सीवान: 25 जुलाई के प्रदर्शन के विरोध में आइसा-आरवाइए का आक्रोश मार्च, एसपी को बर्खास्त करने की मांग
प्रदर्शन करते प्रदर्शनकारी
25 जुलाई को सीवान में छात्रों पर हुई एके-47 फायरिंग और लाठीचार्ज के विरोध में आइसा और आरवाइए ने विशाल आक्रोश मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों ने एसपी पुरन कुमार झा की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है.
Siwan protest: 25 जुलाई को शहर में हुए प्रदर्शन के दौरान एके-47 से छात्रों पर फायरिंग, पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मामला मंगलवार को एक बार फिर गरमा गया. आइसा और आरवाइए के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों ने पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करते हुए एसपी पुरन कुमार झा को बर्खास्त करने की मांग की.
आक्रोश मार्च की शुरुआत गोपालगंज मोड़ से हुई, जो जेपी चौक, अस्पताल मोड़ होते हुए बबुनिया मोड़ पहुंचा. इसके बाद प्रदर्शनकारी वापस अंबेडकर पार्क पहुंचे, जहां मार्च सभा में तब्दील हो गया. प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.
एसपी को बर्खास्त करने की उठी मांग
प्रदर्शनकारियों ने ‘छात्रों पर एके-47 से गोली चलवाने वाले एसपी को बर्खास्त करो’, ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी एनटीए को भंग करो’ और ‘भविष्य के लिए छात्र-युवाओं का संघर्ष जिंदाबाद’ समेत कई नारे लगाये.
आइसा और आरवाइए ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एके-47 से फायरिंग और लाठीचार्ज किया था. संगठनों ने इसकी निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. साथ ही एसपी को पद से हटाने की मांग भी उठायी गयी.
मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन रहा अलर्ट
आक्रोश मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा. बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गयी थी. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गयी थी. पुलिस पदाधिकारी लगातार मार्च की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे.
आरवाइए के राज्य सचिव सह अगियांव के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय और राज्य सचिव दीपांकर ने सभा को संबोधित किया. नेताओं ने कहा कि एसपी को तत्काल बर्खास्त नहीं किया गया तो आंदोलन को बिहार स्तर पर तेज किया जायेगा.
नेताओं ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था और रोजगार की स्थिति को लेकर भी छात्र-युवा आंदोलन करेंगे. इसी क्रम में 19 अगस्त को जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में छात्र युवा संसद आयोजित की जायेगी. इसमें शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जायेगा.
प्रदर्शनकारियों के आगे-पीछे पुलिस का घेरा
आइसा और आरवाइए के आक्रोश मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे. मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के आगे और पीछे पुलिस जवानों की तैनाती की गयी थी. प्रदर्शनकारियों के आगे करीब 65 पुलिसकर्मी सुरक्षा में चल रहे थे, जबकि मार्च के पीछे 50 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था.
इस तरह मार्च के दौरान करीब 115 पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे. प्रदर्शनकारियों के बीच पुलिस की मौजूदगी से पूरे मार्च के दौरान सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रहा.
सिविल ड्रेस में गमछाधारी पुलिसकर्मी भी रहे मुस्तैद
आक्रोश मार्च के दौरान वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ सादे लिबास में गमछा लिये पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गयी थी. ये पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के बीच रहकर गतिविधियों पर नजर रख रहे थे. किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी लगातार भीड़ की गतिविधियों की निगरानी करते दिखे.
समाहरणालय जाने वाला रास्ता रहा बंद
आक्रोश मार्च को देखते हुए प्रशासन ने समाहरणालय जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया था. मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस जवानों की तैनाती की गयी थी. प्रदर्शनकारियों को समाहरणालय की ओर जाने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गयी थी.
बैरिकेडिंग के आसपास पुलिस पदाधिकारी और जवान लगातार मुस्तैद रहे. प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड में रखा गया था.
मार्च में आरवाइए के जिला सचिव जयशंकर पंडित, आइसा जिला सचिव अनी, सुनील यादव, मृत्युंजय कुमार, राजतारा कुमारी, इंद्रजीत कुशवाहा, मंटू चौधरी, इंदल कुमार और रोहित कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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