1988 में आइआरएस चुने गये थे हरिवंश

Updated at :08 Feb 2017 3:13 AM
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1988 में आइआरएस चुने गये थे हरिवंश

कार्रवाई. इनकम टैक्स आयुक्त के आवास पर छापा महिषी : एक किसान पिता के आयकर आयुक्त बेटा बनने तक जीवन में वह कई उतार चढ़ाव को देख चुके हैं. आरापट्टी के ब्राह्मण परिवार के स्व शरण चौधरी के छह पुत्रियों के बाद जिस मेधावी पुत्र ने जन्म लिया उसके जन्म के वक्त जितनी खुशी गांववालों […]

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कार्रवाई. इनकम टैक्स आयुक्त के आवास पर छापा

महिषी : एक किसान पिता के आयकर आयुक्त बेटा बनने तक जीवन में वह कई उतार चढ़ाव को देख चुके हैं. आरापट्टी के ब्राह्मण परिवार के स्व शरण चौधरी के छह पुत्रियों के बाद जिस मेधावी पुत्र ने जन्म लिया उसके जन्म के वक्त जितनी खुशी गांववालों में रही होगी. उससे कई गुणा अधिक दुख सोमवार को आरापट्टी में कोसी दियारा क्षेत्र के अभिभावकों के लिए एक उदाहरण बने चुके दिल्ली में पदस्थापित आयकर आयुक्त हरिवंश कुमार चौधरी के घर मंगलवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो की टीम द्वारा छापेमारी की खबर सुनने के बाद हुई.
गांव में उनके परिवार के सदस्यों एवं आसपास के लोगों ने बताया कि एक साधारण किसान के बेटे ने काफी कठिनाईयों का सामना करने के बाद जमीन से बुलंदी के आसमान तक की यात्रा की थी. जो सीबीआई के छापे के बाद एकबारगी रेत के बने घरोंदे की तरह अचानक से धराशायी सी हो गयी.
टीएनबी कॉलेज में की पढ़ाई
एक समय था जब पिता अपने पुस्तैनी 25 एकड़ जमीन के अधिकांश भाग अपनी छह बेटियों की शादी में बेच चुके थे. बेटे की पढ़ाई मैट्रिक तक महिषी स्थित आशोदेवी प्यारे झा उच्च विद्यालय से हुई थी. मेधावी छात्र होने के कारण तत्कालीन विज्ञान के अध्यापक हरिपद मिश्र के काफी चहेते माने जाते थे.
मैट्रिक के बाद आगे की शिक्षा के लिए इनका दाखिला भागलपुर के टीएनबी कॉलेज में कराया गया था. 1982 में आइएससी की परीक्षा पास की. इसके बाद ही इनका चयन देश के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी पढ़ाई के लिए हुआ और उन्होंने आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया. बस यहीं से उनके सीढ़ी दर सीढ़ी उन्हें सफलता मिलनी शुरू हो गयी.
आइआइटी की परीक्षा पास करते ही 1988 में उनका चयन भारतीय राजस्व अधिकारी के रूप में हुआ. बतौर आयकर आयुक्त उनका पहला योगदान मुम्बई में हुआ. इसके बाद बरौदा, सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली तक के अपने सेवा काल में उन्होंने अपने सगे संबंधियों के साथ देखे गए. पिता के द्वारा बेची गई सारी पुस्तैनी जमीनों को फिर से खरीदा. इसके अतिरिक्त भी गांवों में मकान, मंदिर बनवाए एवं कई एकड़ जमीन में बगीचा लगवाया. महिषी में पूर्व में मिली जमीन पर 54 कमरों का मार्केट कॉम्पेल्स बनवाया व सहरसा सहित कई शहरों में मकान खरीदा. इनके दोनो बेटों में से एक आइआइटी से तकनीकी पढ़ाई पूर्ण कर चुका है.
जबकि दूसरा आइआइटी से ही तकनीकी पढ़ाई कर रहा है. लेकिन आय से अधिक संपति अर्जित करने के मामले में फंसने और सीबीआइ जांच के बाद सब कुछ समाप्त सा हो गया. लोग इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बता रहे हैं. कहते हैं कि अवैध रूप से धन अर्जित करनेवाले के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई पहले होनी चाहिए थी.
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