मंडल कारा में बंद विचाराधीन कैदी की मौत, परिजनों ने महावीर चौक जाम कर किया प्रदर्शन

मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व मुआवजे की मांग
– मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व मुआवजे की मांग सुपौल. सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मंडल कारा सुपौल में बंद एक विचाराधीन कैदी की शनिवार की रात मौत हो गयी. रविवार को आक्रोशित परिजन व ग्रामीणों ने मुख्यालय स्थित महावीर चौक को जाम कर प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आगजनी कर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. करीब दो घंटे तक रहे जाम के कारण यातायात पूरी तरह ठप रहा. सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई, जिससे उक्त पथ पर आवागमन करने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. 18 महीने से मंडल कारा में बंदी था मृतक मृतक की पहचान पिपरा थाना क्षेत्र के पथरा वार्ड संख्या 02 निवासी महेंद्र सादा के 25 वर्षीय पुत्र सुबोध सादा के रूप में हुई है. जानकारी के अनुसार, सुबोध सादा एक हत्या मामले में पिछले करीब 18 महीनों से सुपौल मंडल कारा में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद था. बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद जेल प्रशासन द्वारा उसे आनन-फानन में सदर अस्पताल सुपौल लाया गया. जहां इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई. जेल प्रशासन पर लापरवाही का लगाया आरोप रविवार सुबह जैसे ही मौत की सूचना परिजनों को मिली, परिवार में कोहराम मच गया. गुस्साए परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में महावीर चौक पहुंच गए और सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और न्याय की मांग करते हुए टायर जलाकर आगजनी की. लोगों का कहना था कि यह मौत सामान्य नहीं है और इसमें साजिश या लापरवाही की आशंका है. परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुबोध सादा की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि जेल में पिटाई के कारण हुई है. उनका आरोप है कि जेल प्रशासन की मारपीट और लापरवाही के कारण ही उसकी जान गई. परिजनों ने यह भी कहा कि यदि समय पर समुचित इलाज मिलता, तो उसकी जान बच सकती थी. उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी जेल कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की. मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बतायी जा रही है. दो घंटे तक रहा जाम जाम की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित भीड़ अपनी मांगों पर अड़ी रही. जिला पदाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग करने लगे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम मनोहर कुमार साहू घटना स्थल पर पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से वार्ता की. करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद प्रशासन के आश्वासन पर लोगों ने जाम समाप्त किया. जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. जांच का दिया गया निर्देश : डीएम इस बाबत जिला पदाधिकारी सावन कुमार ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है. सदर एसडीएम व एसडीपीओ को जांच का निर्देश दिया गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.
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