लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय बना 'भूसा घर', बगल में चल रहे आंगनबाड़ी के मासूम बच्चे खुले में जाने को मजबूर
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 20 May 2026 12:28 PM
सामुदायिक शौचालय बना भूसा घर
स्वच्छ भारत मिशन को धरातल पर पलीता लगाने का एक बड़ा मामला सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड से सामने आया है. यहाँ कोसी बांध के भीतर शिवपुरी पंचायत में लाखों की लागत से बना दो कमरों का सामुदायिक शौचालय आज खुद बदहाली के आंसू बहा रहा है. आम जनता के उपयोग के लिए बना यह शौचालय अब मवेशियों का चारा (भूसा) रखने के काम आ रहा है.
किशनपुर (सुपौल) से जीवछ प्रसाद की रिपोर्ट:
निर्माण के बाद से ही ताला बंद, सरकारी राशि का हुआ दुरुपयोग
पूरा मामला किशनपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती शिवपुरी पंचायत के वार्ड नंबर 1 का है. सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यहाँ एक भव्य दो कमरों वाले सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण निर्माण के बाद से ही इसका संचालन शुरू नहीं हो सका. उचित रख-रखाव और सुरक्षा के अभाव में दबंगों और स्थानीय लोगों ने इस सरकारी भवन का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और वर्तमान में इसमें भारी मात्रा में मवेशियों का भूसा ठूंस कर रखा गया है, जिससे लाखों रुपये की सरकारी राशि पूरी तरह बर्बाद साबित हो रही है.
शौचालय के बगल में आंगनबाड़ी केंद्र, सेविका और बच्चों को भारी फजीहत
इस पूरे मामले का सबसे स्याह और गंभीर पहलू यह है कि इस बंद पड़े सामुदायिक शौचालय के ठीक बगल में ही सरकार का आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है. इस केंद्र पर प्रतिदिन गांव के दर्जनों छोटे-छोटे मासूम बच्चे प्रारंभिक शिक्षा और पोषाहार के लिए आते हैं. शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण इन मासूम बच्चों, केंद्र की सेविका और सहायिका को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है. बच्चों को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे न सिर्फ केंद्र के आसपास गंदगी फैल रही है बल्कि मासूम बच्चों में संक्रामक बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है.
कागजों तक सिमटी स्वच्छता योजना, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस बदहाल व्यवस्था को लेकर शिवपुरी पंचायत के ग्रामीणों में जिला प्रशासन और स्थानीय ब्लॉक प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है. स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि धरातल पर जांच न होने के कारण ही आज सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया है. ग्रामीणों ने मद्य निषेध और पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस मामले की जांच कर अविलंब शौचालय से अवैध कब्जा हटाया जाए, इसकी मरम्मत कराकर इसे चालू कराया जाए और आंगनबाड़ी के बच्चों व आम जनता के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव करने को विवश होंगे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










