ePaper

दिल्ली में जुलाई के अंत तक हो सकते हैं कोरोना के 5.5 लाख मामले, स्टेडियम बनेगा अस्पताल

Updated at : 09 Jun 2020 9:44 PM (IST)
विज्ञापन
दिल्ली में जुलाई के अंत तक हो सकते हैं कोरोना के 5.5 लाख मामले, स्टेडियम बनेगा अस्पताल

Ajmer: A municipal worker sprays disinfectant on his colleagues after they cremated the body of a woman who died due of COVID-19, at a crematorium in Ajmer, Tuesday, June 9, 2020. (PTI Photo) (PTI09-06-2020_000080B)

दिल्ली सरकार की एक समिति ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए इससे निपटने के लिए प्रगति मैदान, तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए अस्थायी अस्पताल में तब्दील करने का सुझाव दिया है.

विज्ञापन

नयी दिल्ली : दिल्ली सरकार की एक समिति ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए इससे निपटने के लिए प्रगति मैदान, तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए अस्थायी अस्पताल में तब्दील करने का सुझाव दिया है.

एक अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही. उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गठित समिति ने त्यागराज इंडोर स्टेडियम और ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम को भी इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है. इससे पहले दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि शहर में जुलाई के अंत तक कोविड-19 के 5.5 लाख मामले हो सकते हैं, लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि दिल्ली में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण नहीं है.

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के साथ एक बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि दिल्ली में जुलाई अंत तक 80,000 बेड की जरूरत पड़ेगी. बैठक की अध्यक्षता उप राज्यपाल अनिल बैजल ने की. वह दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं.

Also Read: अरविंद केजरीवाल के कोरोना टेस्ट में क्या आया ? जानिए दिल्ली के सीएम कब तक करेंगे घर पर आराम

सिसोदिया ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण की पुरानी दर को ध्यान में रखा जाए तो दिल्ली में 12.6 दिन में मामले दुगुने हो रहे हैं. बैठक में लगभग सभी भागीदार इस पर सहमत हुए. अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार तक ठीक होने की दर 37.92 प्रतिशत थी.

सिसोदिया ने मीडिया से कहा, केंद्र के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि दिल्ली में कोविड-19 का सामुदायिक प्रसार नहीं है. इसलिए इस पर चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है. उप मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों को दिल्ली के लोगों के लिए सुरक्षित करने के दिल्ली सरकार के फैसले को रद्द करने के अपने निर्णय पर विचार करने से उप राज्यपाल ने इनकार कर दिया है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में 15 जून तक संक्रमण के 44,000 मामले हो सकते हैं तथा अस्पतालों में 6,600 बेड की जरूरत पड़ेगी. सिसोदिया ने कहा, 30 जून तक दिल्ली में संक्रमण के एक लाख तक मामले होंगे और हमें 15,000 बेड की जरूरत पड़ेगी. उन्होंने कहा, ऐसा अनुमान है कि दिल्ली में 15 जुलाई तक 2.15 लाख मामले होंगे और 33,000 बेड की जरूरत पड़ेगी. वहीं, 31 जुलाई तक 5.5 लाख मामले होंगे और दिल्ली को 80,000 बेड की जरूरत पड़ेगी.

उन्होंने कहा कि संक्रमण के मामले दुगुने होने के आधार पर 31 जुलाई तक 5.5 लाख मामले होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहने वाले लोगों को कोविड-19 महामारी की वजह से बेड की जरूरत पड़ेगी और इसको देखते हुए ही दिल्ली मंत्रिमंडल ने दिल्ली के सरकारी और निजी अस्पतालों के बिस्तर आरक्षित करने का निर्णय लिया था.

सिसोदिया ने कहा, अगर देशभर से लोग उपचार के लिए दिल्ली आने लगे तो…उपराज्यपाल को कोविड-19 के मामलों और दिल्ली में उपलब्ध बेड के बारे में पता नहीं है. सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली में आने वाले दिनों में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते ही रहे तो बेड की उपलब्धता कैसे होगी, इस संबंध में बैठक में किसी भी व्यक्ति के पास कोई जवाब नहीं था.

उन्होंने कहा, अगर बेड नहीं होंगे तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर पूरे देश से लोग आते रहे तो दिल्ली के अस्पतालों में तीन, चार या दस दिन के भीतर बेड भर जाएंगे. उन्होंने कहा, जैसा उपराज्यपाल ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया है तो हम देश और दिल्ली के लोगों की सेवा करने की कोशिश करेंगे. हम चिकित्सीय सुविधाएं भी बढ़ाने की कोशिश करेंगे.

सिसोदिया ने कहा कि उपराज्यपाल के आदेश से राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी दिक्कत पैदा हो गयी है. सोमवार को उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी और निजी अस्पतालों को दिल्ली वालों के लिए सुरक्षित करने के आप सरकार के फैसले को पलट दिया. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शहर में संक्रमण के मामलों में वृद्धि के लिए केंद्र को जिम्मेदार बताया.

अपने आवास पर संवाददाताओं से बात करते हुए जैन ने दावा किया अधिकतर उड़ानें दिल्ली और मुंबई आ रही थी. दिल्ली में संक्रमण के 30,000 मामले हैं तो मुंबई में 50,000 मामले हैं. उन्होंने कहा, हमने केंद्र से दिल्ली में सभी उड़ानों का परिचालन बंद करने का अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने 15 दिन बाद इसे रोका.

जैन ने कहा, दूसरे राज्यों के लोग भी दिल्ली में रूके हुए थे. उन्हें अपने गृह राज्य में जाने की अनुमति दी जानी चाहिए थी. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नए मामलों में से करीब 50 फीसदी में संक्रमण के स्रोत की जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार जून अंत तक बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज के लिए तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि संक्रमण के दर की गणना के हिसाब से सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का फैलना संक्रमण का तीसरा चरण होता है. दिल्ली में संक्रमण के नए करीब आधे मामले में स्रोत का पता नहीं है.

सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उप राज्यपाल के आदेश ने दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी मुश्किलें और चुनौतियां पैदा कर दी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के समय में पूरे देश से आ रहे लोगों का इलाज करना बड़ी चुनौती है.

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से आ रहे लोगों को भी इलाज मुहैया कराने की व्यवस्था करेगी. दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के नए 1,007 मामले सामने आए हैं जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या 29,000 से ज्यादा हो गई और अब तक 874 लोगों की मौत हो चुकी है.

विज्ञापन
Agency

लेखक के बारे में

By Agency

Agency is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola