सिमट रहा लैंड लाइन फोन का वजूद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Feb 2016 4:39 AM
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बड़े पैसे वाले व्यवसायी वर्ग या जमींदारों के घरों की शान होती थी टेलिफोन मोबाइल में मिलने वाली सुविधा और इसकी मोबिलिटी लैंड लाइन फोन के घटते प्रचलन का माना जा रहा है प्रमुख कारण सुपौल : एक जमाना था जब घरों में टेलिफोन लगाना सामाजिक प्रतिष्ठा की बात होती थी़ गांव व मोहल्ले के […]
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बड़े पैसे वाले व्यवसायी वर्ग या जमींदारों के घरों की शान होती थी टेलिफोन
मोबाइल में मिलने वाली सुविधा और इसकी मोबिलिटी लैंड लाइन फोन के घटते प्रचलन का माना जा रहा है प्रमुख कारण
सुपौल : एक जमाना था जब घरों में टेलिफोन लगाना सामाजिक प्रतिष्ठा की बात होती थी़ गांव व मोहल्ले के कुछेएक घरों में ही लैंड लाइन टेलिफोन हुआ करता था़ बड़े पैसे वाले व्यवसायी वर्ग या जमींदारों के घरों की शान होती थी टेलिफोन. जब फोन की घंटी ट्रिन- ट्रिन बजती थी तो फोन मालिक के चेहरे का गुरुर भी बढ़ जाता था़ रईस किस्म के लोग एक से बढ़ कर एक महंगे व डिजाइनर फोन का इस्तेमाल करते थे़
हैंड फ्री व कॉर्ड लेस टेलिफोन का प्रचलन भी बढ़ा था़ जो बात करने के अलावा ड्राइंग रूम की शोभा भी बढ़ाता था़ बड़े पूंजी पति तो विदेशों से इंपोर्टेड फोन का इस्तेमाल करते थे़ ताकि टेलिफोन देख कर ही उनकी शानो शौकत का अंदाजा लगाया जा सके़ तब टेलिफोन आम लोगों के पहुंच से काफी दूर की चीज थी़ आलम यह था कि लोग अपने दूर-दराज के सगे संबंधियों को अपने पड़ोसी का फोन नंबर उपलब्ध कराते थे़ ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें इस नंबर पर संदेश मिल सके़ ऐसे लोगों के फोन आने पर फोन मालिक द्वारा उन्हें खबर दे कर बात करायी जाती थी़ बेचारा पड़ोसी इस फोन का इस्तेमाल कर फोन मालिक के प्रति कृतज्ञता प्रगट करता था़ लेकिन मोबाइल के मोबाइल युग आने के बाद लैंड लाइन फोन अब अतीत की यादों में सिमटने लगा है़ मोबाइल में मिलने वाली सुविधा और इसकी मोबिलिटी लैंड लाइन फोन के घटते प्रचलन का प्रमुख कारण माना जाता है़
ब्रॉड बैंड तक सिमट रहा टेलिफोन
मोबाइल युग प्रारंभ होने के साथ ही टेलिफोन लाइन का सिमटता वजूद आम बात हो चुकी है़ अब स्थिति यह है कि आपसी बातचीत के लिए शायद ही कोई टेलिफोन का उपयोग कर रहा है़ टेलिफोन लाइन के साथ उपलब्ध ब्रॉड बैंड इंटरनेट सेवा की वजह से ही अब फोन का अधिकांश प्रयोग होता है़ हालांकि दूर संचार सेवा में जुटी कंपनियां इंटरनेट हेतु अब थ्री जी व फोर जी जैसी सुविधा जनक व तेज इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रही है़ परिणाम है कि ब्रॉड बैंड को भी अब बाजार की तेज रफ्तार इंटरनेट सेवाओं से टक्कर लेना पड़ रहा है़
टेलिफोन को लोकप्रिय बनाने में जुटा विभाग
लैंड लाइन टेलिफोन के मिटते वजूद ने भारत संचार निगम लिमिटेड जैसी दूर संचार कंपनियों के कान खड़े कर दिये है़ं यही वजह है कि टेलिफोन उपभोक्ताओं के लिए नये-नये ऑफर की घोषणा की जा रही है़ वही सुविधाओं में भी बढ़ोतरी की जा रही है़ बीएसएनएल के सहायक अभियंता लखिंद्र मुरमुर ने बताया कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए टेलिफोन सेवा में कई सुविधाएं बढ़ायी गयी है़ पूर्व की तुलना में फोन कनेक्शन का चार्ज भी कम किया गया है़ वहीं रात नौ बजे से सुबह सात बजे तक किसी भी फोन व मोबाइल पर फ्री में कॉल करने की सुविधा प्रदान की गयी है़ बताया कि नया फोन लगाना भी अब आसान हो गया है़ मात्र रजिस्ट्रेशन फी जमा कर टेलिफोन कनेक्शन प्राप्त किया जा सकता है़
घटती जा रही है लैंड लाइन की संख्या
सरकार के लाख चाहने के बाद भी समय के साथ लैंड लाइन टेलिफोन की संख्या घटती जा रही है़ करीब डेढ़ दशक पूर्व की बात करें तो सुपौल शहर में ही करीब तीन हजार से अधिक टेलिफोन कनेक्शन मौजूद थे़ लेकिन मोबाइल फोन की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही टेलिफोन संस्कृति का भी ह्रास होने लगा़ आलम यह है कि सुविधा भोगी संस्कार में हुई बढ़ोतरी के बाद लोग फोन उठाने के लिए दूसरे कमरे में भी उठ कर जाने से कतराने लगे़ जेब में पड़ी मोबाइल से बात करना सुविधा जनक लगने लगा़
यही वजह है कि टेलिफोन बेकार पड़ने लगे़ स्वाभाविक तौर पर टेलिफोन कनेक्शन भी कटवाये जाने लगे़ नतीजा है कि फिलवक्त जिला मुख्यालय में मात्र 675 टेलिफोन का वजूद बचा हुआ है़ इनमें भी अधिकांश संख्या सरकारी टेलिफोनों की ही है़
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