शुद्ध पेयजल को तरस रही जिले की बड़ी आबादी

Updated at : 28 Mar 2018 12:32 AM (IST)
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शुद्ध पेयजल को तरस रही जिले की बड़ी आबादी

गर्मी के दिनों में बढ़ जाता है जल संकट हाजीपुर : जिले की एक बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रही है. आर्सेनिक युक्त पानी पीने की लाचारी ने हजारों लोगों को बीमार बना डाला है. प्रदूषित पानी के कारण लोग डायरिया, टायफाइड एवं कृमि के अलावा कोलेरा, डिसेंट्री,जॉइंडिस जैसे खतरनाक रोग […]

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गर्मी के दिनों में बढ़ जाता है जल संकट

हाजीपुर : जिले की एक बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रही है. आर्सेनिक युक्त पानी पीने की लाचारी ने हजारों लोगों को बीमार बना डाला है. प्रदूषित पानी के कारण लोग डायरिया, टायफाइड एवं कृमि के अलावा कोलेरा, डिसेंट्री,जॉइंडिस जैसे खतरनाक रोग के शिकार हो रहे हैं. जिले के जागरूक लोगों का कहना है कि स्वच्छता की दुहाई देने वाला शासन प्रशासन जब आम जनता को पीने का शुद्ध पानी तक उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो स्वच्छ समाज और स्वस्थ समाज का मिशन कहां तक और कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है.
अधर में पड़ी है बहु ग्रामीण जलापूर्ति योजना : जिले के चार प्रखंडों हाजीपुर, बिदुपुर,देसरी एवं सहदेई बुजुर्ग की जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लान की शुरुआत की गयी थी. बहु ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत गंगा का पानी साफ कर इन चारों प्रखंडों को आर्सेनिक मुक्त पानी देने के लिए लगभग नौ साल पहले यह योजना शुरू हुई थी. दो साल के भीतर यह काम पूरा होना था. वर्ष 2009 में कार्य शुरू हुआ और 2011 के अंत तक इसे पूरा कर लेने का लक्ष्य था.
136.5 करोड़ की योजना में 96 किलोमीटर में मेन पाइप तथा 400 किलोमीटर में ब्रांच पाइप बिछाई जानी है. जिले के ये चारों प्रखंड आर्सेनिक प्रभावित माने जाते हैं. बहु ग्रामीण जलापूर्ति योजना के पूरी हो जाने पर इन प्रखंडों के लगभग 80 गांवों को आर्सेनिक युक्त पानी से मुक्ति मिल सकती है. लेकिन, यह मुक्ति कब मिलेगी, कहना मुश्किल है. कार्य प्रगति का जो हाल है, उसे देखने से नहीं लगता कि इस साल में भी यह योजना पूरी हो पायेगी.
आर्सेनिकयुक्त पानी का परिणाम
आर्सेनिक वाले पानी पीने का परिणाम प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जिले में अर्सेनिकोसिस से ग्रस्त मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी के इस्तेमाल से शरीर में आर्सेनिक जमा होने के कारण शरीर पर सफेद या काले धब्बे उभर आते हैं. शरीर की त्वचा पर कड़े और खुरदरे चकत्ते बनना, हथेली एवं तलवे की चमड़ी का मोटा होना और उस पर गांठें पड़ना, सांस लेने में परेशानी और खांसी, कमजोरी, अंगुलियों एवं अंगूठे का सड़ जाना आर्सेनिकोसिस के लक्षण हैं. इससे त्वचा, फेफड़े और मुत्राशय का कैंसर भी होता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा कई स्तरों पर कार्ययोजना बनायी गयी है. बहु ग्रामीण जलापूर्ति योजना का कार्य प्रगति पर है. इसके शीघ्र पूरी हो जाने की उम्मीद है.
केशव कुमार लाल, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी, हाजीपुर
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