दस्तावेज ढूंढ़ने में छूट रहे पसीने

Published at :28 Mar 2017 5:01 AM (IST)
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दस्तावेज ढूंढ़ने में छूट रहे पसीने

परेशानी. आरटीपीएस के प्रावधानों का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ अंचल कार्यालय में आरटीपीएस सेवा से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आवेदन दाखिल करना जितना मुश्किल है, उससे अधिक परेशानी संबंधित दस्तावेज को प्राप्त करना है. क्योंकि यहां दस्तावेज किसी कर्मी के माध्यम से […]

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परेशानी. आरटीपीएस के प्रावधानों का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

अंचल कार्यालय में आरटीपीएस सेवा से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आवेदन दाखिल करना जितना मुश्किल है, उससे अधिक परेशानी संबंधित दस्तावेज को प्राप्त करना है. क्योंकि यहां दस्तावेज किसी कर्मी के माध्यम से नहीं मिलता है, बल्कि कचरे के ढेर से खुद ही ढूंढ़ निकालना होता है.
सुपौल : सदर अनुमंडल के पिपरा प्रखंड में लोक सेवा अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. सरकार के दूरगामी योजनाओं में शुमार आरटीपीएस के माध्यम से तय मानव दिवस में कार्य का निष्पादन कर आम लोगों को न्याय दिलाने की सरकार की कोशिश है. जिसके तहत आय, आवासीय, जाति प्रमाणपत्र, दाखिल-खारिज आदि से संबंधित आवेदन प्राप्त किये जाते हैं और निर्धारित समय-सीमा में इन आवेदनों का निष्पादन करने का दायित्व अधिकारियों को सौंपा गया है.
सरकार की मंशा निश्चित तौर पर यही है कि इन सुविधाओं के लिए लोगों को बार-बार संबंधित कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े. लेकिन पिपरा अंचल कार्यालय को शायद न तो सरकार की मंशा समझ आती है और न ही कानून से जुड़े प्रावधान. ऐसा इसलिए है कि आरटीपीएस जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए लोगों को काफी मशक्कत करना पड़ रहा है. काफी फजीहत झेलने के बाद आम लोग यहां अपना आवेदन बमुश्किल जमा करा पाते हैं. वही निष्पादित होने के बाद संबंधित दस्तावेज की प्राप्ति लोगों के लिए भूंसा के ढेर से सुई ढूंढ़ निकालने के समान है.
…जो दस्तावेज चाहिए ढूंढ़ निकालो : अंचल कार्यालय में आरटीपीएस सेवा से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आवेदन दाखिल करना जितना मुश्किल है, उससे अधिक परेशानी संबंधित दस्तावेज को प्राप्त करना है. क्योंकि यहां दस्तावेज किसी कर्मी के माध्यम से नहीं मिलता है, बल्कि कचरे के ढेर से खुद ही ढूंढ़ निकालना होता है. दरअसल यहां एक कमरे में सभी आवेदनों के निष्पादन के उपरांत दस्तावेजों को फेंक दिया जाता है. आवेदक जब दस्तावेज प्राप्ति के लिए यहां पहुंचता है, उसे उस कमरे में दाखिल करा दिया जाता है. हद तो तब हो जाती है, जब आरटीपीएस कर्मी यह सुझाव देने से गुरेज नहीं करते हैं कि जो दस्तावेज चाहिए, ढूंढ़ निकालो. जाहिर है दस्तावेजों के ढेर से अपना दस्तावेज ढूंढ़ निकालना किसी के लिए भी आसान काम नहीं है. उसमें भी तब जब दस्तावेज फर्श पर बिखरे पड़े हो और अपने कागजात ढूंढ़ निकालने के लिए कागजों के ढेर पर ही खड़ा होना पड़े.
साहेब ! किससे मिलें, किसको करें शिकायत : आरटीपीएस काउंटर पर आवेदन जमा करने से लेकर वांछित दस्तावेज की प्राप्ति के लिए पिपरा अंचल में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. लेकिन परेशानी की शिकायत आखिर करें तो किससे. यह उनके लिए और भी अधिक परेशानी भरा सवाल हो जाता है. दरअसल पिपरा सीओ रमेश कुमार सिंह को ही सुपौल अंचल का भी अतिरिक्त प्रभार है. जिसके कारण जरूरत के हिसाब से वे पिपरा अंचल में समय नहीं दे पाते हैं. कमोबेश यहीं शिकायत सुपौल सदर प्रखंड के लोगों की भी है. सीओ के दो अंचल के प्रभार में रहने का खामियाजा आखिर में दोनों प्रखंड के लोगों को ही भुगतना पड़ता है. जिसके कारण दोनों अंचल कार्यालय के कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. कार्य के ससमय निष्पादित नहीं होने के कारण अब लोगों में आक्रोश पनपने लगा है.
दस्तावेज मिलने की नहीं है कोई गारंटी
यूं तो आरटीपीएस सेवा निर्धारित समयसीमा में आवेदनों के निष्पादन की गारंटी देती है. लेकिन पिपरा अंचल में आरटीपीएस सेवा से आवेदन निष्पादित होने के बाद प्राप्ति की कोई गारंटी नहीं है. ऐसे कई मामले भी हाल के दिनों में सामने आये हैं, जब दस्तावेज के लिए आवेदक महीनों से अंचल कार्यालय के चक्कर की शिकायत लिये वरीय अधिकारियों के समक्ष भी पहुंचा है. दरसअल इसकी मूल वजह यह है कि अपना कागजात ढूंढ़ने में कई बार लोग जब कागजों के ढेर में हाथ डालते हैं, कुछ कागजात क्षतिग्रस्त भी हो जाता है. एक ही दस्तावेज के साथ दो-तीन बार ऐसा हो जाने के बाद उसकी स्थिति उपयोग लायक नहीं रह जाती है. वही दस्तावेज को खोज निकालने की परेशानी भी लोगों को कई बार वांछित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का कारण बनती है.
लंबे समय से वांछित दस्तावेज नहीं मिलने के कारण लोगों में आक्रोश पनप रहा था. जिसके कारण मेरे प्रयास से ही आम लोगों को दस्तावेज सुपुर्द कर दिया गया है और इसकी निगरानी आरटीपीएस कर्मी करते हैं. जमीन पर दस्तावेज बिखरे रहने की जानकारी नहीं है. जानकारी प्राप्त कर अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी.
ज्योति गामी, बीडीओ, पिपरा
कमरे में कार्यालय कॉपी बिखरी पड़ी है. फरवरी माह से अब तक मेरे द्वारा स्वयं 12 हजार से अधिक आवेदकों को वांछित दस्तावेज उपलब्ध कराया गया है. मामला पूरी तरह भ्रामक और सत्य के परे है.
रमेश कुमार सिंह, अंचलाधिकारी, पिपरा
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