धान नहीं बिका, रवि की बोआई प्रभावित

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धान नहीं बिका, रवि की बोआई प्रभावित प्रतिनिधि, सिमराही एक तरफ सरकार कृषि के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए नये-नये तकनीक से खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है. ताकि किसान खेत की उपज बढ़ा सकें. रखंड में सरकारी स्तर पर किसान की धान की […]

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धान नहीं बिका, रवि की बोआई प्रभावित प्रतिनिधि, सिमराही एक तरफ सरकार कृषि के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए नये-नये तकनीक से खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को आत्म निर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है. ताकि किसान खेत की उपज बढ़ा सकें. रखंड में सरकारी स्तर पर किसान की धान की बिक्री नहीं होने से रवि फसल की बुआई काफी प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ रहा है. सरकारी स्तर पर किसानों के धान की खरीदारी नहीं होने से किसानों को गेहूं की फसल लगाने के लिए कौड़ियों के दाम में धान बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है. क्योंकि किसानों की खेती फसल चक्र पर ही निर्भर है. जो एक फसल के फायदे के बाद अपनी पूंजी दूसरे फसल में लगाते है. लेकिन धान लागत से कम कीमत पर बेचने की मजबूरी ने किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी कर दी है. सरकारी स्तर पर धान खरीदने की जटिल प्रक्रिया भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुई है.क्या है धान खरीदारी प्रक्रिया जानकारी अनुसार किसानों से धान खरीदने के लिए सरकारी स्तर पर पैक्स एवं व्यापार मंडल को जिम्मेवारी दी गयी है. जिस पंचायत में पैक्स कार्यरत नहीं है ऐसे पंचायत में राज्य खाद्य निगम को किसानों के धान खरीदने की जिम्मेदारी दी गयी है. किसानों से खरीदा गया धान राज्य खाद्य निगम के माध्यम से संबंधित मिलर को 67 प्रतिशत चावल के एग्रीमेंट पर देने का प्रावधान है. इतना ही नहीं धान ऐसे मिलर को देना है . जिसका राज्य खाद्य निगम के शर्तों के अनुसार सरकार से एग्रीमेंट है. लेकिन सरकार की एग्रीमेंट की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि कोई भी मिलर इस काम में रुचि नहीं ले रहा है. ऐसे में न केवल किसानों की समस्या में इजाफा हो रहा है. बल्कि किसान हित के लिए बनायी गयी सरकारी योजनाएं भी अधर लटकता दिखायी दे रहा है. क्या है मिलर के साथ सरकार का एग्रीमेंट मिलर सीएमआर योजना की चावल तैयार करने के लिए संबंधित राज्य खाद्य निगम से अपने क्षमता के अनुसार बैंक गारंटी पर एग्रीमेंट का प्रावधान है. यहां यह जानना जरुरी है कि अगर किसी मिलर की धान से चावल तैयार करने की दैनिक क्षमता 200 एमटी यानी दो हजार क्वींटल है. गणित से मिलर को मिलर को इस हिसाब से 16 करोड़ 20 लाख का एग्रीमेंट राज्य खाद्य निगम को देना होगा. तब जा कर राज्य खाद्य निगम मिलर को चावल तैयार करने के लिए धान देंगे. यही वजह है कि इसके खरीदारी में मिलर की रुचि नहीं दिख रहा है. पूर्व में क्या थी धान खरीदने की प्रक्रिया जानकारी अनुसार पिछले वर्ष सरकारी धान खरीद की प्रक्रिया में राज्य खाद्य निगम निबंधित मिलर से 67 प्रतिशत की दर से पहले चावल लेकर धान आपूर्ति करता था. जिस नियम में इस बार फेर-बदल हो जाने से अभी तक धान की खरीदारी शुरु नहीं हो पायी है. नतीजतन किसानों को भारी समस्या से रु-ब-रु होना पड़ रहा है.

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