शिशु रोग विशेषज्ञ, है आठवीं पास

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फरजी डिग्री के आधार पर जिला मुख्यालय में कर रहा था प्रैक्टिस सुपौल : सीवान से तथाकथित डॉक्टर मंजय की सकुशल बरामदगी के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है. हालांकि कई अन्य बिंदुओं पर पुलिस अभी भी जांच कर रही है. सबसे अहम बात यह है कि फर्जी डिग्री के आधार पर जिला […]

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फरजी डिग्री के आधार पर जिला मुख्यालय में कर रहा था प्रैक्टिस
सुपौल : सीवान से तथाकथित डॉक्टर मंजय की सकुशल बरामदगी के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है. हालांकि कई अन्य बिंदुओं पर पुलिस अभी भी जांच कर रही है. सबसे अहम बात यह है कि फर्जी डिग्री के आधार पर जिला मुख्यालय में प्रैक्टिस कर रहे इस डॉक्टर के विरुद्ध अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई क्यों नहीं हुई. पुलिस का मानना है कि यह कुछ दिन बाद ही अपना ठिकाना बदलने में अभ्यस्त है और इसके नेटवर्क में कई अन्य लोग शामिल हैं.
इसका खुलासा जांच के बाद होगा. पर, यह बात सच है कि शातिर दिमाग डाॅ मंजय की पहुंच काफी ऊपर तक है. इसी पहुंच के बदौलत आज तक इसके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई. बताया जाता है कि सीतामढ़ी स्थित क्लिनिक पर छापेमारी के बाद जिला पदाधिकारी द्वारा डाॅ मंजय के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया. पर, उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी.
डॉ मंजय की सभी डिग्रियां हैं फर्जी
खुद को एमबीबीएस बताने वाला डॉ मंजय महज आठवीं पास है. पुलिस द्वारा जारी जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि इसकी सभी डिग्रियां फर्जी हैं. इस मामले की जांच के लिए सीतामढ़ी गये पुलिस निरीक्षक इंद्रजीत बैठा ने बताया कि जांच के दौरान इस बात की जानकारी मिली कि उक्त चिकित्सक महज आठवीं पास है. सीतामढ़ी में क्लिनिक चलाने के दौरान जब सिविल सर्जन द्वारा छापेमारी की गयी, तो वह वहां से भाग निकला. बाद में उसे सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने के लिए समय भी दिया गया. पर, वह कागजात उपलब्ध नहीं करा सका.
सर्टिफिकेट चोरी का किया था नाटक
फरजी डिग्री के आधार पर जिला मुख्यालय में प्रैक्टिस करने वाला मंजय कुमार काफी शातिर दिमाग का है.अपनी आगामी कार्य योजना की पहले से ही तैयारी कर लेता है और किसी को भनक भी नहीं लगती. सात सितंबर को सुपौल में अपने क्लिनिक के उद्घाटन के बाद शायद उसे यह आभास हो गया था कि यहां भी सर्टिफिकेट की मांग की जायेगी. इसलिए अक्तूबर में ही उसने इसका रास्ता निकाल लिया. उसके द्वारा अपने किराये के आवास से 30 हजार रुपये एवं सभी सर्टिफिकेट के चोरी होने की सूचना थाने को दी गयी थी. थानाध्यक्ष राम इकबाल यादव ने बताया कि उस वक्त उसके द्वारा बार-बार यह अनुरोध किया जाता रहा कि मीडिया कर्मियों को चोरी की जानकारी नहीं दें.
व्यवसाय व ठिकाने बदलने में है माहिर
शातिर दिमाग डाॅ मंजय शुरू से ही व्यवसाय व ठिकाना बदलने में माहिर रहा है. इसमें उसके कई अन्य सहयोगी भी हैं.
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सर्वप्ररथम उसने रूनी सैदपुर में क्लिनिक खोल कर प्रैक्टिस करना शुरू किया. यहां कुछ दिन बाद उपचार के दौरान एक शिशु की मौत के बाद हुए हो-हंगामे से घबरा कर वह सीतामढ़ी आ गया और सदर अस्पताल के ठीक सामने मेडि लास्ट नामक क्लिनिक खोल लिया. यहां प्रशासन द्वारा छापेमारी के बाद उसे भाग कर सुपौल आना पड़ा. इस बीच उसने मैक फोर्स ऑर्गेनिक लिमिटेड की फ्रेंचाइजी भी ले रखी थी. इसमें उसकी पत्नी और साला समेत कुल सात पार्टनर हैं.
आशिक मिजाज भी है डाॅ मंजय
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताने वाला मंजय कुमार आशिक मिजाज है.यही वजह है कि इसने दो -दो शादियां कर रखी हैं. पुलिस की मानें तो और भी कई अन्य महिलाओं से इसके ताल्लुकात हैं. इसकी पहली शादी परिजनों द्वारा गांव में करवायी गयी थी. इस पत्नी का नाम गीता है और वह गांव में अपने एक पुत्र के साथ रहती है, जबकि सीतामढ़ी में प्रैक्टिस के दौरान इसकी मुलाकात नीतू से हुई, जो पति की मौत के बाद इसके संपर्क में आयी और इसने उससे विवाह रचा लिया. इस शादी से नीतू को एक पुत्र है, जबकि एक पुत्र उसे पहले से है.
कौन है किशोर कुमार
मंजय कुमार के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा विभिन्न कोणों से की गयी जांच में यह पता चला है कि इसके द्वारा एक बहुत बड़ा रैकेट चलाया जा रहा है. इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हैं.
वहीं इस रैकेट का तार बिहार के कई अन्य जिलों से भी जुड़े होने की संभावना जतायी जा रही है. जांच के क्रम में जिस किशोर कुमार का नाम सामने आया है, उसी ने मंजय की जान पहचान दवा दुकान करने वाले अभिनव से करवायी थी. पुलिस अधीक्षक डाॅ एकले के अनुसार मंजय की बरामदगी में भी किशोर की ही भूमिका है. पुलिस द्वारा जब किशोर पर दबाव बनाया गया, तो एक घंटे बाद मंजय कुमार सीवान में स्वयं उपस्थित हो गया.
कर्ज में आकंठ डूबा है डॉ मंजय
फरजी डिग्री धारी डाॅ मंजय कुमार सिर सेपांव तक कर्ज में डूबा है. पुलिस द्वारा सीतामढ़ी में पूछताछ के दौरान कई लोगों ने लाखों रुपये कर्ज के रूप में लिये जाने की बात बतायी है.
वहीं सदर थाने में पूछताछ के दौरान स्वयं डा मंजय ने भी पुलिस को बताया कि कुछ लोगों से उसने उधार ले रखा है. इसके अलावा दवा कंपनी की फ्रेंचाइजी के नाम पर अपने अन्य पार्टनरों से लिये गये पैसे लौटाने का भी उसके ऊपर दबाव था. 29 नवंबर को सीतामढ़ी स्थित उमंग होटल में हुई बैठक के बाद उसके द्वारा 04 लाख 60 हजार रुपये का चेक अपने पार्टनर संजय कुमार को दिया गया था. इस दौरान बनाये गये बांड में उसने स्पष्ट किया था कि 08 दिसंबर से पैसा आना प्रारंभ हो जायेगा, पर वह 07 दिसंबर को ही लापता हो गया.
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