धोखाधड़ी. बिना काम किये उठाते हैं वेतन, नया रहस्य हुआ उजागर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Mar 2016 3:55 AM

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अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण लोगों की आंखों में धूल झोंक कर प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये प्राप्त कर रहे हैं वेतन जिले में पदस्थापित अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण द्वारा बिना कोई काम किये घर बैठे वेतन लेने के मामले में एक नया रहस्य उजागर हुआ है. ये जहां अवैध तरीके से वेतन भुगतान […]

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अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण लोगों की आंखों में धूल झोंक कर प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये प्राप्त कर रहे हैं वेतन

जिले में पदस्थापित अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण द्वारा बिना कोई काम किये घर बैठे वेतन लेने के मामले में एक नया रहस्य उजागर हुआ है. ये जहां अवैध तरीके से वेतन भुगतान प्राप्त कर रहे हैं, वहीं इनकी पदस्थापना भी अवैध है.
सुपौल : जिले के शिक्षा विभाग में सब कुछ माइनेज सिस्टम के तहत चलता है. यहां नियमों की नहीं बल्कि अधिकारियों की अपनी मनमर्जी चलती है.चाहे वह शिक्षक व शिक्षिकाओं को घर बैठे वेतन देने का मामला हो अथवा अधिकारियों के बिना काम किये लाखों रुपये वेतन मद में पाने का. अधिकारियों को न तो विभागीय नियम की परवाह है
और ना ही कानून का भय. यही वजह है कि ये अधिकारी मनमर्जी के तहत कार्य को अंजाम देकर इससे साफ बच निकलते हैं और उनका बाल भी बांका नहीं होता है. तहूं लूटअ हमहूं लूटी लूटै के आजादी बा के तर्ज पर शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्य कर रहे हैं, जो एक दूसरे के पूरक बन कर उनकी गलतियों को छुपाते हैं और विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं.
जिले में पदस्थापित अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण द्वारा बिना कोई काम किये घर बैठे वेतन लेने के मामले में एक नया रहस्य उजागर हुआ है. ये जहां अवैध तरीके से वेतन भुगतान प्राप्त कर रहे हैं,
वहीं इनकी पदस्थापना भी अवैध है. विभाग द्वारा श्री हारुण को अवकाश रक्षित पदाधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी सुपौल के पद पर किया गया है. जबकि इस नाम का कोई पद ही स्वीकृत नहीं है. इससे यह स्पष्ट होता है कि श्री हारुण लोगों की आंखों में धूल झोंक कर प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये वेतन प्राप्त कर रहे हैं.
विभाग द्वारा 13 पद किये गये हैं स्वीकृत
बिहार सरकार मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी संकल्प संख्या 788 दिनांक 15 जून 2011 के द्वारा जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का 13 पद स्वीकृत किया गया है. इसके तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी का एक पद जिनका ग्रेड पे 7600 रुपये है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के पांच पद जिनका ग्रेड पे 6600 रुपये है.कार्यक्रम पदाधिकारी का छह पद जिनका ग्रेड पे 4800 रुपये है. तथा अवकाश रक्षित पदाधिकारी का एक पद जिनका ग्रेड पे 4800 रुपये है.सबसे अहम बात यह है कि मो हारुण की पदस्थापना जिले में अवकाश रक्षित पदाधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में की गयी है जबकि इस नाम का पद स्वीकृत ही नहीं है.
खबर प्रकाशित होने के बाद देखे गये मो हारुण
अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद सोमवार को अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण सुपौल में देखे गये.जानकारी अनुसार अखबार में समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला पदाधिकारी बैद्यनाथ यादव ने इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए मो हारुण की खोज की.जिसके बाद उन्हें घर से बुलाया गया. सोमवार को श्री हारुण जिला पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित भी हुए.हालांकि उन्हें कौन सा काम सौंपा गया है, इसकी जानकारी नहीं मिल पायी है.
गौरतलब है कि अवकाश रक्षित पदाधिकारी मो हारुण जिले में योगदान के बाद से बिना काम किये करीब एक लाख रुपये प्रति माह वेतन का लाभ ले रहे हैं. प्रभात खबर द्वारा इस बाबत सोमवार के अंक में खबर प्रकाशित की गयी.जिसके बाद श्री हारुण का लोगों को दर्शन
हो पाया.
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