पहले खोदा, अब भर रहे

Updated at :22 Feb 2017 5:38 AM
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पहले खोदा, अब भर रहे

गड़बड़ी. समाहरणालय के दो तालाबों की हुई थी खुदाई लाखों की लागत से वर्षों पूर्व खोदे गये दो तालाबों को भरने की कवायद हो रही है. एक तालाब, तो आधा भर भी दिया गया. अधिकारियों को भी इस बात का पता नहीं है कि आखिर मिट्टी भरायी का काम किस योजना मद से हो रहा. […]

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गड़बड़ी. समाहरणालय के दो तालाबों की हुई थी खुदाई

लाखों की लागत से वर्षों पूर्व खोदे गये दो तालाबों को भरने की कवायद हो रही है. एक तालाब, तो आधा भर भी दिया गया. अधिकारियों को भी इस बात का पता नहीं है कि आखिर मिट्टी भरायी का काम किस योजना मद से हो रहा.
सुपौल : छह फरवरी से यहां डीएम वेश्म के पिछले हिस्से में मिट्टी भरायी और समतलीकरण का काम चल रहा है, लेकिन मानकों के विरुद्ध यहां योजना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है. खास बात यह है कि लाखों की लागत से वर्षों पूर्व खोदे गये दो तालाब को भी भरा जा रहा है. इसमें से एक तालाब तो आधा भर भी दिया गया है. समाहरणालय जहां जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से लेकर तमाम प्रशासनिक अधिकारियों का कार्यालय है
और इन अधिकारियों पर पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेवारी होती है. अधिकारियों को भी इस बात का पता नहीं है कि मिट्टी भरायी का कामकिस योजना मद से हो रहा है. मिट्टी भरायी के इस अवैध कार्य में भी संवेदक की मनमानी चरम पर है. लोग सवाल कर रहे हैं कि यह तालाब भरना ही था, तो खोदा क्यों गया.
समाहरणालय परिसर में मिट्टी भरायी का कार्य बीत एक पखवारे से चल रहा है, लेकिन किसी को भी योजना मद की जानकारी नहीं है. इस कार्य को लेकर समाहरणालय परिसर में कहीं भी कोई योजना बोर्ड तक नहीं लगा है और न ही किसी अधिकारी द्वारा इस कार्य को रोकने का प्रयास किया गया है. जिला विकास शाखा के प्रधान लिपिक के अनुसार यह कार्य उनकी शाखा से नहीं हो रहा है, जबकि डीआरडीए निदेशक व जिला योजना पदाधिकारी ने भी योजना मद की जानकारी से इनकार किया है.
यहां खास बात यह है कि सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी संवेदक को कार्य आरंभ करने के पूर्व ही संबंधित योजना का बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है. जिसमें योजना मद में स्वीकृत राशि, संबंधित विभाग, संवेदक का नाम, योजना का नाम आदि मूलभूत जानकारी उपलब्ध कराना होता है. यह प्रावधान योजना क्रियान्वयन में पारदर्शिता के मद्देनजर पूर्व से ही लागू है, लेकिन समाहरणालय में ही जब नियम-कायदों की धज्जियां उड़ रही हैं, तो जिले के अन्य हिस्सों में संवेदक की मनमानी और विभागीय कार्यशैली को स्वत: समझा जा सकता है.
पहले खोदा तालाब अब हो रही है भरायी
कोसी का इलाका ही जल संपदा के लिए जाना जाता है, लेकिन इस संपदा का और भी अधिक प्रतिफल मिले, साथ ही जल समृद्धि कायम रहे, इसके लिए मनरेगा के तहत गांव-गांव में तालाब खुदवाई जा रही है. समाहरणालय परिसर में भी वर्षों पूर्व मनरेगा के माध्यम से ही दो तालाब की खुदाई करवायी गयी थी. जिसमें उस वक्त लाखों रुपये का खर्च आया था. दक्षिणी हिस्से के तालाब को आधा भर दिया गया है, जबकि उत्तरी तालाब के समीप भी मिट्टी भरायी का कार्य मुहाने तक पहुंच चुका है.
किस योजना मद से मिट्टी भरायी का कार्य चल रहा है, इसकी जानकारी नहीं है. डीआरडीए की यह योजना नहीं है. यह कार्य करीब 15 दिनों से चल रहा है.
विश्वजीत हेनरी, डीआरडीए निदेशक, सुपौल
योजना शाखा से केवल मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास अथवा सांसद योजना से स्वीकृत कार्य होते हैं. समाहरणालय में मिट्टी भरायी का कार्य किस योजना से चल रहा है, इसकी जानकारी नहीं है. योजना बोर्ड कहां है, इसकी भी जानकारी नहीं है.
विधान चंद्र राय, जिला योजना पदाधिकारी, सुपौल
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