सरयू का जलस्तर बढ़ने से सीवान के दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा, तेज कटाव की वजह से सैकड़ो एकड़ उपजाऊ जमीन बर्बाद

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सरयू मे जलस्तर बढ़ने से दरजनभर गाँव मे बाढ़ का खतरा

Bihar Flood: सीवान में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर तटीय इलाके के किसानों की चिंता बढ़ गयी है.हालांकि दरौली में खतरे के निशान से 5 सेंटीमीटर नीचे सरयू नदी बह रही है.

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Bihar Flood News: सीवान में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर तटीय इलाके के किसानों की चिंता बढ़ गयी है.हालांकि दरौली में खतरे के निशान से 5 सेंटीमीटर नीचे सरयू नदी बह रही है.उधर गुठनी प्रखंड क्षेत्र में सरयू नदी ने जहां किसानों के खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ फसलों को नुकसान पहुंचाया. वहीं जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.

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जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गाँवों मे बाढ़ का खतरा

इस साल अब तक 115 एकड़ से अधिक कृषि योग्य भूमि नदी के तेज कटाव में जमींदोज हो चुकी है. दरौली में दो दिनों में 33 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर सरयू नदी के जलस्तर में लगातार इजाफा हो रहा है. जिससे तटवर्ती इलाके के लोगों को चिंता सता रही है. दरौली में भी दो दिनों में 33 सेंटीमीटर जलस्तर का बढ़ोतरी दर्ज किया गया है.पहले 60.44 था, जो बढ़कर 60.77 पर पहुंच गयी है.

खतरे के निशान से अभी दूर है सरयू

दरौली में सरयू खतरे के निशान से मात्र पांच सेंटीमीटर नीचे बह रही है. कटाव से सबसे ज्यादा क्षति दरौली के नरौली और करमहा क्षेत्र में है .कटाव संभावित इलाकों को देखते हुए जल संसाधन विभाग द्वारा यहां कटाव निरोधक ठोकर भी बनाया है पर नदी के कहर के आगे कटाव निरोधक ठोकर भी काम नहीं आता है. केन्द्रीय जल आयोग के कार्य सहायक के पी सिंह ने बताया कि खतरा की कोई बात नही है. सरयु नदी दरौली मे खतरे के निशान से दुर है.

सैकड़ो एकड़ जमीन का हो चुका कटाव

जलस्तर बढ़ने से गुठनी दर्जनों गांवों पर मंडरा रहा है बाढ़ का खतरा गुठनी. प्रखंड में सरयू नदी के बाढ़ ने जहां किसानों के खेतों में लगी सैकड़ों एकड़ फसलों को नुकसान पहुंचाया. वहीं सरयू नदी में जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. इस साल 115 एकड़ से अधिक कृषि योग्य भूमि नदी के तेज कटाव में जमींदोज हो गया. किसान इस बात से खासे चिंतित हैं कि आने वाले दिनों में वह खेती कैसे कर पायेंगे. इसका सबसे बड़ा कारण बाढ़ के बाद निचले इलाकों में जलजमाव, खेतों में खरपतवार और नमी है. किसानों का कहना है कि बाढ़ के पानी के बाद खेतों में महीनों तक नमी मौजूद रहता है. जिससे जुताई, बुवाई और बीजों का सही से रोपण नहीं हो पाता है.

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बाढ़ की वजह से पीछे हो जाती है खेती

प्रखंड में बाढ़ के पानी से जहां हर साल सैकड़ों एकड़ फसलों को नुकसान पहुंचता है वही बाढ़ के पानी से करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि पर जलजमाव हो जाता है. जिनमें बलुआ, तिरबलुआ, ग्यासपुर, मैरिटार, पाण्डेयपार, खडौली, योगियाडीह, गोहरुआ, गुठनी पश्चिमी, श्रीकरपुर समेत दर्जनों गांव के किसान बाढ़ के पानी से आने वाले मौसम की खेती पर पीछे हो जाते हैं. उनका कहना था कि समय से खेती नहीं होने से फसलों पर इसका काफी असर पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि जल संसाधन विभाग द्वारा अगर समय पूर्व इसकी तैयारी कर ली जाती तो हम लोगों को इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ता.

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