सड़कों पर सजती हैं दुकानें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Mar 2017 5:09 AM (IST)
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परेशानी. अतिक्रमण की चपेट में है सुपौल शहर प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिला मुख्यालय स्थित सड़कों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है. सुपौल : शहर को सुंदर, सुसज्जित व विकसित करने के लिये नगर परिषद द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं. जिसमें सड़क के किनारे लगे फूटपाथ पर की गयी सोलिंग व रात के अंधियारों को […]
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परेशानी. अतिक्रमण की चपेट में है सुपौल शहर
प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिला मुख्यालय स्थित सड़कों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है.
सुपौल : शहर को सुंदर, सुसज्जित व विकसित करने के लिये नगर परिषद द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं. जिसमें सड़क के किनारे लगे फूटपाथ पर की गयी सोलिंग व रात के अंधियारों को मिटाने के लिये जगह-जगह पोलों पर लगाये गये एलइडी लाइट शहर को सौंदर्यीकरण की दिशा में नगर परिषद द्वारा किये गये प्रयास को दर्शाता है. लेकिन अतिक्रमणकारियों व प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिला मुख्यालय स्थित सड़कों का हाल वही पुराना है. जहां सड़क पर दुकान है,
या दुकान के बीच सड़क इसका आकलन करना मुश्किल है. चाहे वह लोहिया नगर चौक हो या स्टेशन चौक या महावीर चौक या शहर की मुख्य सड़कें सभी जगहों पर अमूमन रोज ऐसी स्थिति बन जाती है. अतिक्रमणकारियों की वजह से सड़के इतनी सकरी हो गयी है, कि जाम की समस्या से जूझना शहर के लोगों की नियति बन गयी है.
नप की बंदोबस्ती है बड़ा कारण
पूर्व में नगर परिषद द्वारा दुकानदारों को नाले पर दुकानों की बंदोबस्ती की गयी थी. जिसे लगभग तीन वर्ष पूर्व अतिक्रमण की समस्या से निजात दिलाने के लिये तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा नोटिस जारी किया गया था. जिसके लिये समय सीमा भी निर्धारित की गयी थी. इसी दौरान जिलाधिकारी का तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया. जिसके बाद अब तक इस समस्या के स्थायी निदान की दिशा में विभाग ने पहल की कोशिश नहीं की.
कहते हैं अधिकारी
समस्या से निजात दिलाने के लिए इस बार बोर्ड की बैठक में कई ठोस निर्णय लिये गये हैं. जिस पर कार्य चल रहा है. शीघ्र ही वेंडिंग जोन तैयार कर फुटकर विक्रेताओं की समस्या का निदान किया जायेगा.
सुशील मिश्रा, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, सुपौल
कहते हैं शहरवासी
स्थानीय राकेश कुमार, मनोज कुमार, रणधीर कुमार ठाकुर, पवन कुमार, सुरेश कुमार, मोहित कुमार, राजा कुमार आदि कहते हैं अतिक्रमण के कारण शहर में सड़कें संकीर्ण हो चुकी हैं. वही पार्किंग के लिए भी शहर के किसी भी सड़क में पर्याप्त स्थल नहीं है. जिसके कारण लोगों को वाहन परिचालन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. आलम यह है कि कभी-कभार तो पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. लोगों की मानें तो प्रशासन द्वारा कई बार अतिक्रमण मुक्ति अभियान भी शहर में चलाया गया है. लेकिन हर बार नतीजा ढाक के तीन पात के समान हो जाता है. अभियान के कुछ दिनों में ही स्थिति जस की तस हो जाती है. जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.
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