साहत्यि के लिए समर्पित थे राज मोहन : डॉ सुभाष

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साहित्य के लिए समर्पित थे राज मोहन : डॉ सुभाष प्रतिनिधि, सुपौलमैथिली साहित्य के साहित्यकार राज मोहन झा के निधन पर जिले के साहित्य प्रेमियों ने शोक व्यक्त किया है. उनके निधन को मैथिली साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया है. इस बाबत किसुन संकल्प लोक द्वारा रविवार को जिला मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा […]

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साहित्य के लिए समर्पित थे राज मोहन : डॉ सुभाष प्रतिनिधि, सुपौलमैथिली साहित्य के साहित्यकार राज मोहन झा के निधन पर जिले के साहित्य प्रेमियों ने शोक व्यक्त किया है. उनके निधन को मैथिली साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया है. इस बाबत किसुन संकल्प लोक द्वारा रविवार को जिला मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. शोकसभा में डॉ सुभाष चंद्र यादव ने कहा कि राज मोहन झा मैथिली साहित्य के उन्नायकों में एक रहे हैं. उनके जाने से साहित्य और संस्कृति का जो कोना शून्य हो गया है, उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है. उनका पूरा जीवन साहित्य के लिए समर्पित रहा. वह पिछले कुछ वर्षों से बीमारी से जूझते रहे. बावजूद उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. प्रो धीरेंद्र धीर ने कहा कि मैथिली कहानी की दुनिया में उनकी जो ऊंचाई थी, वहां पहुंच पाना किसी दूसरे कहानीकार से सहज संभव नहीं है. एक आदि एक अंत, झूठ-सांच, आई काल्हि परसू एवं अनुलग्नक आदि की कहानियां किसी भी भारतीय भाषा के समकक्ष रखी जा सकती हैं. युवा साहित्यकार आशीष चमन ने कहा कि आरंभ के संपादक के रूप में मैथिली पत्रकारिता को सर्वथा नया आयाम देने वाले राजमोहन झा को भूल पाना कतई संभव नहीं है. हिंदी के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो कृपा नाथ झा ने कहा कि उनकी कहानियों का शिल्प, भाषा शैली और विलक्षण कथानक बहुत कुछ सोचने को विवश करता है. एक ही बिंदु को कई-कई तर्क संगतियों के साथ कहने की विलक्षण कला उन्हें एक श्रेष्ठ कथा शिल्पी का दर्जा प्रदान करती है.अध्यक्षता कर रहे किसुन संकल्प लोक के सचिव केदार कानन ने उनकी यादों को साझा करते हुए कई संस्मरण सुनाए. उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी एवं प्रबोध साहित्य सम्मान से सम्मानित राजमोहन झा उर्फ भाई साहेब सिर्फ कहानीकार ही नहीं थे अपितु आलोचना के क्षेत्र में भी उनका सार्थक हस्तक्षेप रहा है. उनकी जो साहित्यिक स्थापनाएं हैं, उनका कोई विकल्प नहीं हो सकता. मौके पर परमानंद, मणि झा, असित किशोर, संजीव कुमार आदि ने भी संवेदनाएं प्रकट कीं.

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