फिर तबाही के डर से चिंतित हैं कोसी तटबंध के भीतर बसे लोग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jan 2016 6:39 PM

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फिर तबाही के डर से चिंतित हैं कोसी तटबंध के भीतर बसे लोग -अब तक नहीं शुरू हुआ कटाव निरोधी कार्य- प्रस्तावित सुरक्षा बांध का भी नहीं हुआ निर्माण-प्रति वर्ष कोसी की विभीषिका झेलना बनी कोसी वासियों की नियति -विधायक ने विभागीय मंत्री से किया अनुरोध फोटो -8, 9, 10कैप्सन- जारी कटाव, कोसी की फाइल […]

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फिर तबाही के डर से चिंतित हैं कोसी तटबंध के भीतर बसे लोग -अब तक नहीं शुरू हुआ कटाव निरोधी कार्य- प्रस्तावित सुरक्षा बांध का भी नहीं हुआ निर्माण-प्रति वर्ष कोसी की विभीषिका झेलना बनी कोसी वासियों की नियति -विधायक ने विभागीय मंत्री से किया अनुरोध फोटो -8, 9, 10कैप्सन- जारी कटाव, कोसी की फाइल फोटो एवं विधायक यदुवंश कुमार यादव का फाइल फोटोपंकज झा, सुपौलनदियों से जल और जल से जीवन. पर, जीवन देने वाली नदियां और इनका जल कभी-कभी इनसानों के लिए दुखदायी भी सिद्ध होता है. हम बात कर रहे हैं हिमालय से निकलने वाली कोसी नदी की, जो सदियों से कोसी के इस इलाके में व्यापक रूप से तबाही मचाती रही है. यही वजह है कि इस नदी को बिहार का शोक भी कहा गया है. इस नदी की वजह से प्रत्येक वर्ष जिले के एक तिहाई भाग में बसी लाखों की आबादी उजड़ती, बिखरती, डूबती और फिर उभरती रही है. मानसून सत्र के समाप्ति के बाद एक बार फिर नयी उम्मीदों के साथ जिंदगी की शुरुआत होती है. नये आशियाने बनते हैं, लेकिन दिलों में खौफ बना रहता है कि अगले वर्ष फिर इस भयानक तबाही के दौर से गुजरना पड़ेगा. छह प्रखंडों के 130 गांव हैं प्रभावित जिले के कोसी तटबंध के भीतर स्थित छह प्रखंडों की 36 पंचायतें एवं इन पंचायतों के 130 गांवों में बसी करीब डेढ़ लाख की आबादी की यही कहानी है. प्रत्येक वर्ष कोसी नदी के बाढ़ व कटाव की विभीषिका झेलनी इनकी नियति बन चुकी है. सरकारें बदलती रहीं, जिले के अन्य भागों में विकास के नित नये आयाम गढ़े जाते रहे. पर, कोसी तटबंध के भीतर बसी लाखों की आबादी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. सरकारी तंत्र एवं जनप्रतिनिधियों को मानो इन लोगों की तनिक भी चिंता नहीं है. तबाही के दौरान एक क्विंटल अनाज व चंद रुपये देकर प्रशासनिक पदाधिकारी भी अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं. उसके बाद बाढ़ व कटाव से विस्थापित परिवारों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है.75 हजार हेक्टेयर भूमि है प्रभावितकोसी तटबंध के भीतर बसे जिले के 130 गांवों में करीब 75 हजार हेक्टेयर भूमि कोसी से प्रभावित है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गरीब किसान हर वर्ष काफी मेहनत व मशक्कत के बाद खाली पड़ी जमीन में फसल लगाते हैं. पर, मानसून में आने वाली बाढ़ न सिर्फ इन फसलों को, बल्कि कोसी पीड़ित किसानों के अरमानों को भी अपने साथ बहा ले जाती है. इतना ही नहीं बाढ़ के पानी के साथ आने