बदहाली: पगडंडी पर अटकी जिंदगी

Published by :RAJEEV KUMAR JHA
Published at :27 Apr 2026 7:18 PM (IST)
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बदहाली: पगडंडी पर अटकी जिंदगी

बीमारी में हर मिनट लगता है भारी

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– अवध मिश्र टोला में सड़क का सपना अधूरा, 35 परिवार बदहाली में जीने को मजबूर

उमेश कुमार, जदिया

सरकारी योजना, विकास के दावों और हर गांव तक सड़क पहुंचाने की घोषणाओं के बीच कोरियापट्टी पूरब पंचायत के वार्ड नंबर 05 अवध मिश्र टोला आज भी मूलभूत सुविधा से वंचित है. आजादी के दशकों बाद भी इस टोले के करीब 35 परिवार सड़क जैसी जरूरी सुविधा के इंतजार में हैं. गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को खेतों के बीच बनी संकरी पगडंडी, मेड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों का सहारा लेना पड़ता है. यह समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले परिवारों के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक जीवन पर भी सीधा असर डाल रही है. ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन यहां लोगों का संघर्ष के साथ शुरू होता है. संघर्ष के साथ ही समाप्त होता है. बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है. रास्ता कीचड़ और पानी से लबालब भर जाता है. कई जगह फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में टोले का संपर्क आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है.

चुनाव में वादा, बाद में भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि

ग्रामीणों ने बताया कि हर चुनाव के समय सड़क निर्माण सबसे बड़ा मुद्दा बनता है पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक नेता गांव में पहुंचते हैं, सड़क बनवाने का आश्वासन देते हैं और वोट मांगते हैं. लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई जनप्रतिनिधि दोबारा टोले की सुध लेने नहीं आता. वर्षों से केवल भरोसा और आश्वासन ही मिल रहा है. जबकि जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा. इससे ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ रही है.

बीमारी में हर मिनट लगता है भारी

सड़क नहीं रहने का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है. यदि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ जाए, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो या किसी बुजुर्ग को तत्काल इलाज की जरूरत पड़ जाए, तो परिजनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है.

ग्रामीण बताते हैं कि एंबुलेंस टोले तक नहीं पहुंच सकती. ऐसे में मरीज को खाट, चारपाई या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है. इसमें काफी समय लग जाता है.. कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीज की हालत गंभीर हो जाती है. बरसात के मौसम में यह परेशानी कई गुना बढ़ जाती है.

बच्चों की पढ़ाई पर संकट

टोले के बच्चों की शिक्षा भी सड़क नहीं रहने से प्रभावित हो रही है. छोटे-छोटे बच्चे रोजाना कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं. कई बार कपड़े और किताबें भीग जाती हैं. बरसात के दिनों में कई बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच पाते. अभिभावक भी दुर्घटना की आशंका से बच्चों को घर पर रोक लेते हैं. इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाली पीढ़ी भी पिछड़ जाएगी.

विद्यालय के लिए जमीन दी, फिर भी नहीं मिली सुविधा

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए उन्होंने विद्यालय निर्माण हेतु तीन कट्ठा जमीन भी उपलब्ध कराई थी. लेकिन सड़क नहीं होने के कारण वहां विद्यालय का संचालन संभव नहीं हो सका. बाद में स्कूल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ा.

इससे बच्चों को अब अधिक दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क बन जाती तो गांव के बच्चों को अपने ही टोले में शिक्षा मिलती और अभिभावकों को भी सुविधा होती.

आधे गांव तक सड़क, बाकी हिस्से में उपेक्षा

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा टोले के पश्चिमी हिस्से में बसे करीब 20 परिवारों के लिए तीन फीट चौड़ी सड़क बनाकर सोलिंग कराई गई है. लेकिन पूर्वी हिस्से के लगभग 15 परिवार आज भी पगडंडी के भरोसे जीवन गुजार रहे हैं. एक ही टोले में आधे हिस्से तक सड़क और बाकी हिस्से की अनदेखी से लोगों में भेदभाव और उपेक्षा की भावना गहराती जा रही है. ग्रामीण पूछते हैं कि जब एक हिस्से में सड़क बन सकती है तो दूसरे हिस्से को सुविधा से क्यों वंचित रखा गया

ग्रामीणों ने सुनाई अपनी पीड़ा

ग्रामीण विकास मिश्रा ने कहा कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं. लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई हालचाल लेने नहीं आता. सड़क नहीं रहने से हमलोगों को रोज परेशानी झेलनी पड़ती है. दिनेश मिश्रा ने बताया कि बरसात में हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं. कीचड़ और पानी से रास्ता बंद हो जाता है, जिससे घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है. भवेश मिश्रा ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है. बारिश में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और उनका भविष्य अंधेरे में जा रहा है. राघव मिश्रा ने कहा कि यदि कोई बीमार पड़ जाए तो अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. कई बार मरीज को खाट पर उठाकर सड़क तक ले जाना पड़ता है.

विकास के दावों पर बड़ा सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार हर गांव तक सड़क पहुंचाने की बात करती है, तो फिर अवध मिश्र टोला जैसी छोटी बस्तियां क्यों उपेक्षित हैं. लोगों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, खेती-किसानी और सामाजिक जीवन में भी बड़ा बदलाव आएगा. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास के दावों के इस दौर में अवध मिश्र टोला के लोगों को आखिर पक्की सड़क कब नसीब होगी.

नहीं है जमीन उपलब्ध : मुखिया

इस बाबत कोरियापट्टी पूरब पंचायत के मुखिया राजेश कुमार ने बताया कि उनके द्वारा कई बार सड़क निर्माण की दिशा में पहल की गई. लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण सड़क निर्माण नहीं हो सका.

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RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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