कथावाचक ने भागवत कथा के महत्व पर डाला प्रकाश

श्रीमद्भागवत महापुराण को भगवान कृष्ण का प्रत्यक्ष स्वरूप माना जाता है
राघोपुर. फिंगलास पंचायत में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञोत्सव में दूसरे दिन मंगलवार को आचार्य रणधीर झा ने भगवान राधा-कृष्ण के कीर्तन और भागवत कथा के महत्व पर सरल रूप में प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण को भगवान कृष्ण का प्रत्यक्ष स्वरूप माना जाता है. दूसरे दिन की कथा में उन्होंने समझाया कि महाभारत की रचना के बाद भी व्यास जी संतुष्ट नहीं थे. तब नारद जी ने उन्हें नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का महत्व बताया. इसके बाद भगवान विष्णु की कृपा से व्यास जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की. जिसमें 12 स्कंध और 18 हजार श्लोक है. यह ग्रंथ कलियुग में ज्ञान प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग माना गया है. आचार्य जी ने बताया कि अलग-अलग इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान के विभिन्न अवतारों की पूजा कैसे करनी चाहिए. कथा में राजा परीक्षित का जन्म, युधिष्ठिर आदि का स्वर्गारोहण, परीक्षित का राजा बनना, उनके द्वारा धर्म (बैल) और पृथ्वी (गाय) को कलियुग से बचाने की कथा सुनाई. इसके अलावा, परीक्षित को ऋषि के श्राप के बाद उनका व्रत रखना, शुकदेव जी से सात दिन तक कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त करना भी बताया गया. सृष्टि की रचना, भगवान के वराह अवतार द्वारा पृथ्वी का उद्धार और हिरण्याक्ष वध जैसे प्रसंगों का भी वर्णन किया गया. पूरी कथा के दौरान श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे.
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