38 डिग्री की तपिश से बेहाल सुपौल, खेतों में सूख रहा धान का बिचड़ा, बस स्टैंड हुआ सूना

Edited by Shruti Kumari
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भीषण गर्मी के बीच खेत में सूखता धान का बिचड़ा

Supaul Heat Wave: सुपौल जिले में भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. 38 डिग्री सेल्सियस तापमान, उमस और पछुआ हवा के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. सबसे अधिक परेशानी किसानों को हो रही है, जहां धान का बिचड़ा सूखने लगा है और खेती की लागत बढ़ती जा रही है.

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सुपौल से रौशन सिंह की रिपोर्ट:

Supaul Heat Wave: सुपौल जिले में बुधवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दिनभर सड़कों पर आवाजाही कम रही, जबकि लोग घरों में पंखा और कूलर के सहारे राहत तलाशते नजर आए.

पर्यावरणविद डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि इस वर्ष गर्मी का असर सामान्य से अधिक महसूस किया जा रहा है. उन्होंने इसके लिए लगातार हो रही पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन को जिम्मेदार बताया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में तापमान और खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है.

बस स्टैन्ड पर हाथ पंखा बेचता दुकानदार

बस स्टैंड पर घटी यात्रियों की संख्या

भीषण गर्मी का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है. जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड पर बुधवार को सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम चहल-पहल देखने को मिली. बस संचालकों और एजेंटों का कहना है कि गर्मी के कारण लोग अनावश्यक यात्रा से बच रहे हैं.

बस एजेंटों के अनुसार जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन एक हजार से अधिक यात्री सफर करते थे, वहीं वर्तमान में यात्रियों की संख्या घटकर 100 से 200 के बीच रह गई है. एसी बसों में भी सीटें खाली जा रही हैं, जबकि साधारण बसों की स्थिति और खराब है.

धान की खेती पर मौसम की मार

गर्मी और बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. किसान रामनरेश यादव ने बताया कि बढ़ते तापमान और सिंचाई संकट के कारण धान का बिचड़ा खेतों में सूख रहा है. उन्होंने बताया कि बिचड़ा तैयार करने में हजारों रुपये खर्च हुए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है.

किसानों का कहना है कि सामान्यतः इस समय तक धान का बिचड़ा पूरी तरह तैयार हो जाता था, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी के कारण खेती प्रभावित हो रही है. इससे आने वाले दिनों में धान उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

मौसम वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

कृषि मौसम वैज्ञानिक देवन चौधरी ने बताया कि जिले में तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो कृषि गतिविधियों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है.

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह

चिकित्सक डॉ. विनय ने लोगों को गर्मी से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें और शरीर में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.

बारिश का इंतजार, बढ़ रही चिंता

लगातार बढ़ती गर्मी ने किसानों, व्यापारियों, यात्रियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द मानसूनी बारिश नहीं हुई तो कृषि कार्यों के साथ-साथ जनजीवन पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है. फिलहाल जिलेवासियों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं.

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