प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त, जिले के कई निजी अस्पताल व पैथोलॉजी के विरुद्ध होगी कार्रवाई
Updated at : 01 Mar 2019 8:01 AM (IST)
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सुपौल : मरीजों का इलाज करने के बाद क्लिनिक एवं पैथोलॉजी संचालकों द्वारा कचरे जमा करने वालों की अब खैर नहीं है. उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर ये जानकारी दिया है जिसमें सुपौल सहित नालंदा, नवादा, पूर्णियां, सहरसा […]
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सुपौल : मरीजों का इलाज करने के बाद क्लिनिक एवं पैथोलॉजी संचालकों द्वारा कचरे जमा करने वालों की अब खैर नहीं है. उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर ये जानकारी दिया है जिसमें सुपौल सहित नालंदा, नवादा, पूर्णियां, सहरसा और सीतामढ़ी जिला शामिल हैं.
पत्र में कहा गया है कि जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन कर संचालित करीब 92 स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों एवं 80 पैथोलॉजिकल जांच घरों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा पांच के तहत क्लोजर डायरेक्सन जारी किया गया है. यह कार्रवाई 09 जनवरी 2019 एवं 31 जनवरी 2019 को ऐसे क्रमश: 102 एवं 85 सुविधा केंद्रों तथा क्रमश: 23 एवं 50 पैथोलॉजी जांच घरों को जारी क्लोजर डायरेक्सन के अतिरिक्त है.
इस प्रकार अब तक कुल 279 स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों एवं 153 पैथोलॉजिकल केंद्रों को क्लोजर डायरेक्सन जारी किया गया है. जिसकी प्रति संबंधित सभी जिले के सिविल सर्जन को देते हुए उन्हें उक्त केंद्रों का संचालन बंद कराने का निर्देश दिया गया है.
साथ ही उक्त स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में इलाज करा रहे मरीजों की चिकित्सा हेतु वैकल्पिक व्यवस्था कराने का भी निर्देश दिया है. इतना ही नहीं पत्र की प्रति प्रबंध निदेशक पावर डिस्ट्रीब्यूसन कंपनी लिमिडेट को भी देते हुए ऐसे चिकित्सा संस्थानों की विद्युत आपूर्ति विच्छेद करने का अनुरोध किया गया है.
समय पर अपशिष्ट का निपटान जरूरी
जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2016 में ऐसे जैव चिकित्सा अपशिष्ट का निपटान सामूहिक उपचार केंद्र के माध्यम से ही कराने की व्यवस्था की गयी है. जो वर्तमान में पटना, भागलपुर एवं मुजफ्फरपुर में स्थापित हैं.
सभी सैय्या युक्त चिकित्सालय को तीनों उपचार केंद्रों के माध्यम से जनित चिकित्सा अपशिष्टों का निपटान करना आवश्यक है. साथ ही पर्षद से स्थापनार्थ सहमति एवं संचालन के लिये सहमति भी लेना बेहद ही जरूरी है.
खतरनाक है मेडिकल कचरा
जानकारों का कहना है कि पैथोलॉजी एवं चिकित्सालयों में व्यवहृत अवशेष आमलोगों के लिये बेहद ही खतरनाक है. इसको व्यवहार में लाने के बाद तत्काल नष्ट कर दिया जाना चाहिए.
इसी को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी पत्र में बताया गया कि चिकित्सा संस्थानों से जनित होने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट संक्रामक प्रकृति के होते हैं. जिनके व्यवस्थित निपटान नहीं करने से कई प्रकार के संक्रामक रोग फैलने की संभावना रहती है.
14 पैथोलॉजी व 10 क्लिनिक के विरुद्ध होगी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सुपौल जिले के करीब 14 पैथोलॉजी एवं 10 प्राइवेट क्लिनिक इसके जद में आते हैं. जाहिर है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा भेजे गये इस पत्र से निजी क्लिनिक संचालक और पैथोलॉजी में हड़कंप मचा हुआ है. हालांकि इस दिशा में जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई भी ठोस पहल नहीं की जा सकी है. मालूम हो कि पैथोलॉजी एवं निजी अस्पतालों में हर दिन जमा हो रहे अपशिष्ट के कारण संक्रमण का खतरा बना रहता है. जो लोगों के लिये काफी हानिकारक हो सकता है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ घनश्याम झा ने बताया कि संबंधित पैथोलॉजी एवं क्लिनिक संचालकों को नोटिस भेज दी गयी है. तय समय के अंदर अगर उनके द्वारा इस दिशा में पहल नहीं की गयी तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
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