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झारखंड में हर दिन तीन से ज्यादा दुष्कर्म के मामले, मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक हुई हैं 1317 घटनाएं

Updated at : 22 Apr 2018 7:21 AM (IST)
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झारखंड में हर दिन तीन से ज्यादा दुष्कर्म के मामले, मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक हुई हैं 1317 घटनाएं

थाने में हर माह 109 से ज्यादा मामले आते हैं सामने रांची : झारखंड में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर हर दिन तीन से ज्यादा रेप की घटनाएं सामने आती है. यानी हर माह 109 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दर्ज किये जाते हैं. […]

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थाने में हर माह 109 से ज्यादा मामले आते हैं सामने

रांची : झारखंड में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर हर दिन तीन से ज्यादा रेप की घटनाएं सामने आती है. यानी हर माह 109 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दर्ज किये जाते हैं. मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के आंकड़ों पर गौर करें, तो कुल 1317 घटनाएं सामने आयी हैं. जबकि जानकार बताते हैं कि 40-45 फीसदी मामले लोक-लाज और थाने से बाहर सुलझा लेने के कारण आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाते हैं.

रेप के मामले में भारतीय दंड विधान की धारा 376(2) के तहत उम्रकैद और पोक्सो एक्ट-2012 के तहत आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है. दुष्कर्म के बाद हत्या करने पर 302 के तहत फांसी की सजा हो सकती है. हालांकि उक्त सजा के प्रावधानों के बाद जो खाैफ होना चाहिए, वह नहीं दिखता. इसकी मुख्य वजह है समय पर अनुसंधान का पूरा नहीं होना. यही वजह है कि आरोपियों को इसका लाभ मिलता है. दूसरी वजह है सामाजिक तौर पर अनर्गल तरीके से मामलों को सलटाने की प्रवृत्ति.

तीसरी वजह यहां के ग्रामीण और सूदरवर्ती इलाकों में कानून को लेकर जागरूकता का अभाव. हालांकि कुछेक मामलों में प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों द्वारा दोषियों को सात से 10 साल तक की सजा और कुछ मामले में उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा भी सुनायी गयी है. लेकिन इस बात को जिस ढंग से प्रचारित और प्रसारित किया जाना चाहिए था, वह नहीं हो सका.

20 दिसंबर 2013 को रांची में पहली बार पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ था मामला

बरियातू में 12 साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दुष्कर्म की धारा के अलावा पोक्सो एक्ट-2012 के तहत 20 दिसंबर 2013 को रांची के बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. यह रांची में पोक्सो एक्ट का पहला मामला था.

क्या है पोक्सो एक्ट
बच्चों के साथ आये दिन यौन अपराधों की घटनाएं होती रहती हैं. इस तरह के मामलों की बढ़ती संख्या देखकर सरकार ने वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया, जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों में सुरक्षा प्रदान करता है. उस कानून का नाम पॉक्सो एक्ट है. पॉक्सो शब्द अंग्रेजी से आता है. इसका पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आॅफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होनेवाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है. यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है.

केस : एक
गिरिडीह में जनवरी 2017 को दोषी को सुनायी गयी सात साल की सजा : गिरिडीह जिले में पोक्सो एक्ट के तहत जनवरी 2017 को व्यवहार न्यायालय के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार चौबे ने दुष्कर्मी विकास पंडित को सात साल की सजा सुनायी थी. कोर्ट ने आरोपी विकास को भारतीय दंड विधान की धारा 366 में चार वर्ष, धारा 376 में सात वर्ष और पोक्सो एक्ट की धारा चार के तहत सात वर्ष कैद की सजा सुनायी. इसमें अर्थदंड के रूप में 20 हजार रुपये जमा नहीं करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान किया गया. किशोरी के पिता के आवेदन पर बिरनी थाना में मामला दर्ज कराया गया था.

केस : दो
फरवरी 2018 में दुष्कर्म के बाद हत्या करनेवाले को रांची कोर्ट से मिली फांसी की सजा : आठ वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में दोषी गांधी उरांव को रांची के अपर न्यायायुक्त शिवपाल सिंह की अदालत ने फरवरी 2018 में फांसी की सजा सुनायी थी. मामला लोअर बाजार थाना कांड संख्या 73/14 से जुड़ा है. आरोपी गांधी उरांव ने 19 मार्च 2014 की रात 10 बजे कांटा टोली के भुइयां टोली स्थित नाबालिग के घर गया और उसे बहला-फुसलाकर नाश्ता कराने के बहाने साथ ले गया. इसके बाद बस स्टैंड के समीप स्थित कब्रिस्तान में ले जाकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और पकड़े जाने के डर से उसका मुंह पत्थर से कुचल कर मार डाला. मामले में अदालत की ओर से आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनायी गयी. इनमें 376(2) के तहत उम्र कैद, 302 के तहत फांसी की सजा, पोक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा और धारा 201 के तहत शव छिपाने को लेकर 5 वर्ष की सजा सुनायी गयी.

केस : तीन
फरवरी 2014 में दुष्कर्मी को सरायकेला में मिली 10 साल की सजा : सरायकेला-खरसावां जिला व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश केके श्रीवास्तव के न्यायालय ने दुष्कर्म के आरोपी गुरुपदो महतो को दोषी पाते हुए दस वर्ष सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपये दंड की सजा सुनायी थी. अर्थदंड न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया था. सरायकेला थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सरायकेला थाना क्षेत्र स्थित घर में पीड़िता सात मार्च 2012 को अकेली थी. इस बीच गुरुपद महतो ने घर में घुसकर पीड़ित युवती के साथ दुष्कर्म किया था.

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