जलनिकासी का नहीं हुआ समाधान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Apr 2017 6:08 AM (IST)
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उदासीनता. हल्की बारिश में ही शहर हो जाता है पानी-पानी सुपौल शहर की जमीनी सच्चाई यह है कि कई वार्डों में समस्याओं की क्रमबद्ध सूची तय करना मुश्किल है. यह स्थिति तब है जब जनसुविधाओं के विकास के मामले में सुपौल नगर परिषद ने सूबे में पहला स्थान प्राप्त किया है. सुपौल : हुजूर! भले […]
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उदासीनता. हल्की बारिश में ही शहर हो जाता है पानी-पानी
सुपौल शहर की जमीनी सच्चाई यह है कि कई वार्डों में समस्याओं की क्रमबद्ध सूची तय करना मुश्किल है. यह स्थिति तब है जब जनसुविधाओं के विकास के मामले में सुपौल नगर परिषद ने सूबे में पहला स्थान प्राप्त किया है.
सुपौल : हुजूर! भले ही आपके फाइलों में शहर का मौसम गुलाबी हो, मगर ये आंकड़े झूठे हैं दावा किताबी है. जमीनी सच्चाई तो यह है कि कई वार्डों में समस्याओं की क्रमबद्ध सूची तय करना मुश्किल है. यह स्थिति तब है जब जनसुविधाओं के विकास के मामले में सुपौल नगर परिषद ने सूबे में पहला स्थान प्राप्त किया है. राज्य सरकार के नगर विकास व आवास विभाग द्वारा इसे आदर्श नगर परिषद घोषित किया गया है. उत्कृष्ठ कार्यों के लिये तीन करोड़ रुपये का प्रोत्साहन राशि पंचम राज्य वित्त से प्रदान किया गया है. लेकिन हकीकत यह है कि हल्की बारिश में ही शहर पानी-पानी हो जाता है. इसे वार्ड वासियों का दुर्भाग्य कहें
या फिर आश्वासन पर जिंदा रखने की रहनुमाओं व अधिकारियों की कला, कि वार्ड नंबर सात समस्याओं की बोझ से कराह रहा है. कूड़े की नियमित सफाई नहीं होती है. जलनिकासी की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका है. नाले के ऊपर का प्लेट टूटा हुआ है सो अलग. न्यू कॉलोनी में कूडा-करकट, यत्र-तत्र फैली सड़ांध, मलमूत्र व गंदगी ने लोगों को नरक में जीने के लिये विवश कर दिया है. हालांकि वार्ड के लोग नप की मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद की ओर आशा भरी नजरों से टकटकी लगाये हुए हैं. हां, वार्ड पार्षद से जो कुछ भी हो रहा है वह जरूर कर रहे हैं.
सालों भर रहता है जलजमाव : लोगों ने बताया कि हमलोग नरक भोग रहे हैं. पूनम कुमारी ने बताया कि हम लोगों को बारहो मास जलजमाव का सामना करना पड़ता है. कोई देखने-सुनने वाला नहीं है. कहा कि धैर्य की भी एक सीमा हुआ करती है. लोगों ने बताया कि चुनाव के समय जरूर विकास की बातें होती है, लेकिन चुनाव के बाद वादे हैं वादों का क्या. वार्ड के लोगों ने बताया कि वार्ड नंबर सात के लोगों को अब तक जलजमाव की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पायी है. साल-दर-साल से नासूर बन चुकी जलजमाव की समस्या पर किसी का भी ध्यान नहीं जा पा रहा है. लोगों का आरोप है कि नगर परिषद वीआईपी लोगों का ख्याल रखता है. सड़कों की ना तो कायदे से सफाई होती है और ना ही जलजमाव की समस्या का समाधान हो पा रहा है. जलजमाव से उठती सड़ांध जहां महामारी की आशंका को पुख्ता करती है वहीं साफ-सफाई के मामले में बरती गयी उदासीनता का सबूत भी पेश करती है. लोगों ने बताया कि प्रशासनिक लापरवाही व नगर परिषद की उदासीनता के कारण जलजमाव की समस्या इस वार्ड की पहचान बन चुकी है. जो भी हो नप जनता से कर लेता है. लेकिन कर के हिसाब से सुविधा नहीं दे पाता. सड़क पर नाला का पानी बहता है. आवारा पशु सड़क पर घूमते नजर आते हैं. कूड़े की नियमित सफाई नहीं होती है सो अलग. वार्ड के क्रमश: आनंद कुमार झा, बबली, स्नेहा आदि जलजमाव की समस्या पर काफी तल्ख दिखे. वार्डवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही व नप की उदासीनता के कारण जलजमाव की समस्या इस वार्ड की पहचान बन चुकी है. बहरहाल, जलजमाव का निदान नहीं होने से वार्डवासी काफी परेशान हैं. गौरतलब है कि समस्याओं के बाबत नप के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार मिश्रा भी अब काफी गंभीर हैं. उन्होंने कहा है कि समस्याओं का समाधान कर लिया जायेगा.
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