व्यवस्था के संचालक ही करे मनमरजी तो कैसे हो व्यवस्था में सुधार

Updated at :26 Aug 2016 2:53 AM
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व्यवस्था के संचालक ही करे मनमरजी तो कैसे हो व्यवस्था में सुधार

सुपौल : सदर प्रखंड क्षेत्र में संचालित प्राथमिक विद्यालय हरदी दुर्गा स्थान की पठन पाठन व्यवस्था बदतर बनी हुई है. विद्यालय प्रबंधन की मनमरजी पर संचालन हो रहे विद्यालय का पठन पाठन की स्थिति विभागीय व्यवस्था की पोल खोल रही है. वहीं विद्यालय में संचालित अन्य योजनाएं भी कुव्यवस्था का भेंट चढ़ा हुआ है. विद्यालय […]

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सुपौल : सदर प्रखंड क्षेत्र में संचालित प्राथमिक विद्यालय हरदी दुर्गा स्थान की पठन पाठन व्यवस्था बदतर बनी हुई है. विद्यालय प्रबंधन की मनमरजी पर संचालन हो रहे विद्यालय का पठन पाठन की स्थिति विभागीय व्यवस्था की पोल खोल रही है. वहीं विद्यालय में संचालित अन्य योजनाएं भी कुव्यवस्था का भेंट चढ़ा हुआ है. विद्यालय प्रबंधन की कुव्यवस्था के कारण नामांकित छात्रों को ना तो गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है

और ना ही शिक्षा व्यवस्था का महत्वाकांक्षी योजना मिड डे मिल का लाभ मानक अनुरूप छात्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है. यहां तक कि उक्त विद्यालय से अक्सर कई शिक्षक गायब रहते है. साथ ही नामांकित बच्चों का उपस्थिति अनुपात तकरीबन दस फीसदी का होता है. जबकि एमडीएम पंजी व छात्रोपस्थिति पंजी पर मनमाने तरीके से छात्रों की उपस्थिति दर्ज करायी जाती है.

गौरतलब हो कि इस विद्यालय को पूर्व में अपनी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाया था. जिस कारण विभाग द्वारा भवन निर्माण कार्य नहीं कराया गया. विद्यालय की व्यवस्था बेहतर बनाये जाने को लेकर जिले में विभागीय निर्देशानुसार कई भूमि व भवनहीन विद्यालयों को समीप स्थित विद्यालयों में शिफ्ट कर दिया गया.
ताकि बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सके. इसी नीति के तहत उक्त विद्यालय को वर्ष 2014 में मध्य विद्यालय अजान में शिफ्ट करा दिया गया. लेकिन विद्यालय प्रभारी के उदासीन रवैये के कारण समुचित तरीके से पठन पाठन का कार्य नहीं कराया जा रहा है.
कई माह बीतने के बाद भी नहीं बनाया जा सका भवन : मालूम हो कि उक्त विद्यालय को भूमि उपलब्ध होने के उपरांत विभाग द्वारा भवन निर्माण को लेकर राशि का आवंटन दिया गया. लेकिन संवेदक विद्यालय प्रधान की लापरवाही के कारण कई माह बीत जाने के बाद भी भवन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं कराया जा सका है. स्थानीय लोगों की माने तो भवन निर्माण कार्य में संवेदक द्वारा गुणवत्ता का ख्याल नहीं किया जा रहा है.
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग कराया जा रहा है. बताया कि विद्यालय प्रभारी का विभागीय सांठगांठ रहने के कारण उक्त कार्य को मनमरजी तरीके से अंजाम दिया जा रहा है.
नामांकन 136 व उपस्थित मात्र 13 बच्चे
सरकार द्वारा भले ही शिक्षा के अलख को जगाने के उद्देश्य से आवश्यकता अनुरूप विद्यालय संचालित करायी गयी है. लेकिन इस विद्यालय के प्रधान के मनमानी के कारण विद्यालय के पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. उक्त विद्यालय में नामांकित 136 छात्र – छात्राओं के पठन पाठन को लेकर चार शिक्षकों को पदस्थापित किया गया है.
लेकिन विद्यालयी कुव्यवस्था के कारण शनिवार को महज 13 बच्चे ही उपस्थित पाये गये. साथ ही दो शिक्षक विद्यालय में उपस्थित थे. अब सवाल उठना लाजिमी है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा एक साथ दो शिक्षकों के छुट्टी की स्वीकृति किस प्रकार से दी गयीं
कहते हैं विद्यालय प्रधान
समस्या के बाबत पूछे जाने पर विद्यालय प्रधान संतोष कुमार ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा लगाये जा रहे आरोप निराधार है. वे मानक अनुरूप विद्यालय भवन निर्माण कार्य करवा रहे हैं. बताया कि पोषक क्षेत्र की दूरी अधिक रहने के कारण बच्चों की उपस्थिति नहीं हो पा रही है. लेकिन जब उनसे छात्रोपस्थिति पर उपस्थिति अधिक होने, शनिवार के पूर्वाह्न 11 बजे तक हाजिरी नहीं लगाये जाने सहित अन्य समस्याओं के बारे में पूछा गया तो वे इसका जवाब देना मुनासिब नहीं समझे.
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