एलइडी मामले में अनियमितता का आरोप

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निर्मली : नगर पंचायत प्रशासन द्वारा क्षेत्र में रोशन की सुविधा उपलब्ध कराये जाने को लेकर 180 एलइडी लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा है. जहां इस कार्य में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरतने का मामला प्रकाश में आया है.. विदित हो कि नगर पंचायत द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में नगर क्षेत्र को प्रकाशित […]

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निर्मली : नगर पंचायत प्रशासन द्वारा क्षेत्र में रोशन की सुविधा उपलब्ध कराये जाने को लेकर 180 एलइडी लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा है. जहां इस कार्य में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरतने का मामला प्रकाश में आया है.. विदित हो कि नगर पंचायत द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में नगर क्षेत्र को प्रकाशित किये जाने को लेकर 27 लाख 72 हजार रुपए की निविदा निकाली गई थी.

निविदा के अनुरूप सिन्हा इन्टरप्राईजेज, गया द्वारा नगर में एलइडी लाइट लगाये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई. कार्य में बरती जा रही अनियमितता का आरोप लगाते हुए वार्ड पार्षद अनिल कुमार साह ने बताया कि नगर पंचायत द्वारा निकाली गई निविदा में प्रति एलइडी लाइट की कीमत 15 हजार 400 रुपए है.

लेकिन संवेदक द्वारा लगाये जा रहे एलइडी लाइट के बॉक्स पर स्टैंड सहित लाइट का मूल्य सात हजार सात सौ पचास रुपए ही अंकित है. श्री साह ने बताया कि मामले से प्रतीत होता है कि नगर पंचायत प्रशासन व संवेदक द्वारा मिलीभगत कर भारी पैमाने पर राशि का गबन किया जा रहा है. वार्ड पार्षद श्री साह का कहना है कि इससे पूर्व भी वित्तीय वर्ष 2013-14 में भी नगर पंचायत द्वारा 150 स्ट्रीट लाइट लगवाया गया था. जहां व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गयी थी.

साथ ही उक्त मामले में तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी निर्मली को जांच का आदेश दिया गया, आदेशानुसार अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी व कनीय अभियंता विद्युत से संयुक्त जांच करायी गयी. जाचोपरांत स्पष्ट रूप से घोटाले की बात भी सामने आयी.

श्री साह ने बताया कि घोटाले की बात सामने आते ही तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी को बचाने के उद्देश्य से अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. मामले पर डीएम ने एडीएम आपदा अरुण प्रकाश को पुन: जांच का आदेश दिया. बीते 11 जुलाई 2015 को श्री प्रकाश ने डीएम को जांच प्रतिवेदन सौंपा.

जिला पदाधिकारी ने नगर विकास एवं आवास विभाग को अपने पत्रांक 121 दिनांक 22.09.2015 के द्वारा ईमेल के माध्यम से जांच प्रतिवेदन समर्पित किया. उक्त जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से घोटाला होने का उल्लेख है. बावजूद इसके अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी है.

वार्ड पार्षद श्री साह का कहना है कि पूर्व में हुई अनियमितता पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से नगर पंचायत प्रशासन द्वारा पुन: एलइडी लाइट में अनियमितता बरती जा रही है. मामले के बाबत कार्यपालक पदाधिकारी लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि इस संबंध में उन्हें जानकारी प्राप्त हुई है. जांचोपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी.

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