बाजार समिति के कंडम गोदाम में रहते हैं जवान

Updated at :16 Feb 2017 5:21 AM
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बाजार समिति के कंडम गोदाम में रहते हैं जवान

उदासीनता. खुद असुरक्षित हैं जनता के रखवाले पुलिस केंद्र को अभी तक अपना भवन नसीब नहीं हो सका है. हालांकि नये पुलिस केंद्र भवन निर्माण को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है. वर्तमान में पुलिस केंद्र बाजार समिति के खस्ताहाल गोदाम में संचालित है. सुपौल : सुपौल को जिला का दर्जा मिले ढाई दशक से […]

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उदासीनता. खुद असुरक्षित हैं जनता के रखवाले

पुलिस केंद्र को अभी तक अपना भवन नसीब नहीं हो सका है. हालांकि नये पुलिस केंद्र भवन निर्माण को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है. वर्तमान में पुलिस केंद्र बाजार समिति के खस्ताहाल गोदाम में संचालित है.
सुपौल : सुपौल को जिला का दर्जा मिले ढाई दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक पुलिस केंद्र को अपना भवन नसीब नहीं हो सका है. हालांकि नये पुलिस केंद्र भवन निर्माण को लेकर कवायद आरंभ हो चुकी है, लेकिन फिलहाल जो हालात हैं, उसमें पुलिस केंद्र बाजार समिति के जर्जर गोदाम में संचालित है. आवश्यक सुविधाओं से वंचित पुलिस के जवान इन जर्जर गोदामों में रात बिताने के बाद ड्यूटी करने को विवश हैं. इसका असर उनके कामकाज पर भी पड़ रहा है. बहरहाल नये पुलिस केंद्र भवन का निर्माण सुपौल-सहरसा पथ पर कर्णपुर गांव के समीप कराया जा रहा है, लेकिन कार्य की मंथर गति से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में भी पुलिस कर्मियों की समस्या का समाधान नहीं होगा.
जवानों के मनोबल पर पड़ रहा प्रभाव : सीमावर्त्ती जिला होने के बावजूद यहां पुलिस केंद्र में सुविधाओं का अभाव है. इसके कारण पुलिस जवानों का मनोबल टूट रहा है और उनके काम पर भी इसका असर ड्यूटी के दौरान देखने को मिलता है. दिन भर ड्यूटी करने बाद रात को आराम के लिए माकुल स्थिति नहीं रहना ही जवानों का परेशानी का कारण है. विशेष तौर पर बारिश के दिनों में छत का टपकता पानी यहां टिकना दूभर कर देता है. गौरतलब है कि यहां फिलहाल 200 पुलिस पदाधिकारी सहित 54 महिला जवान व 732 पुरुष जवान मिला कर कुल 986 पुलिस इस जर्जर बाजार समिति के गोदाम में रहते हैं. हैरत की बात तो यह है कि इन पुलिस कर्मियों के रात्रि विश्राम के लिए केंद्र में केवल 100 बेड ही उपलब्ध हैं.
शुद्ध पेयजल की नहीं है व्यवस्था : वर्तमान में पुलिस केंद्र में पेयजल सुविधा के नाम पर महज छह चापाकल अवस्थित है, लेकिन इनमें से भी तीन चापाकल ही चालू अवस्था में है. किसी भी चापाकल में शुद्धि के लिए यंत्र नहीं है. इसके कारण आयरनयुक्त पानी का प्रयोग ही विवशता है. पीने के लिए पुलिस कर्मी बाहर से पानी खरीदते हैं और उसी से भोजन भी तैयार किया जाता है. इसके अलावा पेयजल आपूर्ति के लिए यहां लगा नलका भी शोभा की वस्तु बनी हुई है. यही कारण है कि पुलिस केंद्र में स्नान के लिए भी कर्मियों को कतार में खड़ा हो कर नंबर लगाना पड़ता है.
शौचालय जाने के लिए भी लगती है कतार : पुलिस केंद्र में रहने वाले कर्मियों के लिए अबतक शौचालय की समुचित व्यवस्था भी नहीं हो सकी है. पुलिस केंद्र में पुरुष जवानों के लिए 10 शौचालय अवस्थित हैं. लेकिन इनमें से तीन ही चालू अवस्था में हैं और उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है. वही महिला कर्मियों के लिए हाल के दिनों में ही पांच नये शौचालय व स्नानागार का निर्माण कराया गया है. बावजूद शौचालय जाने के लिए यहां पुलिस कर्मियों को कतार में लगना विवशता बनी हुई है. पुलिस कर्मियों की मानें तो चालू शौचालय भी अक्सर जाम हो जाता है. जिसके कारण कर्मियों को बिना शौच के ही ड्यूटी पर जाना पड़ता है.
स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव : पुलिस केंद्र में पुलिस कर्मियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. हाल के दिनों में विभाग द्वारा दिन भर के लिए एक चिकित्सक को पदस्थापित किया है, जो शाम के समय अपने घर चले जाते हैं. जबकि रात के समय में किसी पुलिस जवान के बीमार पड़ने पर उसका उपचार सदर अस्पताल अथवा किसी निजी क्लिनिक में होता है. पुलिस जवानों ने बताया कि यहां सरकारी एंबुलेंस भी नहीं है. जिसके कारण कई बार परेशानी और भी अधिक बढ़ जाती है.
कहते हैं पुलिस मेंस एसोसिएशन के अधिकारी
पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष उदल पासवान व केंद्रीय सदस्य हवलदार हैदर अली खान ने बताया कि ने बताया कि पुलिस केंद्र में सुविधाओं का अभाव है. हालात सूबे के सभी पुलिस केंद्रों से बदतर हैं. एंबुलेंस, सुलभ शौचालय, स्वच्छ पेयजल व एक हजार बेड के बाबत जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर वरीय पुलिस अधिकरियों को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया है, लेकिन अधिकारियों द्वारा एसोसिएशन की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इसके कारण पुलिस कर्मियों का जीवन कष्ट में गुजर रहा है.
सुपौल-सहरसा मुख्य पथ पर नये पुलिस केंद्र निर्माण का कार्य प्रगति पर है. जिला के स्थापना के समय से पुलिस केंद्र बाजार समिति की जमीन में स्थापित की गयी थी. समुचित देखरेख के अभाव में परेशानी आयी है, लेकिन नये पुलिस केंद्र को सभी सुविधाओं सुसज्जित किया जा रहा है. नया पुलिस केंद्र मॉडल केंद्र के तर्ज पर तैयार किया जा रहा है.
डाॅ कुमार एकले, पुलिस अधीक्षक, सुपौल
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