विधायकों के साथ मारपीट मामले में दो सिपाही निलंबित, विधायकों के आचारण की चल रही जांच

Updated at : 23 Jul 2021 7:03 AM (IST)
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विधायकों के साथ मारपीट मामले में दो सिपाही निलंबित, विधायकों के आचारण की चल रही जांच

बजट सत्र के आखिरी दिन विधायकों के साथ हुई मारपीट मामले में प्रथमदृष्टया आरोपित मानते हुए दो पुलिस जवानों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि विधायकों के आचारण को लेकर आयी शिकायतों की जांच विधानसभा की आचार समिति कर रही है.

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पटना. बजट सत्र के आखिरी दिन विधायकों के साथ हुई मारपीट मामले में प्रथमदृष्टया आरोपित मानते हुए दो पुलिस जवानों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि विधायकों के आचारण को लेकर आयी शिकायतों की जांच विधानसभा की आचार समिति कर रही है. समिति की रिपोर्ट आते ही आगे की कार्रवाई की जायेगी.

विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि विधायकों के साथ राज्य सरकार के पदाधिकारियों द्वारा सुनिश्चित प्रोटोकाॅल का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए. इनके मान-सम्मान की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में है. ऐसे में किसी स्तर के पदाधिकारियों द्वारा किये गये अशिष्ट और अमर्यादित व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

इस संबंध में पटना जिला बल के सिपाही शेषनाथ प्रसाद और सिपाही रंजीत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. श्री सिन्हा ने कहा कि इन दोनों सिपाहियों द्वारा इस प्रकार किये गये आचरण उनकी उदंडता, मनमानेपन, गैरजिम्मेदाराना और अयोग्य पुलिस कर्मी होने का स्पष्ट परिचायक है और इससे पुलिस विभाग की छवि भी धूमिल हुई है.

इस संबंध में डीआइजी ने दोनों सिपाहियों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया है. श्री सिन्हा ने कहा कि बीते 23 मार्च को सदन में बिहार सशस्त्र बल विधेयक, 2021 के पेश किये जाने के दौरान कतिपय विरोधी दल के सदस्यों ने विरोध प्रकट किया और कुछ अमर्यादित आचरण भी किया. उन्होंने कहा कि विधानसभा में आसन को बाधित कर अध्यक्ष के कक्ष को चारों ओर से बंद कर दिया गया.

संसदीय प्रणाली में इस तरह का डेडलाॅक वांछनीय और शोभनीय नहीं होता है. सदन में फैली अव्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए सभा सचिवालय में कार्यरत मार्शलों की कम संख्या होने के कारण उनके सहयोग के लिए पटना जिला बल से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि विधायकों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना है. इस दौरान मैं अपने कक्ष में ही बंद था.

कुछ मीडिया विजुअल में मेरे कक्ष के बाहर एक व्यक्ति द्वारा एक सदस्य को मारते हुए और पोर्टिको के व्हाइट लाइन के बाहर एक अन्य सदस्य को मारते हुए देखा गया. यह किसी रूप में स्वीकार नहीं था और यह सर्वथा उचित नहीं था. इस संबंध में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और डीजीपी को जांच के बाद कार्रवाई का निर्देश दिया गया था. उन्होंने यह बताया है कि उक्त घटना के लिए दोषी पुलिसकर्मियों को चिह्नित करते हुए उन पर कार्रवाई की गयी है.

Posted by Ashish Jha

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