एक ट्रक पहुंचा. इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता एजेंसी के गोदाम के बाहर सुबह से ही कतार में लग गए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वहां पुलिस बल भी तैनात किया गया.
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बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को ही मिल रहा सिलेंडर
बिरसा इंडेन गैस एजेंसी की रुक्मिला सारू ने बताया कि फिलहाल केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर दिया जा रहा है, जिन्होंने पहले से बुकिंग कर रखी है. सिलेंडर प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं को छह अंकों वाला कोड दिखाना अनिवार्य किया गया है. हालांकि कई लोग गैस की बुकिंग भी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है. लगातार बढ़ती गैस की किल्लत के कारण दोनों इलाकों में लोगों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है. अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो आम लोगों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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