रांची : संविदा पर हुई बहाली को सरकारी नौकरी बता की गयी वसूली

Updated at : 05 Jan 2019 12:12 AM (IST)
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रांची : संविदा पर हुई बहाली को सरकारी नौकरी बता की गयी वसूली

संजय, रांची : खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) ने धान खरीद के लिए लेखापाल सह कंप्यूटर अॉपरेटर की नियुक्ति की है. अौसतन 31 हजार प्रति माह के वेतन पर कुल 231 लोग बहाल किये गये हैं. संविदा पर हुई यह नियुक्ति दिसंबर 2018 से लेकर मार्च 2019 तक के लिए है. […]

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संजय, रांची : खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) ने धान खरीद के लिए लेखापाल सह कंप्यूटर अॉपरेटर की नियुक्ति की है. अौसतन 31 हजार प्रति माह के वेतन पर कुल 231 लोग बहाल किये गये हैं. संविदा पर हुई यह नियुक्ति दिसंबर 2018 से लेकर मार्च 2019 तक के लिए है.
इधर, संविदा पर चार माह की इस बहाली को सरकारी नौकरी का भ्रम बना कर अभ्यर्थियों से भारी वसूली हुई है. दरअसल, निगम ने एक निजी फर्म एसबीसी एक्सपोर्ट लि. से उक्त लोगों की सेवा मांगी थी.
आरोप है कि लंबे समय की सरकारी नौकरी बता कर अभ्यर्थियों से 20 से 50 हजार तक वसूले गये. यही नहीं बजाप्ता एसएफसी के पैड पर इसके तत्कालीन उप महाप्रबंधक संजय कुमार (वर्तमान में निदेशक खाद्य आपूर्ति) के हस्ताक्षर से कुल आठ लोगों को विभिन्न जिले में योगदान की चिट्ठी निकाली गयी.
गत 24 दिसंबर की तारीख से जारी इस पत्र की शैली सरकारी नौकरियों में होने वाले योगदान का आभास देती है. इसमें लिखा गया है कि निगम के नियमित स्रोत पर अापका चयन किया गया है. जिसका सुनिश्चित पत्र 24 दिसंबर को एमडीआइ भवन, रांची से पत्र की प्राप्ति कर सुनिश्चित करें.
अाप सभी चयनित कर्मचारियों को आदेश दिया जाता है कि दिनांक 18 जनवरी 2019 को उपयुक्त जिलों में योगदान कर विभाग को सूचित करें. यह पत्र कुल आठ लोगों के नाम से जारी किया गया है. सूत्रों के अनुसार उक्त आठ लोगों से डेढ़ लाख तक की वसूली हुई है.
इधर, इस तरह की चिट्ठी की जानकारी विभागीय सचिव अमिताभ कौशल तक पहुंचने पर उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा है. इसके बाद एसएफसी के महाप्रबंधक रामचंद्र पासवान ने जांच में पाया है कि इस चिट्ठी पर तत्कालीन उप महाप्रबंधक का जो हस्ताक्षर है, वह जाली है. हालांकि, अब तक इस मामले में किसी कार्रवाई की सूचना नहीं है.
भ्रम बने रहने दिया
इस पूरे प्रकरण में न तो संजय कुमार ने अौर न ही किसी अन्य वरीय अधिकारी ने कभी स्पष्ट करने की कोशिश की कि यह नियुक्ति सिर्फ चार माह के लिए है. यहां तक कि जब नव नियुक्त लेखापाल सह कंप्यूटर अॉपरेटर का प्रशिक्षण एटीआइ में चल रहा था, वहां वसूली संबंधी चर्चा थी. पर वहां भी चयनित लोगों को नहीं कहा गया कि आप लोग लंबी अवधि वाले किसी सरकारी नौकरी के भ्रम में न रहें अौर न ही किसी को कुछ दें.
निगम का पैड कैसे मिला
इस मामले में यह भी आश्चर्य की बात है कि तथाकथित फर्जी पत्र जारी करने वाले को निगम का असली पैड कहां से मिला. इस पर बाकायदा झारखंड सरकार का लोगो भी है. वहीं, जिनके फर्जी हस्ताक्षर से यह पत्र जारी हुआ, उन्होंने खुद इस मामले में कार्रवाई की कोई पहल नहीं की.
अभी पूरी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है. इस मुद्दे पर संजय कुमार से भी उनका पक्ष जाना जायेगा. स्थिति स्पष्ट होने पर दोषियों पर प्राथमिकी जरूर दर्ज की जायेगी, ताकि आगे इस तरह की बात न हो.
– बद्री नाथ चौबे, प्रबंधन निदेशक (राज्य खाद्य निगम)
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