तीन वर्षों में निकाले थे 30 लाख
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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निर्णय. बिना स्वीकृत पद के वेतन का लाभ लेने वाले शिक्षकों पर हुई कार्रवाई -आरडीडीइ ने डीइओ को दिया कार्रवाई का आदेश -माना वित्तीय अनियमितता का द्योतक -आरडीडीइ ने कहा मामला गंभीर प्रकृति का सुपौल : जिले के किसनपुर प्रखंड स्थित अलग-अलग विद्यालयों में बिना स्वीकृति के अवैध रूप से पदस्थापित तीन शिक्षकों द्वारा अधिकारी […]
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निर्णय. बिना स्वीकृत पद के वेतन का लाभ लेने वाले शिक्षकों पर हुई कार्रवाई
-आरडीडीइ ने डीइओ को दिया कार्रवाई का आदेश
-माना वित्तीय अनियमितता का द्योतक
-आरडीडीइ ने कहा मामला गंभीर प्रकृति का
सुपौल : जिले के किसनपुर प्रखंड स्थित अलग-अलग विद्यालयों में बिना स्वीकृति के अवैध रूप से पदस्थापित तीन शिक्षकों द्वारा अधिकारी की मिलीभगत से वेतन के नाम पर लाखों रुपये की अवैध निकासी के मामले को क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक ने गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजे पत्र में आरडीडीइ प्रभा शंकर सिंह ने तीनों शिक्षकों को अविलंब पूर्व के विद्यालय में भेजते हुए कृत कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है.गौरतलब है कि ‘बिना स्वीकृत पद के ही ले रहे वेतन का लाभ’ शीर्षक से प्रभात खबर द्वारा 03 जनवरी के अंक में प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की गयी थी.जिसके बाद आरडीडीइ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया है.
कहा मामला गंभीर प्रकृति का: क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने इस मामले को गंभीर प्रकृति का बताया है. पत्र में कहा है कि पत्र प्राप्ति के साथ सभी शिक्षकों को अविलंब पूर्व के विद्यालय में भेजते हुए कृत कार्रवाई से अवगत कराया जाये. मामला गंभीर प्रकृति का है जिसमें विलंब ना हो, इस पर ध्यान दिया जाये. अन्यथा विलंब अथवा अवैध निकासी की सारी जवाबदेही आप सबों की होगी.
क्या है मामला : वर्ष 2013 में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी सुलतान अहमद द्वारा स्थापना समिति की प्रत्याशा में जिले के 10 शिक्षकों को अवैध रूप से मैट्रिक प्रशिक्षित से स्नातक प्रशिक्षित में प्रोन्नति दे कर उन्हें नये विद्यालय में पदस्थापित कर दिया गया.
अवैध रूप से प्रोन्नति व पदस्थापना को लेकर की गयी शिकायत के बाद मामले की जांच की गयी और सभी सात शिक्षकों की प्रोन्नति को रद्द कर दिया गया. नियमानुसार प्रोन्नति रद्द होने के बाद इन शिक्षकों को अपने मूल विद्यालयों में वापस लौट जाना चाहिए था. लेकिन किसनपुर प्रखंड के तीन शिक्षक आज भी अपने पद पर अवैध रूप से जमे हुए हैं और वेतन के नाम पर अब तक लाखों रुपये की अवैध निकासी की जा चुकी है.
पब्लिक विजिलेंस कमेटी ने की थी शिकायत
प्रोन्नति रद्द होने के बावजूद अवैध रूप से नव पदस्थापित विद्यालय में जमे रहने एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की मिलीभगत से तीन वर्षों के दौरान 30 लाख रुपये से अधिक की अवैध रूप से निकासी किये जाने की शिकायत पब्लिक विजिलेंस कमेटी के सचिव अनिल कुमार सिंह द्वारा आयुक्त कोसी प्रमंडल, क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक एवं जिला पदाधिकारी से की गयी थी.श्री सिंह ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग किया था.
आरडीडीइ ने इसे वित्तीय अनियमितता माना
क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक श्री सिंह ने ज्ञापांक 25 (नि) दिनांक 07 जनवरी 2016 के माध्यम से भेजे पत्र में प्रोन्नति रद्द होने के बावजूद नव पदस्थापित विद्यालय में अवैध रूप से बने रहने एवं वेतन का लाभ लेने के मामले को वित्तीय अनियमितता का द्योतक बताया है.
कहा है कि आपके कार्यालय ज्ञापांक 1656 (नि) 08 सितंबर 2014 द्वारा जिन स्नातक प्रशिक्षित वेतनमान में दी गयी प्रोन्नति को स्थगित कर दिया गया था, वे उक्त विद्यालय में अब तक बने हुए हैं एवं वेतन का लाभ ले रहे हैं, जो वित्तीय अनियमितता का द्योतक है.
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