हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध आलोचक निर्मला जैन का निधन,साहित्य जगत में शोक
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 15 Apr 2025 7:31 PM
निर्मला जैन का निधन, दिल्ली विश्वविद्यालय में शोक सभा
Nirmala Jain passed away : निर्मला जैन का जन्म 28 अक्टूबर 1932 को दिल्ली में हुआ था. उन्होंने दिल्ली में ही शिक्षा पूरी की .निर्मला जैन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए, पीएचडी और डीलिट् की उपाधियां प्राप्त की थीं. अध्यापन के क्षेत्र में निर्मला की पहली नियुक्ति लेडी श्रीराम कॉलेज में हुई थी, उसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन का कार्य किया था.
Nirmala Jain passed away : हिंदी साहित्य की प्रमुख आलोचक और लेखिका निर्मला जैन का 15 अप्रैल की सुबह निधन हो गया. उनके निधन से संपूर्ण साहित्य जगत में शोक है और प्रशंसक उनकी कृतियों को याद कर रहे हैं. निर्मला जैन की आत्मकथा ‘जमाने में हम’ उनकी काफी चर्चित रचना है. उनके निधन पर साहित्य अकादमी ने भी शोक व्यक्त किया है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोक सभा आयोजित
निर्मला जैन की याद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एक शोक सभा आयोजित की गई. इस शोक सभा में हिंदी विभाग की वर्तमान अध्यक्ष प्रो सुधा सिंह ने प्रो निर्मला जैन को याद करते हुए उनके साथ बिताए अपने कुछ अनुभवों को साझा किया. उन्होंने कहा कि प्रो निर्मला जैन आत्मीयता की साक्षात मूर्ति थीं. यह न सिर्फ उनके व्यक्तित्व बल्कि उनके कृतित्व से भी साक्षात झलकता है. प्रो जैन के पास अनेक गंभीर विषयों का अनुभव और पुरानी स्मृतियों का एक पूरा खजाना था. उनका जाना न सिर्फ दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के लिए बल्कि संपूर्ण साहित्य जगत , हिंदी आलोचना के लिए अपूरणीय क्षति है. सभा के अंत में प्रो निर्मला जैन को याद करते हुए दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की.
निर्मला जैन का जन्म 28 अक्टूबर 1932 को दिल्ली में हुआ था. उन्होंने दिल्ली में ही शिक्षा पूरी की .निर्मला जैन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए, पीएचडी और डीलिट् की उपाधियां प्राप्त की थीं. अध्यापन के क्षेत्र में निर्मला की पहली नियुक्ति लेडी श्रीराम कॉलेज में हुई थी, उसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन का कार्य किया था.उन्होंने कई रचनाओं का अनुवाद भी किया था. उनकी आत्मकथा जमाने में हम काफी चर्चित है.
प्रमुख कृतियां (आलोचना)
आधुनिक हिंदी काव्य में रूप-विधाएं
रस सिद्धांत और सौंदर्यशास्त्र
आधुनिक साहित्य : मूल्य और मूल्यांकन
हिंदी आलोचना की बीसवीं सदी
आधुनिक हिंदी काव्य : रूप और संरचना
अनुवाद
उदात्त के विषय में
बंगला साहित्य का इतिहास
समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएं
साहित्य का समाजशास्त्रीय चिंतन
भारत की खोज
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