वाले गाद व बालू के कारण खेत रेत की वजह से बंजर हो जाते हैं. इससे किसानों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. लोगों को सता रही भविष्य की चिंता बाढ़ अवधि समाप्त होने के बाद नदी के जल स्तर में कमी से कोसी तटबंध के भीतर अभी जन-जीवन सामान्य हो गया है. पर, प्रत्येक वर्ष अपनी धारा में परिवर्तन के लिए विख्यात कोसी नदी के स्वभाव से वाकिफ लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं. इसकी मुख्य वजह अब तक तटबंध के भीतर बाढ़ निरोधात्मक कार्य एवं गाइड बांध का निर्माण नहीं होना बताया जाता है.नहीं हुआ गाइड बांध का निर्माण कोसी तटबंध के भीतर न तो अब तक बाढ़ निरोधात्मक कार्य ही आरंभ किया गया है और न ही महासेतु के समीप प्रस्तावित गाइड बांध का ही निर्माण कार्य आरंभ किया गया है. इस कार्य के लिए जवाबदेह विभागीय अधिकारियों का मौन धारण समझ से परे है. ग्रामीण राम कुमार यादव, दयानंद यादव, बेचन महतो, देव नारायण महतो, राजा राम राय, राजेंद्र यादव आदि ने बताया कि बाढ़ अवधि नजदीक आ रही है, लेकिन विभाग द्वारा इस बाबत किसी प्रकार की तैयारी शुरू नहीं की गयी है. इससे कोसी तटबंध के भीतर बसे लोगों की चिंता बढ़ रही है. विधायक ने लिखा विभागीय मंत्री को पत्र (बॉक्स के लिए) पिपरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक यदुवंश कुमार यादव ने जल संसाधन मंत्री को पत्र लिख कर कोसी तटबंध के भीतर अविलंब कटाव निरोधी कार्य एवं सुरक्षा तटबंध के निर्माण कराये जाने का अनुरोध किया है. मंत्री को लिखे पत्र में विधायक श्री यादव ने कहा है कि बीते वर्ष तटबंध के भीतर कोसी से व्यापक पैमाने पर क्षति हुई थी.अभी भी सैकड़ों विस्थापित परिवार बांध पर शरण लिये हुए हैं. बाढ़ काल से पूर्व उपरोक्त कार्य को संपन्न नहीं किया गया, तो तटबंध के भीतर बसे शेष गांव का भी वही हश्र होगा. उन्होंने पूर्वी तटबंध व सिकरहट्टा-मझारी सुरक्षा बांध पर भी खतरे की आशंका जतायी है. श्री यादव ने मोमीन टोला से मौजहा तक सुरक्षा बांध के निर्माण की आवश्यकता जतायी है. कहा है कि इससे पीरगंज, ठाढ़ीधत्ता, खखई, दुबियाही आदि गांव के करीब दस हजार ग्रामीण सुरक्षित होंगे तथा पूर्वी कोसी तटबंध के 44 से 50 किलोमीटर के बीच बना कोसी का चैनल भी बंद हो जायेगा. विधायक ने हांसा में भी सुरक्षा बांध का निर्माण एवं कोसी महासेतु से पश्चिम बेंगा, सनपतहा में कटाव निरोधी कार्य ससमय कराने का अनुरोध किया है. इसके अलावा पश्चिमी सुरक्षा बांध के मुहाने पर बने चैनल में सुरक्षा बांध का निर्माण तथा सोनवर्षा-बेंगा से परसामाधो एवं एगडारा से सिसौनी सीमा तक कटाव निरोधी कार्य करवाने का अनुरोध किया है, ताकि बाढ़ अवधि में सैकड़ों परिवार के जान-माल की रक्षा हो सके. कार्यपालक अभियंता को तटबंध के भीतर जाकर स्थलीय निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है. ग्रामीणों से राय लेकर एवं एडीएम आपदा की अनुमति से प्रोजेक्ट तैयार कर सरकार को भेजा जायेगा.इ प्रकाश दास, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

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