विकास से कोसों दूर हैं कौशलीपट्टी वासी
विकास से कोसों दूर हैं कौशलीपट्टी वासी फोटो-08,09,कैप्सन- जर्जर पुल व बदहाल सड़क.प्रतिनिधि, कटैया-निर्मलीकिसी भी गांव, कसबा व क्षेत्र के विकास के लिए अहम होता है. वहां सड़क, पानी व बिजली की व्यवस्था का सुदृढ़ होना. आज के आधुनिक युग में इसके बिना जिंदगी की कल्पना बेईमानी सा प्रतीत होता है. बावजूद पिपरा प्रखंड के […]
विकास से कोसों दूर हैं कौशलीपट्टी वासी फोटो-08,09,कैप्सन- जर्जर पुल व बदहाल सड़क.प्रतिनिधि, कटैया-निर्मलीकिसी भी गांव, कसबा व क्षेत्र के विकास के लिए अहम होता है. वहां सड़क, पानी व बिजली की व्यवस्था का सुदृढ़ होना. आज के आधुनिक युग में इसके बिना जिंदगी की कल्पना बेईमानी सा प्रतीत होता है. बावजूद पिपरा प्रखंड के रामनगर पंचायत के वार्ड नंबर-08 कोशली पट्टी के ग्रामीण उक्त तीनों सुविधाओं से महरुम हैं. विकास के नाम पर आज सरकार द्वारा कई योजनाएं चलायी जा रही है. पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक, फिर विधायक से एम पी तक सभी के मद से विकास की योजनाओं के लिए कई स्कीम है. लेकिन इस गांव के तरफ ना तो सरकार के विकास योजनाओं की स्कीम चलाई गयी, और ना ही इसकी तरफ किसी का ध्यान गया. मौसम कोई भी हो गांव के हालात में कोई बदलाव नहीं आया है. सड़क के हालात बरसात में कीचड़नुमा तो सुखाड़ में धूल उड़ता नजर आता है. दो भागों में विभक्त पंचायत को जोड़ने वाला बरसाती नदी की स्थिति भी जर्जर है, और बिजली तो यहां के लोगों के लिए एक सपना ही है. जो इस गांव के हालात की सही तस्वीर को दर्शाता है. यही वजह रहा कि इस विधान सभा चुनाव में सड़क,पानी व बिजली यहां का मुख्य मुद्दा भी रहा. कहते हैं ग्रामीण नंद लाल यादव कहते हैं कि विकास सिर्फ चुनाव भर का मुद्दा होता है, जनता को बेवकूफ बनाने के लिए. उसके बाद तो नेताओं को क्षेत्र के विकास से ज्यादा खुद के विकास की ज्यादा चिंता होती है. जनहित व विकास से जनप्रतिनिधियों का कोई सरोकार नहीं होता है. चंदेश्वर मंडल ने चिंता भरे स्वर में कहा कि करे भी तो क्या पांच वर्ष पर एक बार चुनाव होता है. हर बार भरोसा दिया जाता है. भरोसा पर कई दशक बीत गये. लेकिन अब तो भरोसा व आश्वासन शब्द से भी घीन आने लगी है. कारी मंडल ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते कहा कि इस गांव के लोगों के जीविका खेती पर निर्भर है. सड़क, बिजली व पानी की व्यवस्था नहीं रहने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जर्जर सड़क की वजह से किसानों को व्यवसायियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने की पड़ती है. जिसकी वजह से खेती में लागत के अनुसार भी कमाई नहीं हो पाती है. जिससे आर्थिक समस्या से जूझना यहां के किसानों की नियति बन गई है. कहा इस बार के चुनाव में कई नेता आये फिर आश्वासन भी दिया. अब देखना है कि चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि इस गांव के लिए क्या कुछ करते है.वरुण कुमार ने बताया कि गांव की बदहाल स्थिति की वजह से हमलोग गांव छोड़ कर शहर में जा कर बस गये है. क्योंकि यहां किसी भी तरह की सुविधा नहीं है. अब हालात यह है कि धीरे-धीरे गांव के लोग अन्यत्र स्थानों पर या तो चले गये हैं या जाने की तैयारी में लगे है. हमलोगों गांव को अब भगवान भरोसे छोड़ दिया है.
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