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Covid-19: गुजरात में निजी स्कूलों द्वारा आयोजित ऑनलाइन कक्षाएं हुई निलंबित, जानिए क्या है कारण

Updated at : 23 Jul 2020 4:53 PM (IST)
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Covid-19: गुजरात में निजी स्कूलों द्वारा आयोजित ऑनलाइन कक्षाएं हुई निलंबित, जानिए क्या है कारण

कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण शिक्षा जगत भी मार झेल रहा है. स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर बंद हैं. परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं. कई स्कूल ऑनलाइन माध्य्म से कक्षाएं चला रहे हैं. गुजरात में निजी स्कूलों ने गुरुवार से अनिश्चित काल के लिए ऑनलाइन कक्षाओं को निलंबित कर दिया है, राज्य सरकार के एक आदेश के बाद उन्होंने कहा कि जब तक स्कूल फिर से नहीं खुलते, तब तक वे छात्रों से फीस जमा न करें.

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कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण शिक्षा जगत भी मार झेल रहा है. स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर बंद हैं. परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं. कई स्कूल ऑनलाइन माध्य्म से कक्षाएं चला रहे हैं. गुजरात में निजी स्कूलों ने गुरुवार से अनिश्चित काल के लिए ऑनलाइन कक्षाओं को निलंबित कर दिया है, राज्य सरकार के एक आदेश के बाद उन्होंने कहा कि जब तक स्कूल फिर से नहीं खुलते, तब तक वे छात्रों से फीस जमा न करें.

पिछले हफ्ते जारी एक अधिसूचना में, गुजरात सरकार ने राज्य में स्व-वित्तपोषित स्कूलों को निर्देश दिया कि जब तक वे कोविड-19 (COVID-19) महामारी के मद्देनजर बंद रहें, तब तक छात्रों से ट्यूशन फीस एकत्र न करें. गुजरात सरकार ने इन स्कूलों से शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए फीस में बढ़ोतरी नहीं करने को भी कहा.

इस कदम से नाखुश, गुजरात के लगभग 15,000 स्व-वित्तपोषित स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघ ने ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का फैसला किया, इस महीने की शुरुआत में छात्रों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था शुरू हुई. इन स्कूलों में से अधिकांश ने बुधवार रात एसएमएस के माध्यम से माता-पिता को सूचित किया कि गुरुवार से उनके वार्डों के लिए कोई ऑनलाइन कक्षाएं नहीं होंगी.

स्व-वित्तपोषित स्कूल प्रबंधन संघ के प्रवक्ता दीपक राजगुरु ने गुरुवार को कहा कि राज्य के लगभग सभी स्व-वित्तपोषित स्कूल ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने से परहेज करते हैं.

“यदि सरकार का मानना ​​है कि ऑनलाइन शिक्षा वास्तविक शिक्षा नहीं है, तो हमारे छात्रों को ऐसी अवास्तविक शिक्षा प्रदान करने का कोई मतलब नहीं है. जब तक सरकार उस अधिसूचना को वापस नहीं लेती, तब तक ऑनलाइन शिक्षा निलंबित रहेगी.

उन्होंने कहा कि एसोसिएशन राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएगी. प्रमुख शिक्षाविद और एसोसिएशन के सदस्य जतिन भारद ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में ऑनलाइन शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है.

स्व-वित्तपोषित स्कूलों को शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को वेतन देने की आवश्यकता है. भारत के किसी भी राज्य ने इस तरह का निर्णय नहीं लिया है कि ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के बावजूद फीस नहीं ली जा सकती है. यदि हम राज्य अधिसूचना का पालन करते हैं, तो हमारे लिए वेतन का भुगतान करना और स्कूल चलाना असंभव होगा. इस प्रकार, हमने ऑनलाइन कक्षाओं को निलंबित करने का फैसला किया है.

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