सुखदेव के खिलाफ हुए कई बड़े नेता

Updated at : 23 Jun 2014 5:12 AM (IST)
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सुखदेव के खिलाफ हुए कई बड़े नेता

दिल्ली में कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ नेताओं ने खोला मोरचा रामेश्वर उरांव और सुबोधकांत के घर भोज में बनी रणनीति रांची : दिल्ली में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ नेताओं ने मोरचा खोल दिया है. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत के खिलाफ प्रदेश के कई नेता एक साथ आ गये हैं. ऐसे में आनेवाले दिनों […]

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दिल्ली में कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ नेताओं ने खोला मोरचा

रामेश्वर उरांव और सुबोधकांत के घर भोज में बनी रणनीति

रांची : दिल्ली में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ नेताओं ने मोरचा खोल दिया है. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत के खिलाफ प्रदेश के कई नेता एक साथ आ गये हैं. ऐसे में आनेवाले दिनों में प्रदेश अध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दिल्ली में आला नेताओं से मिलने पहुंचे प्रदेश के नेताओं ने अलग बैठक कर रणनीति भी बनायी. प्रदेश अध्यक्ष से नाराज चल रहे लोहरदगा से प्रत्याशी रहे डॉ रामेश्वर उरांव के घर शनिवार की रात कई नेता भोज पर जुटे.

वहीं अगले दिन दिल्ली स्थित सुबोधकांत सहाय के आवास में रविवार को भोज हुआ. इसमें सांसद प्रदीप बलमुचु, धीरज साहू, मन्नान मल्लिक, मंजूर अहमद अंसारी, मदन मोहन शर्मा, मानस और बॉबी मल्लिक शामिल हुए. प्रदेश अध्यक्ष के कामकाज से ये नेता नाराज हैं.

भोज में जुटे नेताओं ने श्री भगत के खिलाफ आला नेताओं तक अपनी बात पहुंचाने की रणनीति बनायी. रविवार को ये नेताओं ने अलग-अलग पार्टी के आला नेता मुकुल वासनिक, एके एंटनी, अविनाश पांडेय और आरसी खुंटिया से मुलाकात की. इन नेताओं ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के काम के तरीके से कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी. लोकसभा चुनाव में संगठन और सरकार के बीच समन्वय के अभाव की बात भी कही गयी. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी प्रदेश नेतृत्व की शिकायत करेंगे.

.और सुबोधकांत के घर पहुंच गये सुखदेव

रविवार की दोपहर सुबोधकांत सहाय के घर विक्षुब्ध नेता जुटे थे. उधर, सुखदेव भगत पार्टी के आला नेताओं से दोपहर एक बजे मिलने के बाद सीधे सुबोधकांत सहाय के पास पहुंच गये. प्रदेश अध्यक्ष को जानकारी थी कि कुछ नेता अलग बैठ रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश के नेताओं से ही पूछ दिया कि आप बतायें किस एजेंडा पर आला नेताओं के सामने बात की जाये. प्रदेश अध्यक्ष के अचानक पहुंचने से कुछ नेता सकते में आ गये.

प्रदेश अध्यक्ष से कुछ नेताओं की बहस भी हुई. एक नेता ने पूछा कि आप कह रहे हैं कि 81 सीट पर लड़ेंगे. उम्मीदवार कहां है. इस पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आप कोई उम्मीदवार तो नहीं थे. नौकरी छोड़ कर आये, चुनाव जीते ना. मैं भी उसी तरह चुनाव जीता. पिछले विधानसभा चुनाव में सात पुराने लोग हार गये.

लंबे समय बाद साथ आये बलमुचु-सुबोध

सुखदेव भगत के बहाने प्रदीप बलमुचु और सुबोधकांत सहाय के एक साथ आने पर पार्टी के अंदर खूब चर्चा है. सुबोधकांत और बलमुचु विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपने हिसाब से रणनीति बना रहे हैं. सुखदेव भगत के खिलाफ लोगों को भी गोलबंद किया जा रहा है.

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