किस्मत ने दिया धोखा, अब सरकार पर टिका है भरोसा

सुपौल : वर्ष 2008 में कोसी के इलाके में तबाही मचाने वाली कुसहा त्रासदी ने दिव्यांग सुमन के सिर से उसके माता-पिता का साया छीन लिया. दर्द कुछ कम हुआ जब सहरसा की सामाजिक संस्था आकांक्षा अनाथ आश्रम ने सुमन को गोद लिया. संस्था ने आठ वर्षों तक उसकी पढ़ाई करायी और गत 22 जनवरी […]
सुपौल : वर्ष 2008 में कोसी के इलाके में तबाही मचाने वाली कुसहा त्रासदी ने दिव्यांग सुमन के सिर से उसके माता-पिता का साया छीन लिया. दर्द कुछ कम हुआ जब सहरसा की सामाजिक संस्था आकांक्षा अनाथ आश्रम ने सुमन को गोद लिया. संस्था ने आठ वर्षों तक उसकी पढ़ाई करायी और गत 22 जनवरी को उसकी शादी करवा दी गयी,
लेकिन कहते हैं कि बदकिस्मती इतनी जल्दी पीछा नहीं छोड़ती है और ऐसा ही कुछ सुमन के साथ भी हुआ. सुमन दोनों पैर से दिव्यांग है. वही उसका पति सहरसा में रिक्शा चलाता है और रैन बसेरा में रह कर गुजारा करता है. हालांकि वह मूल रूप से सुपौल जिला के सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बैरो पंचायत स्थित झंझारपुर का निवासी है. यही कारण है कि शादी के बाद यह जोड़ा अपने घर लौटा है, लेकिन समस्या यह है कि सुमन के पति भानू यादव का यहां डेढ़ कट्ठा पुस्तैनी जमीन है. जमीन गड्ढे में है. लिहाजा इसमें घर बनाना मुमकिन नहीं है.
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